पटना ब्लास्ट का ‘सच’

hunkar raillyपटना में नरेंद्र मोदी की ‘हुंकार रैली’ के दिन रविवार को हुए आठ धमाकों के पीछे इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के आतंकी तहसीन अख्‍तर और वकास का नाम सामने आ रहा है। बिहार के समस्‍तीपुर का रहने वाला 23 साल का तहसीन आईएम के शीर्ष आतंकियों में एक बताया जाता है। यह भी बताया जाता है कि उसका संबंध बिहार के एक राजनीतिक परिवार से है। तकी अख्‍तर और तहसीन में चाचा-भतीजे का रिश्‍ता है। हालांकि, वह तहसीन से रिश्‍तों को हमेशा नकारते रहे हैं।

 

 तकी समस्‍तीपुर में जेडीयू के सक्रिय नेता हैं और पार्टी के जिला अल्‍पसंख्‍यक प्रकोष्‍ठ के अध्‍यक्ष भी रह चुके हैं।  जबकि जेडीयू के अल्‍पसंख्‍यक प्रकोष्‍ठ के प्रदेश अध्‍यक्ष मोहम्‍मद कलाम से बात की तो उन्‍होंने कहा कि तकी अख्‍तर नाम का कोई भी नेता हमारी पार्टी में नहीं है। वही तकी अख्‍तर ने तहसीन के संबंध में सवाल पूछे जाने पर छूटते ही कहा कि मेरे पास फालतू बातों के लिए वक्‍त नहीं है और फोन काट दिया। इसके बाद कई बार फोन किए जाने के बाद भी उन्‍होंने कॉल रिसीव नहीं की।

 

 तकी अख्तर और तहसीन के रिश्‍ते के बारे में मीडिया ने समस्तीपुर के एसपी चंद्रिका प्रसाद से भी बात की। इस बारे में एसपी प्रसाद ने कहा- तकी और तहसीन को लेकर फिलहाल कोई जांच नहीं चल रही है। एनआईए टीम कर रही या नहीं, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। यह पूछने पर कि क्या ये दोनो रिश्तेदार हैं? एसपी ने कहा कि इसकी भी मुझे जानकारी नहीं है। तहसीन बिहार और झारखंड में आतंकी गतिविधियों की कमान संभालता है। बेहद सामान्‍य से दिखने वाले तहसीन पर 10 लाख रुपए का इनाम है। वह 2006 के वाराणसी ब्‍लास्‍ट, 2011 के मुंबई सीरियल ब्‍लास्‍ट और 2013 में हैदराबाद के दिलसुखनगर बम ब्‍लास्‍ट में भी वांटेड है। बिहार पुलिस सूत्रों का कहना है कि मोदी की रैली से पहले गांधी मैदान और पटना के अन्‍य स्‍थानों पर बम प्‍लांट करने के पीछे तहसीन ही था। नेशनल इंवेस्टिगेटिव एजेंसी (एनआईए) के मुताबिक, तहसीन बहुरूपिया है। उसे ज्‍यादातर पर्यटन स्‍थलों पर देखा गया है। वह गाइड बनकर रेकी करने में भी माहिर है। तहसीन इंटरनेट कैफे में काफी समय बिताता है और जाली कागजात देकर नए सिम कार्ड खरीदने में भी माहिर है।

 

पटना में नरेंद्र मोदी की ‘हुंकार रैली’ से पहले सीरियल ब्लास्ट को बीजेपी बड़ा मुद्दा बनाने जा रही है। नीतीश सरकार को घेरने की रणनीति के तहत बीजेपी मंगलवार को देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ब्लास्ट का ‘सच’ लोगों को बताएगी। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक बीजेपी मंगलवार को देश के अलग-अलग शहरों में करीब दो दर्जन प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी। इसमें लोगों को इस सीरियल ब्लास्ट के अलग-अलग पहलुओं के बारे में बताया जाएगा।

 

 दरअसल बीजेपी ने रैली में हुए बम विस्फोटों को सीधे अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से जोड़ दिया है। बीजेपी ने इसे मोदी को मारने की साजिश बताकर ‘इमोशनल टच’ दे दिया है। सोमवार को दिल्ली और बिहार से बीजेपी के नेता एक सुर में इसे मोदी पर ‘अटैक’ बताकर नीतीश और केंद्र सरकार पर अटैक करते नजर आए।

 

 बीजेपी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस दावे को गलत बताया कि राज्य सरकार को ऐसे किसी आतंकी हमले की कोई खुफिया चेतावनी नहीं मिली थी। उसने इस बात की जांच कराने की मांग की कि इस साजिश के पीछे किसका हाथ है। बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस हमले का निशाना नरेंद्र मोदी थे। उन्होंने कहा कि मोदी की हत्या के इरादे से ही यह हमला किया गया था।

 

पटना धमाकों के लिए आईएम पिछले कई महीनों से तैयारी कर रहा था। धमाकों की साजिश रचने वालों में तहसीन के अलावा वकास उर्फ अहमद का भी नाम सामने आ रहा है। वकास को यासीन भटकल का दाहिना हाथ बताया जाता है। अगस्‍त में भटकल की गिरफ्तारी से पहले ही पाकिस्‍तानी नागरिक वकास ने बिहार में डेरा डाल दिया था। सूत्रों का कहना है कि वकास दरभंगा में ही टिका हुआ था।

 

