नेपाल-भारत: सुख दुख के साथी : शुषमा स्वराज (भाषण का हिंदी रूपांतरण)

shushma shwarajअनुवाद तथा प्रस्तुति-पंकज दास, काठमांडू , २७ जून २०१५ |नेपाली जनता के अदम्य साहस को विकराल विपत और निरंतर का पराकम्पन भी नहीं हिला पाया. विपत की बेला में नेपाली जनता की पहचान शांत और सौम्यता के रूप में उभर कर आई है. मैंने क्षत-विक्षत जीवन और समुदाय के पुनर्निर्माण में सभी नेपाली जनता की दृढ इच्छाशक्ति को देखा है. हरेक चुनौती अवसर के रूप में आता है और हरेक विपत्ति से ही शक्ति उभर कर आती है. अत: निश्चित ही विनाश की क्षत विक्षत भग्नावशेष से सबल, सशक्त और दिध नेपाल का उदय होगा ऐसा मेरा विश्वास है.
आज मैं प्रत्येक पीड़ित नेपाली जनता के आंसुओं को पोंछने आई हूँ. साथ ही आपकी अपेक्षा के अनुरूप भारत सरकार, भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और १२५ करोड़ भारतीय जनता के तरफ से आपके दुःख को बांटने और पुनर्निमाण में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस विपत्ति को पार लगाने की प्रतिबद्धता जाहिर करती हूँ.
नेपाल पर आए इस विपत की बेला में भारत ने अपने तरफ से हर समय और हर संभव सहानुभूति, सहयोग और सहृदयता दिखाया है. हमने इस विपत की बेला में शीघ्र, निरंतर, और भरपूर सहयोग कर अपना पड़ोसी का धर्म निर्वाह किया है. नेपाल और नेपाली जनता पर आए दुःख की इस घडी में कन्याकुमारी से काश्मीर तक और अरुणाचल से लेकर पोरबंदर तक की जनता और संस्थाओं ने अपने अपने तरफ से मदत किया है. भारत की केन्द्र सरकार, प्रांतीय सरकारें, गैर सरकारी संस्थाएं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, उद्योग घरानों और इन सबसे बढ़ कर भारत की आम जनता ने दिल खोल कर नेपाली जनता को सहयोग किया है. नेपाल पर आए आफत विपत को हमने अपने देश की पीड़ा समझ कर उसे दूर करने और आपके गम बांटने का काम किया. भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी खुद इन सब राहत और उद्धार कार्यों का नेतृत्व संभाले हुए थे. महाविनाशकारी भूकंप के ६ घंटे के भीतर ही हमारी उद्धार टोलु नेपाल पहुच चुकी थी. नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर उद्धार, राहत और प्रारम्भिक उत्थान कार्य में हमारी पूरी टीम जुट गई थी.
भारतीय सेना, एनडीआरएफ, सरकारी संस्था तथा स्वयंसेवक खाद्यान्न वासस्थान, दवाइयां तथा प्राविधिक सहयोग सबकुछ साथ साथ ही भेज दिया गया था. भारत सरकार के तरफ से चलाए गए आपरेशन मैत्री पर ही करीब ६४० करोड़ रूपये खर्च किया गया. दुनिया के किसी भी देश में भारत के द्वारा प्राकृतिक आपदा में किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा सहयोग था. अन्य देशों की तुलना में कई गुना अधिक सहयोग किए जाने के बावजूद हमारे लिए नेपाली जनता की पीड़ा में भारत के द्वारा व्यक्त सहानुभूति, निरंतर और हार्दिक सहयोग हमारे लिए अधिक महत्त्व रखता है.
नेपाल अब तक का सबसे बड़ा पुनर्निर्माण कार्य की तैयारी में है. नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग ने दो से अधिक अन्तराष्ट्रीय विशेषज्ञों के परामर्श के आधार पर जो पुनर्लाभ आवश्यकता मूल्यांकन तैयार किया है उसके लिए मैं हार्दिक बधाई देना चाहती हूँ. सहभागितात्मक तथा विश्वसनीय अन्तराष्ट्रीय प्रयास के रूप में माने गए PDNA निर्माण में भी भारत को सहभागी कराए जाने पर हम गर्व का अनुभव करते हैं.
