पलटा पाकिस्तान: सरबजीत नहीं सुरजीत सिंह की होगी रिहाई

Surjeet Singh (left) who has been languishing in a Pakistani jail for 30 years. At right is Sarabjit Singh... hopes dashed. The Presidency clarified late on Tuesday night that it was not Sarabjit but the much older Surjeet Singh whom Pakistan had decided to release.

इस्लामाबाद।। सरबजीत के मुद्दे पर पाकिस्तान ने यू-टर्न लिया है। पाकिस्तानी जेल में बंद सरबजीत सिंह की न तो रिहाई होनी है और न ही उनकी सजा कम की गई है। जिस शख्स की रिहाई होनी है, उनका नाम सुरजीत सिंह है। लेकिन, सरबजी‍त सिंह की रिहाई को लेकर प्रेजिडेंट आसिफ अली जरदारी क्‍यों पलट गए, यह सवाल अहम बना हुआ है।
सूत्रों ने माने तो, इसके पीछे कट्टरपंथियों, आईएसआई और पाकिस्तानी फौज का हाथ है। सरबजीत की रिहाई आईएसआई और पाकिस्तानी फौज को बर्दास्त नहीं हुआ और उन्होंने प्रेजिडेंट पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

सियासी मोर्चे पर चारों तरफ से घिरे जरदारी फौज और आईएसआई के दबाव में झुक गए। इस्लामाबाद में पीटीआई के पत्रकार रियाज उल लश्‍कर का भी कहना है कि प्रेजिडेंट जरदारी को दबाव किसी भी दबाव के सामने नहीं झुकना चाहिए था। हालांकि, पाकिस्तानी प्रेजिडेंट जरदारी के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने इस गलतफहमी का कारण दोनों का नाम एक जैसा होना बताया है।

पाकिस्तान सरकार के इस फैसले पर सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने अफसोस जताया है। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि एक ना एक दिन सरबजीत रिहा जरूर होंगे। वह अपने भाई से भारत में जरूर मिलेंगी।

गौरतलब है कि सुरजीत सिंह को 1982 में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर मुकदमा चला और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। 1989 में सुरजीत सिंह को उस वक्त की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की सलाह पर प्रेजिडेंट गुलाम इशाक खान ने माफी दी थी।

पाकिस्तानी राष्ट्रपति के प्रवक्ता बाबर ने साफ किया कि सुरजीत सिंह ने उम्रकैद की सजा पूरी कर ली है और उन्हें रिहा किया जाएगा। इससे पहले आई खबरों में कहा गया था कि राष्ट्रपति जरदारी ने आदेश दिया है कि अगर सरबजीत ने अपनी सजा पूरी कर ली है, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। ऐसा माना जा रहा था कि डॉक्टर खलील चिश्ती की रिहाई के बदले सरबजीत की रिहाई मुमकिन हो पाई।

सरबजीत की ओर से राष्ट्रपति आसिफ अली जरादरी के सामने दया की अपील की गई थी। इससे पहले चार बार पाकिस्तान के राष्ट्रपति से उनकी रिहाई के लिए दया याचिका दायर की जा चुकी थी। सरबजीत के वकील के मुताबिक राष्ट्रपति जरदारी को दया याचिका के साथ वह चिट्ठी भी दी गई थी जिसके साथ एक लाख के करीब भारतीय नागरिकों ने हस्ताक्षर भी थे। उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ जरदारी से डॉक्टर खलील चिश्ती के बदले सरबजीत की रिहाई के लिए गुहार लगाई थी।

गौरतलब है कि सरबजीत को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में साल 1990 में हुए एक बम धमाके के सिलसिले में दोषी ठहराने के बाद फांसी की सजा सुनाई गई थी। उस धमाके में कुल 14 लोग मारे गए थे। सरबजीत को लाहौर की कोट लखपत जेल में रखा गया है।

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