नेपाल में हिन्दी उपन्यासों का प्रारंभिक विकासक्रम

सच्चिदानन्द चौवे:नेपालका हिन्दी का प्रथम उपन्यास- “प्रेम कान्ता सन्तति” जो सम्वत् १९८४ में बनारसी प्रसाद खत्री -बनारस) द्वारा प्रकाशित हुवा था । यह “चन्द्र कान्ता सन्तति” जैसा एक तिलस्मी उपन्यास था । सन् १९२र्७र् इ. में काठमाण्डू निवासी आशु कवि – शम्भू प्रसाद उयाध्याय द्वारा यह लिखा गया था । यह आठ भागों में है । प्रेम कान्ता सन्तति के पश्चात् सन् १९५र्१र् इ. तक हिन्दी में किसी उपन्यास रचना का पता नहीं चलता सन् १९५र्१र् इ. में हिन्दी का दूसरा उपन्यास “तूफान से पहले” उदय प्रकाशन मन्दिर काशी से सन् १९५२ में प्रकाशन हुआ । इसका लेखक एक प्रतिभाशाली तरुण विद्यार्थी- प्रसाद भट्ट था – यह एक सामाजिक उपन्यास था । दर्ुभाग्य से हिन्दी साहित्य मन्दिर में, अपनी वह प्रथम पुष्पाञ्जलि चढाकर ही सदा के लिए वह विदा हो गया ।
इस उपन्यास के पश्चात् सन् १९५र्२र् इ. में सिरहा निवासी गोकुल प्रसाद शर्मा ने “चम्पा की खुश्ाबू” उपन्यास लिखा इसके दूसरे ही वर्षही उनका दूसरा उपन्यास “उलझन” प्रकाशित हुआ ये दोनों उपन्यास प्रेम सम्बन्धी हैं, उच्चकोटि के न होते हुए भी नेपाल के हिन्दी उपन्यास साहित्य मन्दिर के प्रारम्भिक सोपान है ।
सन् १९५र्३र् इ . में देहरादून में विवाहिता काठमाण्डू की रावरानी पुष्पा कुमारी का “ममता” उपन्यास प्रकाशित हुआ । यह एक लघु सामाजिक उपन्यास था । कथा वस्तु , कथोपकथन, भाषा, शैली सभी दृष्टियों से सभी उपन्यासों से यह श्रेष्ठ था । इसके दूसरे वर्षही इनका दूसरा उपन्यास “गेट कीपर” प्रकाशित हुआ यह एक सामाजिक- मार्मिक उपन्यास था । ” ममता” और “गेट कीपर” के अतिरिक्त इन्हों ने “संगदिल” और “फिल्म स्टार” की प्रेयसी दो और उपन्यास लिखे ।
लगभग इन्हीं दिनों में , नेपालगन्ज निवासी बब्रुवाहन नेपाल ने “उजाले का अन्धकार” शर्ीष्ाक से एक उपन्यास की रचना की । भाषाएवं शैली दोनों दृष्टियों से यह शुद्ध रहा । सन् १९५० में बुटवल जिलार्न्तगत बहादुरगन्ज कस्बे के “राम वरन शर्मा ने” “आँशु की तीन बूँदें” उपन्यास लिखा, ८८ पृष्टों का यह एक घटना प्रधान रोमान्टिक उपन्यास था ” इसका शर्ीष्ाक आँशु की तीन बूँदें बहुत उपयुक्त था । इनका दूसरा उपन्यास “दशारानी” एवं तीसरा उपन्यास ” लुम्बिनी उद्यान” रहा जो ऐतिहासिकता पर आधारित था । जो साहित्य निकेतन बरेली द्वारा सन् १९५८ में प्रकाशित किया गया ।
सन् १९५६ में महोत्तरी जिलाके धवौली गाँव के निवासी युगेश्वर प्रसाद वर्मा ने ” पत्थर और प्यास” उपन्यास लिखा । सन् १९५७- ५र्८र् इ. में विराटनगर के “खङ्ग नारायण दास” ने क्रमशः “परिमल” और “युगछाया” दो उपन्यास लिखे । सन् १९६र्०र् इ. में नेपालगन्ज निवासी महावीर प्रसाद गुप्त ने “हिम मानव” शर्ीष्ाक से नेपाली जीवन पर आधारित एक जासूसी ढंग का उपन्यास लिखा , जो नेपालगन्ज की “अनुराधा ” पत्रिका में सम्वत् २०१८ में धारावाहिक रूप से प्रकाशित हुआ । नेपाल में सन् १९६र्०र् इ. तक हिन्दी उपन्यासों के विकास का यही इतिहास प्राप्य है । J
सर्ंदर्भ – नेपाल के हिन्दी साहित्यकार शोध ग्रन्थ से ।

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