PDNA प्रतिवेदन के अनुसार पुनर्निर्माण के लिए ६.७ अरब अमेरिकी डालर का अनुमान किया गया है. इतने बड़े रकम के लिए स्रोत साधन परिचालन का काम अपने आप में चुनौतीपूर्ण है तथापि नेपाल अकेला नहीं है. नेपाल के प्रति सहयोग की भावना रखने वाले देशों की कोई कमी नहीं है. यदि हम सब एकजुट हुए तो इस चुनौती को सहज ही पार किया जा सकता है. हमारे सबसे घनिष्ठ और प्राचीन मित्र तथा अतिनिकटतम पड़ोसी देश को सहयोग करने के लिए नेतृत्वदायी भूमिका लेते हुए कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने को भारत सदैव तैयार है.
इतनी बड़ी रकम जुटाना जितना मुश्किल है उसका सदुपयोग करना उतनि ही बड़ी चुनौती है. रकम की पारदर्शी सदुपयोग और PDNA के उद्देश्य को हासिल करने का काम आसान नहीं है. इसके लिए चुस्त सस्थागत संयंत्र तथा दक्ष, सशक्त और अथक समर्पण व्यवस्थापकीय समूह की आवश्यकता होती है. नेपाल सरकार के द्वारा ऐसे सशक्त असाधारण संस्य्त्र स्थापना करने के निर्णय का हम स्वागत करते हैं. नेपाल को इस मामले में सहयोग करने के लिए अपने विशेषज्ञों और अनुभव बांटने के लिए अपने पेशागत समूह को काम पर लगाने को तैयार हैं.
नेपाल और भारत का संबंध इतिहास जितना पुराना है. हमारे बीच समान सांस्कृतिक, धार्मिक, परम्परागत, भाषिक, साहित्यिक और मिथकीय संबंध है. एक ही हिमालय और नदियों से हम पृष्ठपोषित हैं. हमारे बीच रोटी-बेटी का संबंध है. हम दोनों ही प्राकृतिक विपत्ति प्रति संवेदनशील हैं. १९३४ के भूकंप से नेपाल और बिहार को तहस नहस बनाया था तो २०११ के भूकंप से सिक्किम और नेपाल दोनों समुदाय को असर हुआ था. बरसात के दिनों में आने वाले बाढ़ से दोनों देशों की जनता आहत होती हैं. २५ अप्रैल और १२ मई को आए भूकंप से नेपाल में तो काफी क्षति हुई थी लेकिन बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल भी इससे अछुता नहीं रहा. इसका मतलब साफ़ है कि हम सिर्फ सुख के ही नहीं बल्कि दुःख के भी साथी हैं.
इन सभी पृष्ठभूमि और नेपाल के साथ हमारे विशेष संबंध के आधार पर भूकंप के पुनर्निर्माण में सहयोग करने के लिए भारत सरकार ने १० हजार करोड़ रुपये प्रदान करने और इसका एक चौथाई रकम अनुदान के रूप में सहयोग देने की घोषणा करती हूँ. यह सहयोग आगामी ५ वर्ष के लिए जारी द्विपक्षीय अनुदान तथा ऋण सहयोग स्वरूप १ अरब अमेरिकी डालर से अलग सहयोग है. आने वाले पांच वर्ष के लिए हमारा कुल सहयोग अब २ अरब अमेरिकी डालर होगा.
गत वर्ष प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा किए गए दो बार के नेपाल भ्रमण के कारण विभिन्न क्षेत्रों की द्विपक्षीय सहयोग में महत्वपूर्ण योगदान पहुचाने वाला है. अब जलविद्युत परियोजना द्रुतगति में आगे बढ़ेगी तथा निजगढ़ विमानस्थल और काठमांडू-निजगढ़ द्रुतमार्ग परियोजना यथाशीघ्र कार्यान्वयन करने की ओर हमें आगे बढ़ना होगा.
साझा और उच्च उद्देश्य में सहकार्य का संकेत करते हुए चार दिन पहले ही पूरी दुनियां ने अन्तराष्ट्रीय योग दिवस मनाया है. आज योग के प्राचीन दर्शन से प्रेरणा लेते हुए और अधिक उत्साहित होकर नेपाल के पुनार्निरामं में हम साथ-साथ आगे बढे.
(नेपाल पुनर्निर्माण अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन-२०१५ में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के द्वारा दिए गए भाषण का पंकज दास के द्वारा हिंदी रूपांतरण)

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: