पाकिस्तान का असली चेहरा

हिमालिनी डेस्क

आखिर पाकिस्तान की असलियत सामने आ ही गई। भारत को डंसवाने के लिए वह जिन सांपों को अपने आंगन में पालकर रखता था, अब उन में से एक सांप अबू जिंदाल भारत के कब्जे में हैं। अब यह सांप अपने आका के लिए जहर उगल रहा है। उसने पुलिस पूछताछ में मुर्ंबई हमले में पाकिस्तान की भूमिका की पुष्टि की है।
गृहमंत्री पी चिदंबरम ने बताया है कि इस वक्त दिल्ली पुलिस के कब्जे में अबू जिंदाल ने मुर्ंबई हमले में पाकिस्तान की भूमिका की पुष्टि की है। उसने बताया है कि जिस वक्त लश्कर के आतंकवादी मुर्ंबई में खूनखराबा मचा रहे थे, उस वक्त वह करांची में कंट्रोल रूम में बैठकर आतंकियों को निर्देश दे रहा था। उसने यह भी बताया है कि २००२ में हुए गोधरा कांड के बाद लश्कर के आकाओं ने उसका ब्रेन वाश किया था। उधर पाकिस्तान ने इस बात का खंडन करते हुए कहा है कि भारत को ही गलतफहमी हर्ुइ है। यह वो अबू हमजा नहीं है। जबकि हमजा का कहना है कि उसे पाकिस्तान में विशेष सुरक्षा मिली हर्ुइ थी।
२६/११ के मास्टर माइंड अबू जिंदाल के पकडÞे जाने के बाद भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम ने बुधवार को कहा कि इस मामले के बांकी आरोपियों को भी पकडÞ लिया जाएगा। उन्होंने कहा २६/११ के ४-५ आरोपी अभी पाकिस्तान में रह रहे हैं।
चिदंबरम ने कहा कि भारत का सबसे वांछित अपराधी दाऊद इब्राहिम भी पाकिस्तान में ही मौजूद है। उन्होंने मांग की कि पाकिस्तान मुर्ंबई हमले के सभी आरोपियों के वाँयस सैंपल भारत को सौंपे। गृहमंत्री ने कहा कि २६/११ के मास्टर माइंड अबू जिंदाल पर पिछले एक वर्षसे नजर रखी जा रही थी। सूत्रों के अनुसार अबू जिंदाल से पूछताछ के दौरान मुर्ंबई हमले में पाकिस्तान की भूमिका और खुलकर सामने आ सकती है।
भारत और पाकिस्तान के बीच अगले ४ जुलाई से सचिव स्तर की वार्ता होने वाली है। ऐसे में गृहमंत्री के इस बयान से वार्ता के सकारात्मक रहने की संभावना पर सवालिया निशान लग सकता है। अभी पहले सरबजीत की रिहाई की घोषणा तथा फिर बाद में आईएसआई के दबाव में पलट जाने से भारत-पाकिस्तान के रिश्ते तल्ख हो गए हैं।
मुर्ंबई हमले में गिरफ्तार जबीउद्दीन अंसारी उर्फअबू जुंदाल को पाकिस्तान में उसके आकाओं ने दो पहचान पत्र दिए थे। इनमें से एक पाकिस्तान के लिए था और दूसरा उसके वहां से बाहर जाने के लिए था। दोनों में उसकी पहचान अलग थी। जुंदाल से पूछताछ में एजेंसियों को यह जानकारी मिली है।
उधर, गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान के साथ जुंदाल से मिली जानकारियां साझा करने का विचार त्याग दिया है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री रहमान मलिक के बयान के बाद सूचनाएं साझा करने का कोई औचित्य नहीं बनता है।
मंत्रालय को लगता था कि पाक मुर्ंबई हमले में दिए जाने वाले साक्ष्यों पर काम करते हुए इसके साजिशकर्ताओं और लश्कर प्रमुख जकी उर रहमान लखवी पर कार्रवाई करेगा लेकिन उसने साफ कर दिया है कि वह मुर्ंबई हमले में अभी भी मूक दर्शक ही बना रहेगा। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक जुंदाल को रियासत अली के नाम से जारी पाक पासपोर्ट के अलावा उसके आकाओं ने उसे दो पहचान पत्र दिए थे।
एक, उसकी पाकिस्तान में मौजूदगी के लिए था जबकि दूसरा परिचय पत्र उसके पाक से बाहर रहने के दौरान के लिए था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जिंदाल ने पूछताछ में कराची के कंट्रोल रूम से लेकर वहां भारत के खिलाफ सक्रिय लश्कर और आईएसआई अधिकारियों के बारे में कई तरह की सूचनाएं दी हैं। इन्हें समय आने पर उचित मंच पर भारत उठाएगा।
गृह सचिव स्तरीय वार्ता के दौरान पाक को सौंपे गए वांछित अपराधियों की सूची में जिंदाल का नाम न होने संबंधी सवाल पर एक अन्य अधिकारी ने कहा कि उस समय जिंदाल सऊदी अरब गया था। ऐसे में पाक को गलत सूचना कैसे दी जा सकती थी। पाक को चाहिए कि वह भारत कर्ीर् इमानदारी का सम्मान करे। उल्टा वह साक्ष्यों को दरकिनार करते हुए मुर्ंबई हमले में पाक सरकारी मशीनरी की संलिप्तता से ही इनकार कर रहा है।
भारत में ९/११ की थी साजिश
जबीउद्दीन उर्फअबू जिंदाल उर्फअबू हमजा को लेकर भले ही पाकिस्तान पल्ला झाडÞ रहा हो लेकिन हमजा एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासा कर रहा है। नए खुलासे में यह सामने आया है कि लश्कर-ए-तोएबा का यह आतंकी हवाई जहाज उडÞाने का प्रशिक्षण ले चुका है। हमजा अमेरिका के ९/११ की तरह हिंदुस्तान में भी बडÞा धमाका करना चाहता था। उसके निशाने पर देश की ऊंचर्ीर् इमारतें और बडÞे बांध थे। यह खुलासा एक अंग्रेजी अखबार ने किया है।
वहीं, महाराष्ट्र एटीएस से जुडÞे सूत्रों ने दावा किया है कि हिंदुस्तान में वर्ष२००८ के बाद जितने भी बम ब्लास्ट हुए, सब में अबू हमजा का हाथ था। एटीएस के सूत्रों की मानें तो विदर्भ इलाके के ८ युवकों को अबू ने पाकिस्तान में आतंकी ट्रेनिंग दी थी। इन युवकों के बारे में बताया जा रहा है कि ये सभी भारत में हैं और २००८ के बाद भारत में हुए सभी धमाकों में इन ८ युवकों का हाथ है और इनके पीछे अबू का दिमाग काम कर रहा था। यह बात भी सामने आई है कि अबू ने बतौर इलेक्टि्रशियन बीडÞ के पुलिस दफ्तरों समेत कई सरकारी इमारतों में काम किया है।
दाउद की मदद से अबू हमजा भागा था
अगर भारतीय अधिकारियों की माने तो २६/११ के मुर्ंबई हमले के आरोपी सैयद जबीउद्दीन उर्फअबू हमजा को दाउद नेर्टवर्क, पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई और आंतकवादी संगठन लश्करे तैयबा ने नकली पाकिस्तानी पासपोर्ट मुहैया कराया था, जिससे वह साउदी अरब भाग सके।
ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है, क्योंकि दर्ुबई डी कंपनी का गढÞ है। कंपनी का वहां होटल से लेकर तेल निर्यात करने तक में पैसा लगा हुआ है। भारतीय खुफिया अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि हमजा को दर्ुबई में रहने और नौकरी देने में भी दाउद नेर्टवर्क का कोई हाथ था या नहीं।
जबीउद्दीन के ८ “मानव बम”
२६/११ के मुर्ंबई हमले के आरोपी सैयद जबीउद्दीन अंसारी उर्फअबू हमजा के छिपने और उसकी गिरफ्तारी की कहानी जितनी दिलचस्प है, उसके इरादे उतने ही खौफनाक है। दिल्ली पुलिस ने २५ जुलाई को उसकी गिरफ्तारी की बात र्सार्वजनिक की। लेकिन कहा जा रहा है कि उसे कुछ दिन पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था और डीएनए टेस्ट कराने के बाद इस बारे में ऐलान किया गया। डीएनए टेस्ट उसकी पहचान पुख्ता करने के लिए जरूरी था। बताया जाता है कि अंसारी ने २६ नाम रख रखे थे। वह सऊदी अरब में रह रहा था और वहां से लौटने पर २१ जून को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया।
