नेपाल में सरकारी लेखा परीक्षण
एन.के. झा

आर्थिक कारोबारीय लेखा की शुद्धता एवं नियमितताओं का जाँच करके आर्थिक क्रियाकलापों की छयाँ पर प्रकाश देने का कार्य ही लेखापरीक्षण कहलाता है। नेपाल मेर्ंर् इस कार्य को तीन चरणों में पूरा किया जाता है। प्रथम चरण में सम्बन्धित निकायों में कार्यरत लेखा समूहों का कार्यरत लेखापाल कर्मचारी द्वारा विनियोजन, राजश्व, धरौटी करोबार का प्रचलित आर्थिक ऐन नियम नीति निर्देशन अनुसार प्रक्रिया पूरा करने के बाद ही अधिकार प्राप्त अधिकारी समक्ष विल भरपाई कागजात चेक जाँच करके भुक्तानी प्राप्त करने के लिए कागजी प्रमाणपत्र पेश करता है। दूसरे चरण में सम्पन्न किए जाने वाला आन्तरिक लेखा परीक्षण कार्य श्री महालेखा नियन्त्रण कार्यालय के शाखा प्रतिनिधि कार्यालय के रुप में प्रत्येक जिला में स्थापित कोष तथा लेखा नियन्त्रण कार्यालय द्वारा सभी सरकारी कार्यालओं मे किए गए विनियोजन, राजश्व, धरौटी लेखायों का प्रचलित आर्थिक ऐन नियमअनुसार चेक, मासिक/वाषिर्क रुप में सम्पन्न किए जाने की व्यवस्था है। आर्थिक वर्षमें त्रुटियोंको सुधारना बेरुजु को समय में असुल करना, अनियमित खर्चो के नियमित करके अन्तिम लेखा परीक्षण कार्य के करवाने का काम करता है। अन्तिम चरणों का लेखापरीक्षण कार्य नेपाल का संवैधानिक अंग महालेखा परीक्षक के कार्यालय द्वारा सम्पन्न किया जाता है। सैद्धान्तिक और व्यावहारिक रुप में इन तीन चरणों में सम्पन्न किए गए परम्परागत लेखापरीक्षण कार्य से बेरुजु की मात्रा बढÞती जाती है। इससे अनियमितता नियन्त्रण कार्य पर कोई प्रभावकारी नियन्त्रण नहीं हो रहा है।
१. पर्ूव लेखा परीक्षणः
आर्थिक कार्य विधि नियमावली २०६४ के नियम ११३ अनुसार लेखा प्रमुख काम काज कर्तव्य उल्लेख किया गया है। उल्लेखित काम, कर्तव्य मुताबिक किया गया कार्य ही पर्ूव लेखा परीक्षण है। आर्थिक काम काज में हस्तक्षेप, दवाब, भय, त्रास कार्यालय में बैठकर स्वतन्त्र रुप में काम न करने की अवस्था, सुरक्षा की प्रत्याभूति नहीं होने के कारण अनियमितता और भ्रष्टाचार बढÞ रहा है। बजट खर्च करने का अधिकार प्राप्त अधिकारी के हाथों में लेखापाल, लेखा प्रमुख, लेखा समूह के कर्मचारियों का वाषिर्क कार्य सम्पादन, मूल्यांकन, का कार्य देना आर्थिक नियन्त्रण कार्य में अंकुश लगानेे जैसा कार्य बारम्बार होता है। केन्द्रिय स्तर के निकाय -मन्त्रालय, सचिवालय, आयोग, विभाग) एवं कार्यालय संचालन स्तर के निकाय -क्षेत्रिय, जिला स्तरिय कार्यालय एवं आयोजना) में प्राप्त बजट अख्तियारी एवं विनियोजित रकम आर्थिक ऐन, नियम की परिधि भीतर में रहकर बजेट निकासा खर्च करना/ करवाना ही पर्ूव लेखा परीक्षण है। बजेट खर्च, भुक्तानी, कार्य स्थल से ही अनियमितता एवं भ्रष्टाचार रोकने या नियन्त्रण करने की आवश्यकता है। अनियमित खर्च होने से अच्छा नियमिता खर्च करने की व्यवस्था अपनाना और आर्थिक कारोबार में कार्यालय प्रमुखों का लेखा शाखा द्वारा आर्थिक प्रशासनिक राय देना एवं अपनी राय अुनसार निर्ण्र्ाालेने से आर्थिक कारोबार में जिम्मेवारी बहन करना है। कार्यालय प्रमुखों बिना लिखित बेगर किया गया खर्च एवं लिखित राय के ऊपर किया गया निर्ण्र्ाासम्पादित आर्थिक कार्य की सम्पर्ूण्ा जिम्मेवारी कार्यालय प्रमुखों का होता है।
लेखा समूह के कर्मचारी प्रत्येक सरकारी निकायों में व्यवस्था करने का मुख्य उद्देश्य सरकारी निकाय प्रमुख के साथ आर्थिक कार्य का नियन्त्रण नियमित रुप में हो, ऐसी व्यवस्था है। वर्तमान में सरकारी बजट नियन्त्रण कार्य में र्सार्वजनिक प्रतिबद्धता, ऐन, नियम का पालन कानूनी राज्य की अवधारणा है। सुरक्षा प्रत्याभूति नहीं होने के कारण बजेट खर्च नियन्त्रण कार्य में कठिनाई उत्पन्न हो रही है।
