पञ्चायत काल मे बना अस्पताल पैतालिस साल बाद भी संचालन मे नही

 

अंकुश कुमार श्रीवास्तव ,कपिलवस्तु ।

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पञ्चायत काल मे स्थापित कपिलबस्तु जिलेका कृष्णनगर अस्पताल पैतालिस साल बाद भी संचालन मे नही आ पाया ।’
निर्दलीय पञ्चायत व्यावस्था के पहले प्रधानमंत्री स्व꞉ सुर्य बहादुर थापा ने बि.स.२०२७ साल मे कृष्णनगर अस्पताल का शिलान्यास किया था । स्थानीय राजनीति और सरकार पक्ष्ँ की अनदेखी का शिकार गैर नाफा मूलक यह अस्पताल अभी भी संचालन मे आया । कुल १ विग्हा १६ कटठा १९ धुर क्ष्ँेत्रफल मे फैले अस्पताल मे २३ कमरे है बाकी निर्माणाधीन अवस्था मे है । अस्पताल संचालन सम्बन्ध मे कपिलबस्तु के प्रमुख जिला अधिकारी, स्थानिय विकास अधिकारी, उद्योग वाणिज्य संघ पदाधिकारी एंव अस्पताल विकास समिति सदस्यों के बीच कई बैठकें हुई पर अस्पताल की स्थिति मे कोई सुधार नही हुआ ।

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वि.स.२०७० जेष्ठ २४ गते कृष्णनगर अस्पताल विकास समिति एवं संस्थापक की संयुक्त बैठक ने यह निर्णय लिया कि आर्थिक आभाव के कारण अस्पताल संचालन सम्भव नही है, इसलिए अस्पताल संचालन हेतु प्रस्ताव का अवहान किया जाए । पर किसी व्यक्ति व संस्था ने अस्पताल संचालन मे कोई प्रतिव्रिmया नही दिया । कुछ दिन बाद ही नेपाल गंज मेडिकल कालेज के निर्देशक रहे डा. सुरेश कुमार कानोडिया के द्वारा अस्पताल संचालन करने की इच्छा जाहिर करने पर समिति ने १५ दिन के अन्दर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए चिरन्जीलाल अग्रवाल की अध्यक्षता मे चार सदस्यीय प्राविधिक समिति का गठन किया । प्राविधिक समिति द्धारा प्रस्तावित सभी शर्ते डा. कानोडिया को मंजुर थी अपने परिवार सदस्य के नाम पर अस्पताल का नामाकरण करना भी लगभग तय हो चुका था जिसके लिए उन्हे ५१,००,००० नगद अस्पताल निर्माण मे सहयोग करना था । पर अस्पताल विकास समिति ने अस्पताल कम्पाउड के अन्दर निर्माण होनेवाले सटर से आनेवाले किराये न देने की वात कही ,इस शर्त से डा. कानोडिया सहमत नही हुए और अन्त अस्पताल जहांका वही रह गया ।
इस सन्दर्भ मे कपिलवस्तु क्षेत्र न.५ के सांसद मा. अभिषेक प्रताप शाह का कहना है कि नेपाल की खसबादी सरकारे मधेश के प्रति दोहरे चरित्र दिखाती रही है यही कारण है कि मधेशकी अधिकांश अस्पताले संकट के दौर से गुजर रही है जिसमे बहादुरगंजका शिवराज अस्पताल भी एक है । कृष्णनगर अस्पतालको संचालन करने के लिए भारतीय दुतावास मे भी पहल किया गया था पर बिकास कार्य के लिए स्थानीयवासीं का सहयोग एवं क्ष्ँेत्रीय प्रतिनिधियोंका सरकार मे होना आवश्यक हो जाता है ।
वहीं राष्ट्रिय मानव अधिकार प्रतिष्ठान के जिला सल्लाहकार लक्ष्मण भुसाल ने नये समितिकी तिखी आलोचना करते हुये कहा विजय कानोडिया के अध्यक्षता वाली वर्तमान कार्य करिणी समिति को निसव्रिmय कर युवाओं की नयी समिति गठन किया जायेगा तो अस्पताल संचालन होकर रहेगा । उन्होने ये भी कहा कि एक ही व्यक्ति दो–दो सार्वजनिक संस्थाओं के अध्यक्षता पर बैठने से ही अस्पताल संचालन मे समस्या हुई है ।
समाजसेवी महमूद खां कहते है कि सामाजिक सेवा के भावना से स्थापना किया गया यह अस्पताल निर्माण होने से कृष्णनगर आसपास के लगभग दो दर्जन गांव लाभवान्वित होंगे साथ ही महंगी और तंगी से परेशान इस क्ष्ँेत्र की जनताको सस्ती मेडिकल सेवा मिलने से आर्थिक आवस्थाओं मे भी सुधार होगा । भारत के बढनी, गोरखपुर, लखनऊ मे मरीजो इलाज कराने पर लाखों खर्च हो जाते है अगर यह अस्पताल संचालन मे आता है तो कई जिन्दगीयां बचायी जा सकती है । जिस तरह बहादुरगंज का आंख आस्पताल नेपाल और भारतीय मरीजोंको सेवा दे रही यह अस्पताल भी संचालन मे आने पर आन्तरिक आय बढेगा ।

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