ऐसी खबरें आ रही हैं कि मुर्ंबई हमले में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद वह इस तरह का एक और हमला अंजाम देना चाहता था। उसके निशाने पर नरेंद्र मोदी भी थे। दरअसल, वह चर्चा में ही तभी आया था, जब उसने मोदी की हत्या की साजिश रची थी। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि गिरफ्तारी से ठीक पहले जबीउद्दीन भारत में २६/११ से भी बडÞे आतंकी हमले की तैयारी कर रहा था।
महाराष्ट्र एटीएस से जुडÞे सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके के ८ युवकों को जबीउद्दीन ने पाकिस्तान में आतंकी ट्रेनिंग दी थी। इन युवकों के बारे में बताया जा रहा है कि ये सभी भारत में हैं और २००८ के बाद भारत में हुए सभी धमाकों में इन ८ युवकों का हाथ है और इनके पीछे जबीउद्दीन का दिमाग काम कर रहा था। यह बात भी सामने आई है कि जबीउद्दीन ने बतौर इलेक्टि्रशियन बीड के पुलिस के दफ्तरों समेत कई सरकारी इमारतों में काम किया है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल जबीउद्दीन से पूछताछ कर रही है। स्पेशल सेल के बाद एनआईए जबीउद्दीन से पूछताछ करेगी। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि पूछताछ के दौरान जबीउद्दीन ने माना है कि जब कराची के एयरपोर्ट और कैंटोनमेंट एरिया के बीच मौजूद कंट्रोल रूम में बैठकर मुर्ंबई हमले को अंजाम देने वालों को निर्देश दिए जा रहे थे, तब पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का अधिकारी समीर अली भी उस कमरे में मौजूद थे।
इसके अलावा जबीउद्दीन ने यह भी माना है कि आईएसआई ने पाकिस्तान में उसके छुपने के लिए सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध करवाया था। यही नहीं, आईएसआई ने जबीउद्दीन को पाकिस्तानी पासपोर्ट भी दिया था, जिसे लेकर वह सऊदी अरब में रह रहा था। जबीउद्दीन ने कहा कि जब कसाब ने उसका नाम मुर्ंबई हमले से जुडÞे मुकदमे में लिया तो वह सऊदी अरब भाग गया।
जबीउद्दीन को हिरासत में लेने के लिए मुर्ंबई पुलिस ने मंगलवार को तीस हजारी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को २७ जून तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। मुर्ंबई की एक अदालत ने जबीउद्दीन के मामले में प्रोडक्शन वाँरंट भी जारी कर दिया।
मुर्ंबई क्राइम ब्रांच से जुडÞे सूत्रों का कहना है कि जबीउद्दीन को कसाब के सामने बैठाकर, दोनों से पूछताछ की जाएगी। मुर्ंबई क्राइम ब्रांच की टीम जबीउद्दीन से पूछताछ करने मंगलवार को दिल्ली आई। गौरतलब है कि मुर्ंबई हमले को अंजाम देने वाले आतंकी कसाब ने अपने बयान में कहा था कि जबीउद्दीन ने अबू हमजा, अबू काफा और लखवी के साथ पाकिस्तान के समुद्र तट से १० आतंकियों को विदा किया था। इस बीच, जबीउद्दीन का परिवार बीड शहर में मौजूद मकान से भाग गया है। वहां, स्थानीय पुलिस के जवान तैनात हैं।
रुख बदला तो हाथ आया हमजा
