परम्परा का पालन

हजारो की भीड के सामने जुजुभाई वाँस श्रेष्ठ की जीभ में र्सर्ुइ चुभाई जाती है १३ इंच की लम्बी र्सर्ूइ । देखने वाले दाँतो तले अंगुली दबा लेते हैं । इसी अवस्था में जुजुभाई भक्तपुर का नगर परिक्रमा करते हैं । करीब चालीस मिनट की यात्रा के बाद महालक्ष्मी मंदिर में आकर परिक्रमा समाप्त होती हैऔर उनकी जिह्वा से र्सरूइ निकाली जाती है । भक्तपुर के मध्यपुरठिमी बोडे मेहर वर्षनए साल विक्रम संवत बैशाख दो गते इस तरह से जीभ में र्सरूइ चुभोकर छेदी जाती है । जुजुभाई यह परम्परा तीन वषोर्ं से करतेआ रहेहै।
जुजुभाई की जीभ छे दने  वाले  कृष्णचन्द्रबाग श्रे ष्ठ खुद भी पिछले  १२ वषोर्ं तक इस पर म्परा का निर्वाह कर ते  हुए अपना जीभ छे दा था । जुजुभाई पे शे  से  कलाकार  हैं । छात्रों को  चित्रकला सिखाते  है ं । उनके  इस काम से  स् थानीय लो ग काफी उत्साहित हो ते  हैं । स् वाभाविक है  जुजुभाई के  इस कार नामे  से  उनका शहर  र ाष्ट्रीय औ र  अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सर्ूर्खियों में आता है  जुजुभाई को  मध्यपुर  ठिमी का गौ र व कहा जाता है ।
जीभ छे दने  की परम्परा पर  एक किंवदन्ती है । परापर्ूव काल से  नीलबाराही में र हने  वाले  भूतप्रे त पिशाच द्वारा बो डे वासी को  अत्यन्त कष्ट दिया जाता था । इससे  मुक्ति पाने  के  लिए तांत्रिक विधि का सहार ा लिया गया । जिसमें एक प्रे तात्मा को  पकडÞ लिया गया । उसकी जीभ मे ं र्सर्ूइ से  छे द कर ने  के  बाद वहाँ के  लोगों को  महसूस हुआ कि अब उन्हे ं कोर् इ भूत-प्रे त नहीं सताता है । इसी के  बाद अब स् था नीय लोगों द्वारा जीभ छे दने  की परम्परा चली आ र ही है  ।
जीभ छे दकर  अपने  शहर  को  गौ र वान्वित कर ने  वाले  जुजुभाई पिछले  साल ही वै वाहिक बंधन में बँधे  है ं । यह कहानी भी काप mी र ो चक है  । मध्यपुर  ठिमी के  क्रियटिव लर्नर्श एके डे मी की शि क्षिका पर्ूण्ा के शरी श्रे ष्ठ से  उनका प्रे म विवाह हुआ है  । उसी विद्यालय मे ं जुजुभाई कला के  शिक्षक है ं । पहली नजर  मे ं ही पर्ूण्ा के शर ी को  वो  पसंद कर ने  लगे  । जुजुभाई कहते  है ं जीभ मे ं र्सर्ूइ चुभाकर  छ्रि्र कर ना भी उतना कठिन नहीं है , जितना प्रे म प्रस् ताव दे ना । उन्हे ं डर  था कि कहीं इस प्रस् ताव के  बाद उनकी दो स् ती भी खत्म ना हो  जाए । अखिर कार  हिम्मत जुटाकर  जुजुभाई ने  प्रे म प्रस् ताव र खा । पर्ूण्ा ने  कभी सो चा भी नहीं था कि पिछले  साल जिस व्यक्ति को  टीवी पर  जीभ छे दते  समय दे खा था वही उसका जीवन साथी बने गा । प्रे म प्रस् ताव मिलने  पर  उसने  परि वार  मे ं र ाय मशविर ा किया । दो नो ं परि वार  र ाजी हुए औ र  जुजुभाई वै वाहिक बंधन मे ं बँधे  ।
तीन वर्षपर्ूव पहली बार  जीभ छे दने  की बात आज भी उन्हे ं याद है  । तीन दिनो ं तक वो  निर ाहार  थे  । ले किन औ र  समय की तर ह भूख ने  उन्हे ं कमजो र  नहीं बनाया । २९ वषर्ीय जुजुभाई ने  अपने  संकल्प औ र  पर म्पर ा को  जीवित र खने  के  लिए भूख औ र  कमजो र ी को  हावी नहीं हो ने  दिया । तीसर े  दिन हजार ो ं लो गो ं की भीडÞ, टीवी चै नल के  कै मर ा औ र  पर्यटको ं के  बीच जुजुभाई ने  एक फूट लम्बे  र्सर्ूइ को  अपनी जीभ मे ं घुसाया तो  लो गो ं की तालियो ं की गडÞगडÞाहट से  माहौ ल गूँज उठा । कै मर े  की फ्लै श उनपर  लगातार  कुछ मिनटो ं तक चमकती र ही । जीभ छे दने  से  पहले  अपने  कुलदे वता का पूजा किया । जीभ छे दने  की पर म्पर ा निभाने  वाले  जुजुभाई अब तक के  सबसे  कम उम्र के  युवा तथा सबसे  शिक्षित भी है ं ।
चार  वर्षतक निर न्तर  जीभ छे दवाने  वाले  बुद्ध कृष्ण बाग श्रे ष्ठ की माँ का दे हांत हो ने  के  बाद जुजुभाई ने  इस पर म्पर ा को  अपनाया था । यह उनके  परि वार  द्वार ा अब तक जीवित र खी आ र ही पर म्पर ा है  । उनके  दादा हर्कनर सिंह बाग श्रे ष्ठ ने  तो  लगातार  २२ वषोर् ं तक इस पर म्पर ा का निर्वाह किया था । जीभ छे दने  के  लिए तय समय से  दो  हफ्ते  पहले  ही उस खास र्सर्ूइ को  बनाया जाता है  । एक फूट के  लम्बे  र्सर्ूइ को  पहले  सप्ताह तक ग्रिस मे ं डूबो  कर  र खा जाता है  औ र  उसके  बाद एक हफ्ता तक शुद्ध तो र ी के  ते ल मे ं डुबो या जाता है  । यह र्सर्ूइ स् थानीय धर्मलाल नकर्मी द्वार ा पिछले  कई वषोर् ं से  बनाया जाता र हा है  ।
इस वर्षजुजुभाई का जीभ छे दने  वाले  कृष चन्द्र श्रे ष्ठ खुद भी १२ वषोर् ं तक अपनी जीभ छे दते  र हे  है ं । उन लो गो ं की मान्यता है  कि इस पर म्पर ा को  निर्वाह कर ने  से  महामार ी र ो ग नहीं फै लता है , साथ ही दे श को  अनिष्ट से  बचाता है  । दे श मे ं अनावृष्टि, अतिवृष्टि से  भी र क्षा कर ता है  ।

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