नेपाल में विश्वास खोता चीन

विशेष अदालत ने चिनियां नागरिक ली जिऊ लीन को १ वर्षकैद तथा २१ लाख २५ हजार रुपये जर्ुमाना लगाया है। साथ ही अदालत ने ली के पास से बरामद किए गए २२ लाख रुपये में से २१ लाख २५ हजार रुपये भी जब्त करने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं उनके द्वारा प्रयोग होते आ रहे जाापनी टोयाटा भी जफ्त करने को कहा है।
काठमांडू के सिंहदरबार के ठीक आगे रहे खाद्य संस्थान के ३६ रोपनी -लगभग ५४ बिघे) के कम्पाउण्ड में तरकारी खेती के साथ ही मछली पालन के लिए चिनियां नागरिक ली ने टनेल व तलाव बनवाया था। खाद्य संस्थान की उस जमीन को किस आधार में एक विदेशी नागरिक को दिया गया था, यह बात अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि सब्जियाँ व मछली तो नाम के लिए ही था, असली में वहाँ पर गैर कानूनी तरीके से चिनियाँ नागरिक के द्वारा यार्चागुम्बा का अवैध कारोबार होता था।
पिछले वर्षपौष १८ गते के दिन नेपाल पुलिस ने वहाँ छापा मारा था। उस जगह पर यार्चागुम्बा के साथ ही २२ लाख ५० हजार रुपये की कीमत वाली डिप्लोमेटिक नम्बर प्लेट की गाडÞी बरामद की गई थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वह गाडी चिनियाँ दूतावास के नाम से रजिष्ट्रेशन कर्राई गई थी। डिप्लोमेटिक गाडÞी से अवैध करोबार करने पर चिनियाँ नागरिक को १० दिनों की कैद के साथ ही संपत्ति शुद्धीकरण का मुकदमा भी विशेष अदालत में दायर किया गया। पुलिस द्वारा पूछे जाने पर चिनियाँ नागरिक ली ने बताया कि चिनियाँ दूतावास के रजिष्ट्रेशन वाली गाडÞी नयाँ बानेश्वर स्थित अन्तर्रर्ाा्रीय सम्मेलन केन्द्र बनाने वाले ठेकेदार ने उसे दी थी। लेकिन अदालत ने उनकी दलील नहीं मानी। उनके पास से बरामद किए गए २१ लाख ५० हजार नगद रुपये के बारे में भी वे झूठ बोलते रहे। जिस पर अदालत ने उन्हे कडÞी फटकार लगाई थी।
खेती के नाम पर अवैध कारोबार
चिनियाँ नागरिक के द्वारा इस तरह से राजधानी सहित देश के विभिन्न हिस्सो में जमीन लीज पर लेकर खेती के नाम पर कुछ और ही धन्धा किए जाने का तथ्य सामने आया है। ली की ही तरह एक अन्य चिनियाँ नागरिक ने ललितपुर के सैंबू भञ्ज्यांग के किनारे खोकना गाविस अर्न्तर्गत ४० रोपनी जमीन खेती के लिए ली थी। लेकिन स्थानीय बासियों का कहना है कि उक्त जमीन में भी किस चीज की खेती होती है, यह कोई नहीं जानता है। कई बार वहाँ चिनियाँ दूतावास की गाडÞी आती रहती है। इस जमीन को लेने के लिए चिनियाँ दूतावास ने अपने नागरिक को अनुदान भी दिया था।
इसके जानकार लोगों का कहना है कि सिंहदबार के आगे कृषि संस्थान की जमीन पर भी चिनियाँ सरकार के ही अनुदान में आर्चागुम्बा की अवैध खेती की जाती थी। सरकार की तरफ से सिर्फदो वर्षतक ही अनुदान मिलने के कारण सरकार को धोखा देने के लिए हर दो वर्षमें स्थान परिवर्तन करना चिनियों व्यापारी का पुराना धन्धा है। कभी काठमांडू, ललितपुर व भक्तपुर में खेती के नाम पर जमीन लेकर उस में अवैध कारोबार करने की जानकारी पुलिस को मिलने के कारण उपत्यका क्षेत्र के अधिकांश चिनियां व्यवसायी इन दिनों तर्राई के विभिन्न जिलों में चले गए हैं।
चिनियां के कारण डूबे दो बैंक
चिनियां नागरिकों व निवेशकों के कारण नेपाल के दो बैंक डूब गए है। इसी कारण नेपाली बैर्ंकर्स एसोसिएसन ने चिनियां बैंक की ग्यारन्टी स्वीकार नहीं करने का औपचारिक निर्ण्र्ााकर लिया है। मेलम्ची सुरंग निर्माण का ठेका पाने वाली चाइना रेलवे व्यूरो काम किए बिना बीच में छोडÞकर चलती बनी जिस के कारण इस कम्पनी ने जिन दो बैंकों से कर्ज लिया था, वह नहीं चुका पाने के कारण अरबों का नुकसान हुआ है।
मेलम्ची में काम करने आई चिनियाँ कम्पनी ने बैंक अफ काठमांडू तथा हिमालयन बैक को वापस करने वाली १ अरब से अधिक रकम पचाकर चलती बनी, जिससे यह दोनों बैंक डूबने के कगार पर पहुँच गई है।
चाइना कंस्ट्रक्सन बैंक को हिमालयन बैंक का ५८ करोड ३१ लाख और बैंक अफ काठमांडू का एक करोड २१ लाख रुपयाँ चुक्ता करना अभी बाँकी ही है। इस चिनियाँ बैंक ने बैंक गारन्टी को वापस नहीं किया, जिस कारण नेपाल में चिनियाँ बैंक व निवेशकर्ताओं के ऊपर का विश्वास खत्म हो गया है।

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