नेपाल में सजगता आवश्यक

एस के द्विवेदी:नेपाल के कुछ राजनीतिज्ञों की हत्या और भारतीय कूटनीतिज्ञों का अपहरण हो सकता है, ऐसी चेतावनी सहित भारत सरकार द्वारा एक महीना पहले भेजे गए गोप्य पत्र से नेपाल में सनसनी फैलना, स्वाभाविक है । खासकर भारत में मोदी सरकारगठन पश्चात् उसके मुख्य दुश्मन के रूप में रहे पाकिस्तान का भारत के प्रति आक्रामक रवैया बढÞता जा रहा है । पाकिस्तान की खुफिया संस्था आइएसआई की ओर से नेपाल के खुले बोर्डर का लाभ उठाते हुए सञ्चालित आतंकवाद और जाली नोट सम्बन्धी काम में कुछ कमी आने पर पाकिस्तान द्वारा सञ्चालित आतंकवादी संगठनों द्वारा नेपाल में उथल-पुथल मचाने की आशंका बढÞ गई है । दूसरी ओर नेपाल में आइएसआई और चीन ने भी अभूतपर्ूव रूप में घुसकर भारत-नेपाल सम्बन्ध को बहुत ही बिगाडÞा है । लेकिन मोदी भ्रमण के बाद दोनों देशों की जनता में विकास और समझदारी के बहुत सारे संकेत नजर आए हैं ।
भारत द्वारा प्रेषित पत्र की गम्भीरता को देखते हुए सजगता अपनाना बहुत जरूरी है । नेताओं के ऊपर जो खतरा दिखाई दिया है, इससे र्सार्वजनिक सुरक्षा और मनोविज्ञान को प्रभावित करेगा । नेपाल में इन्डियन मुजाहिद्दीन और अलकायदा के प्रतिनिधि घुसकर भारतीय कूटनीतिज्ञों का अपहरण और नेपाली राजनीतिज्ञों की हत्या की सम्भावना की ओर संकेत करते हुए पत्र में भारतीय दूतावास के कर्मचारी और वीरगंज कन्सुल अफिस तथा विराटनगर के अस्थायी शिविर की सुरक्षा व्यवस्था में और ज्यादा चौकसी अपनाने के लिए आग्रह किया गया है । आतंकवादियों की धमकी और सम्भावित खतरे को कभी नजरअन्दाज नहीं करना चाहिए । कुछ समय पहले पोखरा से इन्डियन मुजाहिद्दीन के दूसरे नम्बर के कमाण्डर यासिन भटकल की गिरफ्तारी, पश्चिम से लश्करे  तोयवा के टुन्ड की गिरफ्तारी आदि घटना से मुस्लिम आतंकवादी संगठनों की सक्रियता नेपाल में बढी है, यह प्रमाणित होता है । खासकर पाकिस्तानी खुफिया संस्था आईएसआई द्वारा सञ्चालित गतिविधि नेपाल में व्यापक रूप में बढÞी हर्ुइ है, इसे नकारा नहीं जा सकता ।
इस ओर नेपाल सरकार को सचेत और सक्रिय होना चाहिए । देश में अराजकता और अनिश्चिता व्याप्त है । परिवर्तन संस्थागत नहीं हुआ है और नेपाली जनता की प्रत्यक्ष संलग्नता के बिना वह सम्भव भी नहीं है । नेपाल भारत सम्बन्ध, भौगोलिक निकटता, ऐतिहासिक निरन्तरता, समान संस्कृति, सम्पदा, पारिवारिक सम्बन्ध और मजबूत आर्थिक सम्बन्ध में आधारित है । साथ ही भारत में नेपाल ने शान्ति स्थापना और लोकतन्त्र के विकास के लिए अनवरत सहयोग प्रदान किया है । भारतीय जनता ने नेपाली जनता को हमेशा अपने छोटे भाई के रूप में माना है तो नेपाली जनता ने भी भारतीय जनता को अपने बडे भाई के स्थान में रखा है । नेपाल भारत के बीच प्राचीन काल से चले आ रहे धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक सम्बन्ध हैं । अब आनेवाले दिनों में इन सम्बन्धों का क्या रूप होगा – भारत ने नेपाल के राजनीतिक आर्थिक क्षेत्र में प्रशंसनीय सहयोग किया है, फिर भी नेपाल में कुछ व्यक्ति और समूह तात्कालिक एवं संकर्ीण्ा सोच से निर्देशित होकर समय-समय में नेपाल भारत सम्बन्ध को कमजोर बनाने में लग जाते हैं ।
