नेपाल संवत आज देश भर में

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काठमांडू, १५  कार्तिक | अज देशभर नेपाल संवत ११३७ विभिन्न कार्क्रम के साथ मनाया जा रहा है | देश के नेवार समुदाय दवारा यह संवत नयाँ साल के रूप में मनाया जाता है |

राष्ट्रिय विभूति शंखधर साख्वा ने विसं ९३७ (इ सं ८८०) में गरिब जनता का ऋण मोचन करके नेपाल संसंवत की शुरुवात् की थी  ।   पृथ्वीनारायण शाह के शासनकाल तक नेपाल संवत राष्ट्रिय संवत के रूप में चल रही थी | लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति डा त्रिरत्न मानन्धर ने यह जानकारी ऑनलाइन खबर को दी है ।

मानन्धर के अनुसार “लिच्छविकाल के राजा राघवदेव के शासनकाल से सुरु हुआ यह नेपाल संवत् पृथ्वीनारायण शाह के शासनकाल तक मौलिक संवत के रूप में मान्यता पायी थी,  लिच्छविकाल से पहले शक संवत् प्रचलन में था, नेपाल देश का ही  नाम से रखस गया यह संवत मौलिक संवत् ही है  । ”

विसं २००७ साल में प्रजातन्त्र के स्थापना काल से ही  नेपाल संवत को राष्ट्रिय मान्यता के लिए अभियान चलाया जा रहा है  ।

नेपाल संवत नयाँ वर्ष के रूप में काठमाडौँ, ललितपुर, भक्तपुर, बनेपा, धुलिखेल, बाह्रबिसे, दोलखा भीमेश्वर सहित नेवार समुदाय के बाहुल्य क्षेत्र में  बिशेष रुप में मनाने का चलन है  ।

गरिब जनता के ऋण मोचन कराके सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट नमूना प्रस्तुत करके और नेपाल में मौलिक संवत भी चलाने के काम का मूल्याङ्कन करके  विसं २०५६ साल में नेपाल संवत को  नयाँ वर्ष के दिन में तत्कालीन प्रधानमन्त्री कृष्णप्रसाद भट्टराई में साख्वा को राष्ट्रिय विभूति घोषणा किया किया था ।

विसं २०६५ में तत्कालीन प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल ने नेपाल संवत को राष्ट्रिय मान्यता दिलाने की घोषणा किया था  । कार्तिक कृष्ण औँसी के दिन बहीखाता बन्द करके नयाँ वर्ष अर्थात् कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन नयाँ बही खाता का सुरुवात्  करने की परम्परा भी काठमाडौँ में है  ।

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