 एनआईए को शक है कि वकास और उसके साथी विस्फोट के बाद पटना में ही कहीं छिपे हैं। वकास के बारे में बताया जाता है कि वह बम बनाने में माहिर है। वह इंडियन मुजाहिदीन के लड़ाकों को बम बनाना भी सिखाता है। वकास का नाम हैदराबाद ब्‍लास्‍ट में भी सामने आया था। वकास पर एनआईए ने 10 लाख रुपए का इनाम रखा है। वह 2011 के मुंबई धमाकों और 2013 में हुए हैदराबाद ब्‍लास्‍ट में भी शामिल था।

 

धर्मनिरपेक्ष छवि की खातिर भाजपा से नाता तोड़ने वाले बिहार के सीएम नीतीश कुमार आतंकी गतिविधियां रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। विपक्षी उन पर आरोप लगा रहे हैं कि अल्‍पसंख्‍यकों का मसीहा बनने के चक्‍कर में बिहार सरकार आतंकी नेटवर्क को ध्‍वस्‍त नहीं कर पा रही है। मोदी की रैली के दिन हुए धमाकों के बाद तो यह सवाल और भी गंभीर हो गया है। इस संबंध में बिहार और झारखंड से संदिग्‍ध आतंकी पकड़े गए हैं।

 

अब विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि मुस्लिम वोट बैंक की वजह से नीतीश कुमार इंडियन मुजाहिदीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से बचते आए हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में देशभर में हुए धमाकों के तार बिहार से जुड़े हैं।

 

 आईएम का सरगना यासीन भटकल भी इस साल अगस्‍त में बिहार-नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया था। बिहार के पूर्व डिप्‍टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भटकल की गिरफ्तारी के वक्‍त आरोप लगाया था कि नीतीश कुमार इस प्रकार से बर्ताव कर रहे थे, जैसे भटकल की गिरफ्तारी किसी दूसरे राज्‍य से हुई है। बिहार का दरभंगा टेरर मॉड्यूल वर्षों से मौजूद है, लेकिन स्‍थानीय पुलिस ने इसके खिलाफ आज तक कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया।

 

बिहार के दरभंगा मॉड्यूल से जुड़े आईएम के प्रमुख आतंकी अब भी कानून की पकड़ से दूर हैं। इनमें आईएम का ऑपरेशनल कमांडर रियाज शाहबंदरी, उसका भाई इकबाल और आईएम के विभिन्‍न मॉड्यूल के बीच की कड़ी जोड़ने का काम करने वाला अब्‍दुल सुभान कुरैशी के शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो आईएम को पैसा मुहैया कराने वाला भी बिहार का आमिर रजा खान है। ये सभी अपनी गतिविधियां चला रहे हैं और बेहद खतरनाक भी हैं। जानकार मानते हैं कि इनमें से कोई भी, कभी भी यासीन भटकल बन सकता है। बिहार के डीजीपी अभयानंद ने बताया कि सभी विस्फोट में आईईडी का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस ने अभी तक चार संदिग्‍धों को गिरफ्तार किया है, इनमें एक रांची के धुर्वा का इम्तियाज भी है। इम्तियाज रांची के धुर्वा स्थित सीठियो के हेथाकोचा का रहने वाला है। झारखंड के एडीजी ने स्‍वीकार किया है कि पटना धमाकों के पीछे रांची मॉड्यूल का हाथ है। इम्तियाज इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी मंजर इमाम और दानिश का सहयोगी है। इनके खिलाफ कई शहरों में हुए बम विस्फोट में शामिल होने का आरोप है। बिहार पुलिस ने जिन आतंकियों को गिरफ्तार किया है, उनमें से दो को पटना रेलवे स्‍टेशन से गिरफ्तार किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी की रैली के दिन जो बम प्‍लांट किए गए थे, उनमें हर बम के अंदर कम से कम आधा किलो विस्‍फोटक था। विस्‍फोट के लिए टाइमर का भी इस्‍तेमाल किया गया था।

 

ससे पहले राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कहा, ‘बिहार के मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्हें इस आतंकी हमले के संबंध में कोई खुफिया चेतावनी नहीं मिली थी। लेकिन यह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं लगता।’ उन्होंने कहा कि आईबी ने 1 अक्टूबर को बिहार के पुलिस महानिदेशक सहित विभिन्न राज्यों को लिखे पत्र में आम चेतावनी जारी की थी कि इंडियन मुजाहिदीन कुछ शहरों पर हमले की योजना बना रहा है। उनके अनुसार, ’23 अक्टूबर को आईबी ने बिहार पुलिस को खासतौर पर चेतावनी दी कि मोदी की पटना रैली को इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी निशाना बना सकते हैं।’

 

 बीजेपी ने ब्लास्ट के कुछ घंटे बाद ही बॉलिवुड की एक फिल्म के ‘म्यूजिक लॉन्च’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को भी निशाने पर लिया। बीजेपी ने कहा कि बेहतर शासन पर ध्यान नहीं देने की केंद्रीय मंत्रियों की आदत बन चुकी है। बीजेपी प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि जब मुंबई में 2008 के आतंकी हमले हुए तो तत्कालीन गृह मंत्री मीडिया से बात करने से पहले बार-बार बदले हुए कपड़ों में नजर आए। सिंह ने कहा कि अब जब पटना में हुंकार रैली स्थल पर विस्फोट हुए तो शिंदे म्यूजिक लॉन्च में चले गए।[email protected]

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