‘नो वन’ से ‘सम वन तक’ का रास्ताः चेतन भगत

chetanकविता दास, जीवन में कुछ करने का जज्बा होता है पर कर नहीं पाते । उसके लिए किसी का प्रोत्साहन का जरुरत होता है । वह भी ठीक समय में मिल नहीं जाता । लेकिन गत शनिबार जिनको चेतन भगत से मिलने और उनको देखने का मौका मिला हो, शायद उन सभी ने कुछ न कुछ प्रोत्साहन तो जरुर प्राप्त किया ही होगा । हाँ, चेतन भगत एसे ही एक सक्स है, जो लोगों को आगे बढ़ाने को प्रेरित करते हैं । शनिबार नयाँ बानेश्वर स्थित होटल एभरेष्ट के ग्राउंड फ्लोर के ग्रैंडदे हॉल में लोगों का भीड़ देखने लायक था । हो भी क्यों ना, भारतीय साहित्यकार चेतन भगत जो आये थे ।

चेतन भगत द्वारा लिखित कई उपन्यासों का आधार बनाकर बॉलीवुड में बहुत फिल्म निर्माण चुका है । जिन में ‘थ्री इडियट्स’ ‘काई पो चे’ और ‘हेलो’ उल्लेखनीय माने जाते है । चेतन भगत द्वारा लिखित ‘फाइभ पोइन्ट समवान’, ‘वान नाइट एट द कल सेन्टर’, ‘द थ्री मिस्टेक अफ माइ लाइफ’, ‘टु स्टेट्सः द स्टोरी अफ माई मैरेज’, ‘रिभोलुसन २०२०’ और ‘वाट यंग इन्डिया वान्टस’ कृतियां चर्चित हैं ।
उस दिन शनिबार० २ बजे से उन का प्रोग्राम शुरु होने का कार्यतालिका बनी थी । वे पहँचे एक घंटा लेट से। आते ही उन्होंने बोला– ‘नमस्ते काठमाडौं, जिस तरह नेपाल सगरमाथा के लिए चर्चित है, उसी तरह मैं भी आप लोगों को उस उचाई पर पहुँचाने के लिए अभिप्रेरित करने आया हूँ ।’ एक घंटाका उनका प्रेरणात्मक अभिव्यक्ति इसी में आधारित रहा कि हम लोग जीवन में कैसे सफल हों । लक्ष्य कैसे प्राप्ति होगा, सही लक्ष्य कैसे चुने, लक्ष्य के पीछे का कारण क्या होगा, फेथ, बड़े चीज कैसे प्राप्त होगा, सफल और असफल के बीच का फरक क्या होता है, इस तरह के विविध विषय में उनका प्रवचन केन्द्रित था ।
उन्होंने कहा– ‘हम जो काम करते हैं, वह ही हमारा परिचय देता है । असफल से भागने वाले लोग जीवन में कभी भी सफल नहीं हो सकते ।’ चेतन भगतका मनना है कि संसार में असंभव कुछ भी नहीं है और इसके लिए खुद को प्रोत्साहन करना होगा । उन्होंने बताया कि जब हम अपने आपको प्रोत्साहित करके आगे नहीं बढाएंगे, तब तक हमारी लक्ष्य पुरी नहीं हो पाएगी । उनका यह भी मनना है कि लक्ष्य पर पहुँचने के लिए सही दोस्त का भी उतना ही भूमिका रहता है । भगत ने बताया– ‘आदमी को ‘नोवान’ से ‘समवान’ तक पहुचने के लिए आगे बढ़ना ही चाहिए ।’
चेतन भगत नये–नये विषय में लिखना पसन्द करते हैं । जब लिखने बैठते है, वह सोचते हैं कि अपने लेखनी से कैसे समाज को सकारात्मक परिवर्तन किया जाए । इस तरह का अपना अनुभव शेयर करते हुए शनिबार रात ही भगत भारत वापस चले गए । जाते–जाते भगत बोल रहे थे– इस मुलाकात के लिए सभी को धन्यवाद, और फिर मिलने का वादा करता हूँ ।’

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