नेपाल-भारत बीच सम्पन्न ‘वाहन समझौता’ को अविलम्ब लागू किया जाना चाहिए : राजदूत रंजीत राय

DSC_1942( हि.स.) २५-४-०१५ भारतीय राजदूत रंजीत राय ने आरोप लगाया है कि नेपाल में विद्यमानों कानून के कारण नेपाल भ्रमण पर आनेवाले भारतीय पर्यटकों, तीर्थयात्रियों एवं अन्य गाड़ी मालिकों को भारी यातनाएं दी जाती हैं जिससे उन्हें आत्महत्या तक करने को बाध्य होना पड़ता है।

भारतीय राजदूत राय सिद्धार्थनगर उद्योग वाणिज्य महासंघ द्वारा पश्चिमी नेपाल के भैरहवा में 24 अप्रैल को आयोजित एक स्वागत कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा यदि भारतीय गाड़ी मालिकों द्वारा नेपाली कानून का उल्लंघन हो भी जाए तो उनपर एक निश्चित जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जानी चाहिए। जबकि, इसकी जगह नेपाली अधिकारियों द्वारा भारतीय गाड़ी मालिकों की मंहगी गाडि़यों तक को ‘मात्र कागजात अभाव’ का कारण दिखाकर नीलाम कर दिया जाता है। जिस कारण, नेपाल आनेवाले भारतीयों को आत्महत्या करने को बाध्य होना पड़ता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत से नेपाल आनेवाले पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों से नेपाली पुलिस हर दस किलोमीटर की दूरी पर जबरन रकम वसूला करती है। उन्होंने कहा इस समस्या का समाधान के लिए दोनों देशों के बीच सम्पन्न हो चुके ‘वाहन समझौता’ को अविलम्ब लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा दोनों ही देशों के बीच वाहन समझौता तो हो चुका है लेकिन नेपाल में पहले से विद्यमान कानून के कारण उसके कार्यान्वयन में कठिनाई हो रही है। उन्होंने बताया उक्त कानून में संशोधन के लिए संबंधित स्थान पर अनुरोध किया जा चुका है और हमें उमीद है कि शीघ्र ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा जिससे दोनों देशों के बीच निर्वाधा आवा-जाही में कोई कठिनाई नहीं होगी। उन्होंने बताया नेपाली कानूनों में संशोधन के बाद दोनों देशों की गाडि़़यां, बिना कोई शुल्क वा टैक्स चुकाए, सात दिनों तक एक दूसरे देशों रह सकेंगी, आ-जा सकेंगी, इसकी तैयारी चल रही है।
भारतीय राजदूत ने बताया भारत (उत्तर प्रदेश) के नौतनवां निकट नेपाल के मर्चवार तक रेल लाइन का विस्तार कर, माल सामान अनलोड करने के विषय में भी सर्वे किया जा रहा है।
स्वागत कार्यक्रम में उपस्थित रूपन्देही क्षेत्र नं. 4 के संविधान सभा सदस्य इश्तियाक अहमद ने भारतीय राजदूत का स्वागत करते हुए विश्वास दिलाया कि इस क्षेत्र के उद्योगी-व्यावसायी भारत द्वारा किए जा रहे रेलवे विस्तार के कार्य में हर सहयोग प्रदान करेंगे।(हि.सं.)

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