बांग्लादेश के बाद अब खाडÞी देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय आंतरिक सुरक्षा रिश्ते नई दिशा में बढÞते नजर आ रहे हैं। सैयद जबीउद्दीन उर्फअबू जिंदाल उर्फअबू हमजा की गिरफ्तारी को भले ही सुरक्षा एजेंसियां बता रही हों कि उसे सऊदी अरब से भारत पहुंचने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर पकडÞा गया है, लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि इसमें संबंधित देश की भूमिका महत्वपर्ूण्ा है। यह पहली बार होगा जब मुर्ंबई हमले जैसे किसी बडÞे मामले में शामिल किसी आतंकवादी की गिरफ्तारी में खाडÞी देशों से मदद मिली है।
सूत्रों के मुताबिक यह भारत के नए कूटनीतिक संबंध और केद्रीय गृह मंत्रालय की पहल का ही नतीजा है कि जिंदाल की गिरफ्तारी में वहां की सरकार का सहयोग हासिल हो पाया है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर यह खाडÞी देशों के साथ एक नई पहल की दिशा में पहला कदम हो सकता है।’
सूत्रों के मुताबिक सऊदी अरब और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच बन रहे इस नए संबंध में अमेरिका ने भी एक महत्वपर्ूण्ा भूमिका निभाई है। वह सऊदी अरब को यह बताता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खात्मे के लिए भारत की मदद कितनी आवश्यक है। इस मामले में खुफिया ब्यूरो के निर्देशक निश्चल संधू भी लगातार सऊदी अरब अधिकारियों के सर्ंपर्क में बने रहे और भारत का नजरिया सकारात्मक रूप से रखने में सफल रहे।
असल में भारत लंबे समय से उस पुराने नजरिए को तोडने की कोशिश कर रहा था जिसके मुताबिक खास समुदाय का होने के नाते पडÞोसी मुल्कों के साथ ही खाडÞी देशों में भी आतंकियों को शरण मिलती है। इस प्रयास में सबसे बडÞी सफलता भारत को करीब तीन साल पहले मिली जब उल्फा के संस्थापकों में एक अरविंद राजखोवा को बांग्लादेश सीमा पर पकडÞा गया।
यह चर्चा है कि राजनीतिक वजहों से उसका सीधा प्रर्त्यर्पण न करके उसे मजबूर किया गया कि वह सीमा पार करके वापस अपने देश जाए। इसका उद्देश्य उसे भारतीय सीमा में गिरफ्तार करवाना था। यह कूटनीतिक स्तर पर भारत की बडÞी उपलब्धि थी। इसके बाद बांग्लादेश में भारत विरोधी तत्व और आतंकियों के छुपने की खबर कम ही सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक राजखोवा की गिरफ्तारी के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और केद्रीय गृह मंत्रालय ने खाडÞी देशों पर ध्यान केंद्रित किया। केद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम और तत्कालीन केद्रीय गृह सचिव जीके पिल्लै ने इसमें महत्वपर्ूण्ा भूमिका अदा की। उन्होंने खाडÞी देशों को यह साफ किया कि आतंकी किसी धर्म, समुदाय या जाति के नहीं होते हैं।
भारत में विभिन्न आतंकी मामलों में गिरफ्तार स्थानीय लोगों की सूचनाएं साझा की गईं। इसके बाद कुछ खाडÞी देशों ने आतंकी मामलों में सूचनाएं साझा कीं। एक अधिकारी ने इस सिलसिले में कहा, ‘पाया गया कि भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले अधिकतर इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी नकली पासपोर्ट के सहारे नेपाल या पाकिस्तान के रास्ते सऊदी अरब या दूसरे खाडÞी देशों में पहुंच जाते हैं। ऐसे में वहां की सरकार के साथ इस दिशा में बेहतर संबंध बनाना आवश्यक था।’
रखे थे २६ नाम
सैयद जबिद्दीन उर्फसैयद जकिउद्दीन उर्फजबी अंसारी उर्फजबी उर्फआसिफ उर्फरियाज अली खान मोहम्मद उर्फअबु जुंदाल मूल रूप से मोहल्ला हाथी खाना, गांव व पोस्ट आँफिस बीड, जिला बीड का रहने वाला है। १३ नवंबर १९८१ में जन्मे जबिउद्दीन ने बीड जिले में स्थित आईटीआई से इलेक्टि्रकल डिप्लोमा करने के बाद जिले के ही काँलेज से बीएससी पास की थी। बीएससी करने के बाद उसने गांव में ही इलेक्टि्रकल दुकान खोली।
