पदीय गरिमा का सम्मान किया जाए

यह उस पद का ही नहीं राष्ट्र का भी अपमान है ।

लिलानाथ गौतम
नेपाल के पहले राष्ट्रपति हैं, डा. रामवरण यादव । राष्ट्रपति जैसे गरिमामय पद में पहुँच चुके व्यक्तित्व को अभी हमारी राज्य व्यवस्था विवादित बना रही है । सुनने में सामान्य और बहस के लिए बिल्कुल अनुपयुक्त यह विषय है, ललितपुर बागडोल स्थित पूर्वराष्ट्रपति का वर्तमान निवासस्थान । rambaran yadav_hindi magazineसरकारी निर्णय के अनुसार ही डा. यादव करीब पाँच महीने पहले वहाँ पहुँचे थे । डा. यादव जहाँ रहते हैं, उस घर का किराया अभी तक घर मालिक को नहीं मिल रहा है । लगता है, यह कोई बहस का विषय नहीं बन सकता । लेकिन प्रसंग पूर्वराष्ट्रपति के साथ जुड़ा हुआ है, जिसके कारण इस प्रसंग को लेकर बार–बार विभिन्न मीडिया में समाचार सार्वजनिक हो रहा है । तब भी सरकार समस्या का कोई समाधान नहीं कर रही है । जिसके चलते कहीं पूर्वराष्ट्रपति का अपमान तो नहीं हो रहा है ? यह प्रश्न स्वाभाविक उठता है ।
जब कात्र्तिक ११ गते विद्यादेवी भण्डारी नए राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुईं तो, उसी दिन नेपाल सरकार ने तत्कालीन राष्ट्रपति डा. यादव को बागडोल स्थित रविभक्त विष्ट के घर में रहने के लिए व्यवस्था की । उस समय घरधनी विष्ट के साथ मासिक १ लाख ३० हजार किराया वापत देने की बात हुई थी । लेकिन सहमति के अनुसार अब तक विष्ट ने किराया नहीं पाया है और उन्होंने अपनी मकान खाली कर देने के लिए अनुरोध करते हुए विभिन्न सरकारी निकायों में पत्राचार भी किया है । लेकिन न तो किराया मिला है न ही घर ही खाली हुआ है । ऐसी अवस्था में विभिन्न सञ्चार माध्यमों में यह समाचार सार्वजनिक हो रहा है । स्वाभाविक है, जिसके चलते पूर्वराष्ट्रपति को अपमानित महसुस करना पड़ता है । यह तो सरकार की लाचारी है । पूर्वराष्ट्रपति के साथ ऐसा व्यवहार होना और घर किराया सम्बन्धी विवाद को बहस का विषय बनाना शरम की बात है ।
हाँ, अगर पूर्वविशिष्ठ व्यक्तित्व के लिए आवास लगायत सुविधा नहीं दी जा सकती तो इस तरह का निर्णय और सरकारी घोषणा नहीं होनी चाहिए थी । अगर हो चुकी है तो घर किराया सम्बन्धी विषयों को लेकर इस तरह का प्रचारबाजी नहीं होनी चाहिए थी । यहाँ तो बार बार समाचार सार्वजनिक होने के बाद भी इसके ऊपर ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है । ऐसी अवस्था में वर्तमान सरकार की नीयत क्या है ? यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठ जाता है । पूर्वविशिष्ट अधिकारी के नाते सरकारी सेवा÷सुविधा लेने वाले सिर्फ पूर्वराष्ट्रपति ही नहीं है, अन्य बहुत ऐसे पदाधिकारी हैं । लेकिन पूर्वराष्ट्रपति के ही सवाल में यह क्या हो रहा है, समझ में नहीं आता । अभी तो देश में एक ही पूर्वराष्ट्रपति हैं । कल ऐसे व्यक्तित्व बहुत ही हो सकते हैं । क्या सभी पूर्वराष्ट्रपतियों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जाएगा ?
प्रायः सभी देशों में पूर्वविशिष्ठ व्यक्तित्व को सरकारी सेवा÷सुविधा देने का प्रचलन है । लेकिन आम नेपाली जनता की जो आर्थिक अवस्था है, उसको मध्येनजर करेंगे तो कोई भी पूर्व विशिष्टि अधिकारी को आजीवन सरकारी सेवा÷सुविधा देने कि सम्बन्ध में बहस किया जा सकता है । कुछ व्यक्ति इस में बहस भी कर रहे हैं । वह लोग कह रहे हैं कि जब तक आम नेपालियों की आर्थिक अवस्था में सुधार नहीं आएगा, तब तक पूर्व विशिष्ठ अधिकारियों को इस तरह की सुविधाएँ नहीं देनी चाहिए । ऐसी अवस्था में पूर्वराष्ट्रपति डा. रामवरण यादव को आवास सुविधा मिलना ही चाहिए, यह जरूरी नहीं है । यहाँ तो सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में निर्णय भी हो चुका है । लेकिन कार्यान्वयन में विवाद और बहस का वातावरण सिर्जना किया जा रहा है । यह विल्कुल उपयुक्त नहीं है ।
व्यक्तिगत रूप में डा. रामवरण यादव की आर्थिक हैसियत निवासविहीन होने वाली नहीं है । वह अपने ही निवास में कोई भी सरकारी सेवा÷सुविधा बिना भी अपना जीवन निर्वाह करने की हैसियत रखते हैं । लेकिन राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान देनेवाले व्यक्तित्व को यदि सरकार कुछ सेवा÷सुविधा देती है तो उसको इनकार भी नहीं किया जा सकता । लेकिन घर किराया सम्बन्धी विवाद को सामने लाकर अपमानित नहीं करना चाहिए । क्या अब डा. यादव को ही ‘इस तरह का विवादित होकर मैं रहनेवाला नहीं हूँ, अपने ही निवास चला जाता हूँ’ कहकर अपनी नैतिकता प्रदर्शन करनी चाहिए ? नहीं तो पूर्वराष्ट्रपति जैसे व्यक्तित्व को घर किराया सम्बन्धी विवाद में लाकर उक्त पद की गरिमा को अपमानित नहीं किया जाए । यह उस पद का ही नहीं राष्ट्र का भी अपमान है ।

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