नेपाल में दिवाली मनाने का अपना अनोखा अन्दाज,आज से तिहार शुरु : विजेता चौधरी

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विजेता चौधरी,काठमांडू, कार्तिक १२ ।आज से यमपञ्चक अर्थात तिहार शुरु, 
दिवाली, भाइटीका अर्थात भाइदूज लगायत पाँच दिनों तक मनाया जाने वाला त्योहार को तिहार की संज्ञा दिया गया है । इसे यमपञ्चक भी कहा जाता है ।
वैसे दिवाली रौशनी का त्योहार है । यद्यपि नेपाल में दिवाली को लक्ष्मीपूजन ने विशेष बनाया है । दिया जलाकर दिवाली मनाने से अधिक लक्ष्मी का पूजन विशेष महत्व रखती है । इसी लिए भी यहाँ दिवाली को जनमानस लक्ष्मीपूजा के रुप में स्वीकारती है ।
तिहार का पहला दिन काग (कौवा) तिहार मनाया जाता है । इस दिन यमराज के दूत मानेजाने वाले कोवा का पूजा किया जाता है ।
 दुसरे दिन कुकुर तिहार के रुप में भैरव अर्थात कुत्ते का पूजा किया जाता है । माला, अबीर व पकबान खिलाकर भैरव रुपि कुत्ते का पूजा करने का प्रचलन चलता आ रहा है ।
तिहार के तिसरे दिन गाइ तिहार तथा लक्ष्मीपूजा अर्थात दिपावली मनाया जाता है । ये दिन कार्तिक कृष्ण अमावश्या अर्थात औंसी का दिन है । इस दिन लक्ष्मी की पूजा करने के साथ दिप जला कर अंधेरे को भगाया जाता है । वहीं स्वर्ण, तमा, झाडु व सुप लगायत की सामाग्रियों का भी पूजा विशेष धुमधाम के साथ किया जाता है ।
तिहार के चौथा दिन गोरु (बैल) तिहार भी मनाया जाता है । संस्कृत विद बताते हैं इस दिन अन्नपात तथा बाली लगानेवाले प्राणी के रुप में शदियों से सम्मान के साथ बैल का पूजा किया जाता है ।
इसी प्रकार तिहार के अन्तिम दिन अर्थात पाँचवे दिन भाइ तिहार, अर्थात भाइदूज मनाने का प्रचलन रहा है । इस दिन दिदी बहने अपने भाइयों को प्रेम व सम्मानभाव से टीका लगाकर पूजा करती हैं ।
मानाजाता है भाइ टीका के दिन ही यमराज की बहन ने अपने भाई यमराज कि पूजा की थीं । इस दिन नेपाली दिदी बहने अपने भाइयों को कभी नहीं मुरझाने वाली मखमली फूल की माला पहनाती है । बज्र ओखर को द्वार पर फेरती है ताकि शत्रु अपने भाइयों को कभी दुःखकष्ट नादे । और ललाट पर सप्तरंगी टीका लगाकर उपहार प्रदान करने का चलन है । वहीं भाइ भी अपनी बहनों को उपहार देकर प्रमेभाव दर्शाते हैं ।
संस्कृतिविद डा. रेवतीरमण लाल बताते हैं भाइ टीका व लक्ष्मीपूजा से तिहार पर्व का महत्व और बढ जाता है ।
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