कार्यालय प्रमुख एवं लेखा प्रमुखों में राय मतभेद उत्पन्न होने से कार्यालय प्रमुखों का आदेश मानने की अवस्था है। मत भेद होने की स्थिति में सम्पादित आर्थिक कायार्ंर्ेेी जानकारी सम्बन्धित निकायों में भेजने की व्यवस्था है। मतभेद होना लेखा कर्मचारी के लिए अच्छी बात नहीं है। क्योंकि लेखा समूह के कर्मचारियों का वाषिर्क कार्य सम्पादन मूल्यांकन कार्यालय प्रमुख का हाथों में होता है। लेखा समूह के कर्मचारियों का कार्य सम्पादन मूल्यांकन में कम नम्बर देने से पदोन्नति कार्य, वृति विकास कार्य, जैसा महत्वपर्ूण्ा कार्य में प्रतिकूल प्रभाव पडÞता है। अतः कार्यालय प्रमुख की भावना अनुसार आर्थिक कार्य करना/करवाना पडता है। अनियमितता बढने का यह भी एक प्रमुख कारण है।
२. आन्तरिक लेखा परीक्षणर्
वर्तमान जिल्ला लेखा नियन्त्रक कार्यालयों की संचरना और कार्य में सामान्य परिवर्तन, दक्षजनशक्ति, श्रोत ओर साधन बढÞाने से र्सार्वजनिक निकायों का वित्त वा राष्ट्रिय वित्त नियन्त्रण किया जा सकता है। एक विभाग का अर्थ दूसरे विभाग में परिवर्तन करके र्सार्वजनिक निकायों का आर्थिक भार निष्कासन नियन्त्रण के उद्देश्य से पारित बजेट को अन्यान्य विभागों में ले जाने से पर्ूव ही आन्तरिक लेखा परीक्षण कार्य सम्पन्न करने के बाद ही बजेट निष्काशन होना चाहिए। इसके बाद ही चेक द्वारा भुक्तानी करने की व्यावहारिक व्यवस्था को अपनाना जरुरी है। परीक्षण और नियन्त्रण बिना किए ही औपचारिकता पूरा करने के उद्देश्य से आर्थिक वर्षखत्म होने के बाद आर्थिक कारोबार का आन्तरिक लेखा परीक्षण किया जाता है तो उससे नियमित मितव्यायिता कार्य दक्षता या प्रभावकारिता का औचित्य या उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता है। प्रचलित आर्थिक नियम, नीति निर्देशन, निर्ण्र्ाात्र, परिपत्र निर्देशिका का पालन नहीं करवाया जा सकता है। ऐन नियम विपरीत किया गया आर्थिक कामकाज का बेरुजु बढता है। बेरुजु नहीं होने देने का कार्य करने के लिए आर्थिक संचालन, वित्त व्यवस्थापन का कार्य में प्रचलित कानून का पालन, वित्त साधन का मितव्ययपर्ूवक उयपोग, वाषिर्क कार्य लक्ष्य परीक्षण, प्राप्त वित्तीय प्रतिवेदन से समस्त आर्थिक अवस्थाओं का यथार्थ त्रिचण का परीक्षण कार्य पर केन्द्रित रहकर पर्ूव आन्तरिक लेखापरीक्षण होने के बाद ही कोई भी खर्च/भुक्तानी आदेश लागू करने की आवश्यकता है। आर्थिक अनियमितता हो जाने के एक वर्षबाद आन्तरिक लेखा परीक्षण करवाना अनुचित है।
३. अन्तिम लेखा परीक्षण
नेपाल का अन्तरिम संविधान का भाग १२ के दफा १२३ अनुसार कार्य करने के लिए दफा १२ अनुसार का एक स्वतन्त्र संवैधानिक निकाय के रुप में महालेखा परीक्षक की व्यवस्था एवं लेखा परीक्षण ऐन २०४८ बमोजिम महालेखा परीक्षक का कार्यालय द्वारा सभी र्सार्वजनिक निकायों का लेखा श्रेस्ता कागजातों की नियमितता, मितव्ययिता, कार्यदक्षता औचित्य, प्रभाकारिता एवं कार्यमूलक लेखा परीक्षण के दृष्टिकोण से अन्तिम लेखा परीक्षण कार्य सम्पन्न करके लेखा परीक्षण वाषिर्क प्रतिवेदन सम्माननीय राष्ट्रपति समक्ष पेश करता है और वह प्रतिवेदन राष्ट्रपति द्वारा व्यवस्थापिका संसद में पेश करने की व्यवस्था है। इस वाषिर्क प्रतिवेदन में र्सार्वजनिक निकायों का बेरुजु की स्थिति, समाप्त करने का प्रयास बेरुजु समाप्त करने की उपलब्धी एवं लेखा परीक्षण सम्बन्ध में भविष्य में सुधार करने की विषयवस्तु का विवरण उल्लेख किया होता है। व्यवस्थापिका संसद र्सार्वजनिक लेखा समिति में प्रतिवेदन प्राप्त होने पर गम्भीर प्रकृति का बेरुजु, अनियमित कार्य ऊपर छलफल कार्य में सम्बन्धि र्सार्वजनिक निकायों का जिम्मेवार व्यक्ति लेखा उत्तरदायि अधिकारियों से जवाफ प्रतिक्रिया माँग करके बेरुजु असुल करता/करवाता हैर्।र् इस प्रकार व्यवस्थापिका संसद द्वारा बजेट खर्च कार्यालय मार्फ कार्यपालिका सरकार पर नियन्त्रण रखने का प्रावधान है। सरकारी निकायों का स्थिर एवं चालु सम्पत्तियों का अभिलेख, संरक्षण, व्यवस्थापन एवं बजेट खर्च नियन्त्रण कार्य में प्रचलित आर्थिक कानून का कार्यान्वयन का पालन, कार्य में आन्तरिक नियन्त्रण पक्ष कमजोर रहने से विगत आर्थिक वर्षौं तक का कुल बेरुजु ७२ अर्ब में २१ करोड कायम हैं। ±±±

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