राष्ट्रीयता के नाम में भारत विरोधी अनेक प्रोपोगण्डा फैलाकर सीधे-साधे नेपाली जनमानस में भारत के विरुद्ध विष घोला जाता है । सत्ता में न होने तक कभी कालापानी, कभी सीमा अतिक्रमण, कभी १९५० की सन्धि इत्यादि विषयों में विभिन्न नारा तथा विरोधात्मक कार्यक्रम यहाँ के नेता और पार्टियों की ओर से होते रहते हैं । जिसके चलते नेपाल और भारत के बीच असमझदारी का वातावरण बन जाता है । एक दूसरे की भूमि में अपना हित सुरक्षित नहीं है, ऐसी मानसिकता और एक दूसरे के आशय को शंका की दृष्टिकोण से देखने की प्रवृत्ति दोनों देशों में मजबूत होतीे जा रही है । नेपाली नेता भारत जा रहे हैं, ऐसा सुनते ही यहाँ की मीडिÞया और नेता अनेक झूठे प्रोपोगण्डा उत्पन्न कर भारत विरोधी प्रचार शुरु कर देते हैं । जिसके चलते राष्ट्रीयता और नेपाल के हित विपरित कोई भी सन्धि समझौता न करने की प्रतिवद्धता र्सार्वजनिक रूप में नेपाली नेताओं को दुहराना पडÞता है । फलस्वरूप नेपाल और भारत के बीच होने वाले समझौते और विकास निर्माण के काम खर्टाई में पडÞ जाती है ।
भारतीय दूतावास ने नेपाल के गृहमन्त्रालय को सेप्टेम्बर २४ के रोज जो पत्र भेजा था, उस में सजगता के प्रति सकारात्मक होकर सतकर्ता अपनाने के लिए कहा गया है । नेपाली राजीतिज्ञों की जान खतरे में होना, भारतीय कूटनीतिज्ञों का अपहरण होना, यह अत्यन्त संवेदनशील विषय है । काठमांडू अन्तर्रर्ाा्रीय विमानस्थल से भारत के लिए उडेÞ इन्डियन एयरलाइन्स के विमान का अपहरण वाली घटना से नेपाल को शर्मिन्दा होना पडÞा । उसकी पीडÞा भारत ने अतुलनीय रूप में भोगी है । अभी उठाए हुए विषय का विश्लेषण करते हुए इसके प्रति नेपाल को सम्वेदनशील होना बहुत जरूरी है । दक्षिण एसियाली क्षेत्रीय सहयोग संगठन -र्सार्क) का शिखर सम्मेलन नेपाल में होने जा रहा है । भारतीय कूटनीतिज्ञ का अपहरण और नेपाली राजनीतिज्ञ की हत्या सम्बन्धी अडÞकलबाजी को विश्वसनीयता के साथ सम्बोधन करने का प्रयास सरकार नहीं करेगी तो र्सार्क के सदस्य राष्ट्र इस घटना को किस तरह लेंगे – यह सोचने की बात है ।
पत्र में विमान अपहरण की सम्भावना भी दिखाई गई है । १४ वर्षपहले हुए भारतीय विमान का अपहरण से नेपाल की छवि बुरी तरह बिगडÞी है । आठ सदस्य राष्ट्रों के कार्यकारी प्रमुख र्सार्क सम्मेलन में सहभागी होने आ रहे हैं । उन में उच्च जोखिम में रहनेवाले भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी, श्रीलंका के राष्ट्रपति महेन्द्रा राजापक्षे के साथ ही अन्य सबों की सुरक्षा की जिम्मेवारी मेजवान देश नेपाल पर है ।
भारत के मुर्म्बई, दिल्ली, बनारस, पटना कहीं भी आतंकवादी घटना होती है तो उस के योजनाकार नेपाल के अन्दर घुसने और छिपने की सम्भावना बलवती रहती है । इसलिए ऐसे अवाञ्छित आपराधिक और हिंसात्मक कार्यों को अञ्जाम देने के लिए आपराधिक मनोवृत्ति वाले हमेशा तैयार रहते हैं ।
इसलिए ऐसी सम्भावित दर्ुघटना को बटमलाइन में रखते हुए सुरक्षा सञ्जाल को मुस्तैदी के साथ फैलाना जरूरी है । अफगानी तालिवान के साथ सम्वद्ध -कायदा अल जिहाद) नामक अलकायदा का भातृ संगठन भारत में खुल गया है, यह समाचार बाहर आने पर उसे अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए और संसार का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने के लिए भी ऐसे महत्वपर्ूण्ा सम्मेलन, सभास्थल और व्यक्तियों को अपने आपराधिक योजना में हिटलिस्ट के अन्दर रखने की आशंका बनी रहती है । इस बात को नकारा नहीं जा सकता । ऐसा कहते समय यह न सोचा जाए कि आसन्न र्सार्क सम्मेलन बहुत ही खतरनाक स्थिति से गुजर रहा है । हर हिसाब से सुरक्षा निकाय और सम्बन्धित विभाग को कडÞी र्सतर्कता अपनाने की जरूरत है ।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: