पत्रवाटिका

सम्पादक जी,
हिमालिनी के अगस्त १० अंक के लिए हार्दिक धन्यवाद । यह अंक और इसका आवरण भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर विशेष रुप से आधारित है । इतना ही नहीं, पत्रिका के प्रायः सभी अंकों से भारतीय सरोकार की अनुराग सुनाई देती है । यह भारत-नेपाल के ऐतिहासिक प्रगाढÞ सम्बन्ध का साक्षी है । इस अंक में भी नेपाल की राजनीति विषयक सामयिक विश्लेषण प्रस्तुत है, परन्तु सामाजिक, आर्थिक, विषय भी मुखर हैं । १८५७ की क्रान्ति और नेपाल आलेख इस अंक का केन्द्रबिन्दु कहा जा सकता है । ‘नेपाल में भारत-चीन प्रतिद्वन्द्विता’ आज नेपाल के समक्ष ज्वलन्त प्रश्न समुपस्थित है । माओवादी विचारधारा नेपाल के हिन्दू संस्कारों के नितान्त विपरीत है । भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भारत और नेपाल समान ही नहीं एक है । व्यवहारिक रुप में भी अभी तक दोनों देशों की सीमाएँ निर्बाध हैं, खुली है । पत्रिका की एक अन्य विशेषता की ओर संकेत करना उचित है और आवश्यक भी । देखते ही देखते हिन्दी भाषा दिनों-दिन परिस्कृत होकर ‘हिमालिनी’ में प्रयुक्त हो रही है । साधुवाद ।
-ए.एल श्रीवास्तम
भिलाई, भारत

सम्पादक जी
हिमालिनी की प्रति नियमित रुप से मिल रही है । अन्तर्रर्ाा्रीय मैथिली सम्मेलन काठमांडू -नेपाल) में आपसे मुलाकत हर्ुइ थी । आप से मिलकर दिल खुश हो गया । प्रत्येक माह की पहली तारीख को हिमालिनी की प्रतिक्षा रहेगी ।
– सुधांशु कुमार चक्रवर्ती
स्टेशन रोड हाजीपुर, -वैशाली) बिहार
सम्पादक जी
मैं विजय कुमार यादव हिमालिनी का नियमित पाठक हूँ । वर्ष१४, अंक ०२ -माघ-फागुन) में प्रकाशित हिमालिनी पढÞा । कवर पेज देखते सबसे पहले मुझे बहुत हँसी लगी । सत्ता के थ्री इडियट्स में प्रचण्ड और खनाल तो ठीक ही थे लेकिन इसमें सुशिल कोइराला को नहीं रखते तब । क्योंकि कोइराला पद लोभित नहीं है । इसी तरह नेपाल के बारे में बढिÞया-बढिÞया राजनीतिक लेख और कवर डिजाइन निकालते रहें । इसके लिए मैर्ंर् इश्वर से पर््रार्थना करता हूँ ।
-विजय कुमार यादव
दरबार हाई स्कूल
-मधेशी शिक्षक फोरम का सदस्य)

सम्पादक जी
सबसे पहले हिमालिनी के नए अंक के लिए आप लोगों को धन्यवाद । मैं हिमालिनी को नियमित रुप से पढता हूँ । कवर पेज थ्री इडियट्स पसन्द आया । आने वाले दिनों में और अच्छा हो । शुभकामना ।
-प्रेमलाल पाण्डेय
कलैया, बारा

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