न्याय के लिए संघर्ष की सच्ची कहानी, सर्वजित (फिल्म समीक्षा)

विजेता चौधरी, ५ जून |
भारत–पाक के आन की लडाई का सर्वजित एक प्रतिनिधि पात्र है । चरित्र प्रधान इस फिल्म का निर्देशन उमंग कुमार ने कीया है । सर्वजित जिसे पाकिस्तानी सरकार ने विना कारण पकडा, चरम यातना दिया पर न्याय नही दिया । पन्जाब के सामान्य किसान पाकिस्तान के जेल में कैसे तिलतिल मरने को पहुँचता है इस कहानी के मार्मिक वायेपिक फिल्म है सर्वजित ।

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सर्वजित में प्रमुख पात्र रणदिप हुडडा तथा ऐश्वर्या राय वच्चन जैसे प्रभावशाली कलाकारों की कुशल अभिनय सहायता से सर्वजित के साथ निर्देशक ने भी न्याय कीया है ।
एक साम सराव से धुत्त सर्वजित नो मैन्स ल्यान्ड पार करता है, जहाँ उसे पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी पकड लेते हैं । साधारण ग्रामीण किसान सर्वजित को लाहौर बम विष्फोट के दोषी मानते हुए उसे अदालत मृत्युदण्ड का फैसला सुनाता है । अपने प्यारे भाई को निर्दोष सावित करने के लिए तथा उसे वापस घर लाने के लिए उस की दिदी दलवीर अर्थात ऐश्वर्या द्वारा किए गए संघर्ष फिल्म के केन्द्रीय विषय है ।
सन् १९९० मे जेल हुई सर्वजित २३ वर्ष बाद अर्थात २०१३ में पाकिस्तानी जेल में ही उनके उपर हमला किया गया था जिसके कुछ दिन बाद ही उनकी मौत हो गई थी ।
सभी के जानकारी में आचुकी उक्त घटना के उपर फिल्म बनाना जितनी बडी चुनौती थी उस के कई गुणा कडी चुनौती थी फिल्म के अवधि भर दर्शक को बाध के रख पाना जिस में निर्देशक उमंग कुमार सफल रहें हैं । संवाद, कहानी बताने की शैली व दृश्य इतने सशक्त है कि किसी भी दृश्य में दर्शक का मन नही उचट सकता । बार बार दर्शकों की आँखे नम होति रहती है ।
सर्वजित का हुलिया, बोल्ने का शैली व हावहाव उसे वास्तविक सर्वजित में रुपान्तरण करदेता है । यद्यपि इस फिल्म में सब से तारिफयोग्य अभिनय रणदिप हुडडा ने ही किया है । ऐश्वर्या का चरित्र भी सशक्त है । लेकिन शुरुवात में सर्वजित के मनोविज्ञान को कम उकेरा गया है जो दर्शक को खटक सकति है । सर्वजित की पत्नी सखप्रित अर्थात ऋचा चडडा का चरित्र भी अपना प्रभाव छोडने में सफल है ।

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सर्वजित व उस की दिदी दलवीर का संघर्ष व राणदप तथा ऐश्वर्या के अभिनय के लिए भी उक्त फिल्म देखने लायक के हैं ।

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