दिल्ली पुलिस के सामने दिए बयान में जकिउद्दीन ने खुलासा किया है कि वर्ष२००२ में गुजरात के गोधरा में हुए दंगों से वह काफी परेशान हो गया था। वह पहले से ही सिमी -स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आँफ इंडिया) से प्रभावित था और अक्सर उसकी सभा में भाग लेता था। वह अक्सर दुकान का सामान लेने के सिलसिले में औरंगाबाद जाया करता था। जहां उसकी मुलाकात अमीन नामक शख्स से हर्ुइ।
अमीन ने उसे गोधरा दंगों में मुसलमानों पर हुए अत्याचार का हवाला देते हुए आतंक की राह की ओर मोडÞा। अमीन ने उसकी मुलाकात कुछ और लोगों से भी कर्राई, जो आतंकी गतिविधियों से जुडÞे हुए थे। सिमी पर बैन लगने के बाद आमिर रजा खाना ने रियाज व इकबाल भटकल के साथ मिल कर इंडियन मुजाहिद्दीन -आईएम) का गठन किया। जिसके बाद वह भी आईएम का सक्रिय सदस्य बन गया। वह अमीन व अन्य लोगों के साथ राहिल शेख की मदद से बांग्लादेश के रास्ते पाकिस्तान गया, जहां उसे पाकिस्तानर्-इरान बार्ँडर पर लश्कर के कैंप में आतंकी ट्रेनिंग दी गई।
इसके बाद वह वापस भारत आया और अपने गांव में ही रहने लगा। उसे महाराष्ट्र व यूपी से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को आतंकी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने का जिम्मा दिया गया। फिर उसे पाक अधिकृत कश्मीर बुलाया गया, जहां भारत से आने वाले कश्मीरी व अन्य युवाओं को प्रशिक्षण आदि दिलाने का इंतजाम करना होता था। वर्ष२००८ में आईएम द्वारा दिल्ली में हुए श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों की साजिश में सैयद जबिउद्दीन उर्फअबु जुंदाल भी शामिल था। इस बम धमाके के बाद लश्कर का भारत में अब तक का सबसे बडÞा आतंकी आँपरेशन मुर्ंबई २६/११ हमले में भी इसने काफी अहम भूमिका निभाई। इस हमले की साजिश के अलावा आतंकियों को भाषा की ट्रेनिंग भी इसने दी।
कसाब से होगा सामना
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सैयद जबिउद्दीन उर्फअबु जुंदाल से पूछताछ करने के लिए महाराष्ट्र एटीएस की टीम भी लगातार दिल्ली पुलिस के सर्ंपर्क में है। महाराष्ट्र एटीएस सैयद जबिउद्दीन को प्रोडक्शन वारंट पर मुर्ंबई ले जाना चाह रही है, जिसके बाद वह उससे पूछताछ करने के साथ साथ उसका सामना अजमल कसाब से भी कराएगी। जिससे इसके खिलाफ सबूत और पुख्ता हो जाएगा।
पाक में शादी कर चुका है सैयद जबिउद्दीनर्
मई २००६ में महाराष्ट्र एटीएस ने औरंगाबाद से एके ४७ व आरडीएक्स का काफी बडÞा जखीरा पकडÞा था। पुलिस इस मामले में सैयद जबिउद्दीन की तलाश कर रही थी। इसकी भनक लगते ही वह फिर से बांग्लादेश के रास्ते पाकिस्तान चला गया। यहां वह लश्कर के बडÞे कमांडरों से मिला। इसके बाद उसकी मुलाकात रियाज व इकबाल भटकल तथा आमिर रजा खान से भी हर्ुइ। पाकिस्तान में रहने के दौरान ही उसने एक युवती से शादी कर ली और इस शादी से उसके बच्चे भी हैं। कुछ समय पहले वह पाकिस्तान से सउदी अरब चला गया था और वहां पर नौकरी कर रहा था। पुलिस ने उसके पास से सउदी अरब व पाकिस्तानी पासपोर्ट भी बरामद किए हैं।

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