नेपाल-भारत महिला मैत्री समाज का संक्षिप्त परिचय

पृष्ठभूमि
बिशेषताः नेपाल भारत का सम्बन्ध सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक परम्परा पर आधारित है । इसीलिए नेपाल और भारत के बीच के सम्बन्ध का विशेष

Chanda-Chaudary

संस्थापक अध्यक्ष
चन्दा चौधरी

कहा जाता है । इस विशेष सम्बन्ध को और प्रगाढ एवं मजबूत बनाने में दोनो देशो के महिला समाज की अहम भूमिका को इन्कार नहीं किया जा सकता है । परम्परागत मैत्री को और मजबूती प्रदान करने के लिए दोनों देशके सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, भाषा संस्कृति, कला, साहित्य के क्षेत्र में कार्यरत महिला समाज के व्यक्तत्वों को नेपाल-भारत के मित्रता के अग्र भूमिका में लाने के उद्देश्य से यह संस्था नेपाल-भारत महिला मैत्री समाज का स्थापना किया गया है ।
संस्थाका उद्देश्यः
१)     सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, भाषा संस्कृति, कला, साहित्य के क्षेत्र में कार्यरत एवं स्थापित दोनो देशो के महिलाओं को एक आपस मंे सहकार्य करना, अनुभव आदान प्रदान करना और इसके माध्यम से नेपाल-भारत के मित्रता को और मजबूत वनाना इसका मूल उद्देश्य है ।
२)     नेपाल-भारत दोनों देशों की महिलाओं के बीच पारस्परिक मैत्री भावना अभिवृद्धि कारणा ।
३)     नेपाल-भारत बीच के मित्रतामे महिलाओ की भूमिका प्रभावकारी बनाना ।
४)     नेपाल-भारत के बीच खुली सीमा और समान भाषा संस्कति एवं धार्मिक परिवंश है । पारम्पारिक वैवाहिक सम्बन्ध और होली, दिपावली, छठ, दशहरार्,र् इद जैसे दोनों देशों के समान पर्व इवं त्यौहार के अवसर पर सीमा क्षेत्र मंे मैत्री पर्व, मैत्री त्यौहार, मैत्री विवाह आदि संयुक्त आयोजना कर दोनांे देशों के जनता में मैत्री सदभाव बढाना ।
५)     कला, साहित्य, खेल जगत आदि जैसे तमाम क्षेत्रों के माध्यम से दोनांे देशांे के मित्रता को प्रगाढ बनाने में अहम भूमिका निर्वाह करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित कर मैत्री भावनाको विस्तार करना कराना ।
६)     हरेक क्षेत्र में दोनों देशों के महिलाओं की सहभागीता को विकसित एवं विस्तारित करना तथा पारस्परिक अनुमओ को आदान प्रदान करना ।
७)     विकास के विभिन्न आयामांे में दोनों देशों की महिलाओं को जागरुक कराना एवं पारस्परिक सहयोग करना कराना ।
८)     समान क्षेत्र में कार्यरत दोनों देशों के महिलाओं अनुभव आदान प्रदान करने का अवसर प्रदान करना कराना ।
९)     दोनांे देशों के मित्रता को विश्वसनीय एवं मजबूत बनाने वाले विषय वस्तु पर, सभा, गोष्ठी, सेमिनार, वकतृत्व प्रतियोगिता आदि आयोजना कर एक आपस के सम्बन्धो को विस्तार करना करना ।
१०) दोनांे देशों के ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं संस्कृतिक धरोहरो का संरक्षण सर्म्वर्धन करना करना ।
११) धर्म, सांस्कृतिक, सभ्यता, भाषा, साहित्य, कला, राष्ट्रिय एवं सामाजिक उथान के लिए संयुक्त रुप से कार्यक्रम आयोजना करना करना तथा इसके सम्वन्धन के लए कार्य करना और करना ।
१२) शिक्षा और रोजगार के अवसर में दोनांे देशों के जनता को सहकार्य करना कराना ।
संगठनात्मक स्वरुप
१) केन्द्रीय कार्य समितिः(
इस संस्था का केन्द्रीय कार्य समिति इक्कीस सदस्यीय होगा। तत्काल अभी केन्द्रीय कार्य समिति मंे सात संदस्य है । उदघाटन कार्यक्रम के बाद बाँकी सदस्यो का मनोनयन कर पर्ूर्ति किया जाएगा। केन्द्रीय कार्य समिति के निर्ण्र्ाानुसार अन्य इकाई -गलष्त) का गठन किया जाएगा ।
२) सलाहकार समितिः(
इस संस्था के मानार्थ सदस्योंें में से विभिन्न क्षेत्रो में कार्यरत के दोनो देशो के प्रबुद्ध व्यत्तित्व का एवं सलाहकार समिति होगा ।
३) संरक्षक समितिः(
इस संस्था को अभिभावकत्व प्रदान कर जीवन्तता देने वाले दोनों देशों के विशिष्ट व्यक्तियो का एक संरक्षक समिति होगा । जो कार्य समिति के र्सवसम्मत सल्लाह से मनोनयन किया जाएगा ।
आगामी कार्यक्रमः(
विधान के उद्देश्य अनुरुप के कार्य वाषिर्क रुप से कार्य योजना वनाकर किए जाएगें। तत्काल इस संस्था सम्बन्धी जानकारी हेतु भारत की राजधानी नयी दिल्ली में प्रचारात्मक सेमिनार किया जाएगा ।

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