पिछला अनुभव वर्तमान समस्या अाैर भविष्य की चिन्ता : विकास प्रसाद लाेध

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विकास प्रसाद लाेध,लुम्बनी, २८ दिसिम्बर |  (१) अनुभव
विगत २५० सालाे की निरन्तर एक से एक शासन प्रणाली (निरंकुश राजतन्त्र, कठाेर राणातन्त्र, कुरुर जमिनदारी शासन, एकात्मक  पंचायती वयवस्था, भ्रष्ट लाेकतन्त्र ऐवम् जातिवादि गणतन्त्र ) सभी शासन प्रणालीयाेँ ने अपने अापकाे स्थापित करने के लिए मधेशीयाे काे विशेष षडयन्त्रात्म विधि से प्रयाेग किया | उन्हे अनेक प्रकार का दिवा स्वप्न दिखाकर सिर्फ सत्ता हथियाने का हथियार वानाये | जिससे मधेशी तथा थारु समुदाय विशेष अाशाए कर वैठी वही शासन प्रणाली उन का नश्लीय सफाय के उद्देश्य से अान्तरीक विभेद सिर्जना करने मे काेई चुक नही छोड़ा।
सुरुवाती दाैर से ही मधेशी तथा थारु पर उपनिवेश लादने की साजिस किया गया– सुरुवात पृथ्विनारायण शाह ने सेना मे मधेशीयाे काे पुर्ण प्रतिवन्ध कर के किया, फिर  ढाका टाेपी दाउरा सुर्वाल अनिवार्य  हुवा, फिर महेन्द्र माला अर्थात नेपाली खश भाषा लिखने पढने अाैर वाेलने पर मजवुर किया | बाकी गुलामी की  चरम अभ्यास राणा शासन ने करवा डाली, जाे बाकी वचा वह अभ्यास जमिनदाराे ने करवाया, अाैर प्रजातन्त्र ने मधेशी काे सिधे सिधे लुट लिया उनकी जमिन छिन लिया नागरीक्ता विहिन वनादिया अप्रवासन कि चरम सुरुवात हाेगया, अाैर खशाे ने उपनिवेश तथा गुलामी का विशेष फायदा उठाया लाेकतन्त्र अाैर गणतन्त्र स्थापना मे, जहाँ मधेशीयाे तथा थारुअाे काे विशेष हथियार वनाया गया हजाराैँ लाेग मारे गए लाखाै लाेग धायल तथा अापाङग हुये। इस प्रकार की आपविती ईतिहास काे झेल्ते अाए मधेशी तथा थारु समुदाय के लाेग नेपाल मे विती भुतकाल काे कैसे भुल सक्ते है–
(२) समस्या
मधेशीयाे पर उपनिवेश लादने मे राजतन्त्र नेपाल की एक अहम हिस्सा (काल) रहा है अाैर मधेशीयाे पर विशेष निगरानि सहित अलग किसिम की शासन किए जाते थे मधेशीयाे काे अलग दृष्टिकाेण से देखाजाता था अाैर वह सिलसिला अाज तक निरन्तरता पर है, राणा काल भी मधेश तथा मधेशीयाे पर दमनात्मक किसिम से दाेहराे शासन प्रणाली से शासन कियागया प्रजातन्त्र ने मधेशकाे मनाेवैज्ञानिक तरिके से सेन्टिमेटल तरिके से अघात पहहूँचाया लाेकतन्त्र अाैर गणतन्त्र ने मधेशीयाे काे वैचारिक तरिके से रङ्ग वर्ण सम्प्रदाय मे वाट दिया आपसी कलह पैदा किया भ्रष्टाचार दुराचार भी होने लगा ।
अाज मधेशी विभिन्न समस्या के वावजुद सङघर्ष कर रहे है लेकिन उपयुक्त निदान की तलास करने मे  कहीं न कहीं मधेशीयाे से चुक हाेरही है। अाज मधेशी नेपाल के अन्दर ही साँस मे जहर ले रहा है, हर कदम माैत काे गले लगा रहा है, हर पल अच्छे दिनकी प्रतिक्षा कर रहा है, हर वक्त उम्मिद कि दुवा माँग रहा है, अाज मधेशीयाे के पास वच्चे है लेकिन स्वास्थ अाैर शिक्षा नही, अमिरी है लेकिन पैसे नही, खेत है लेकिन अन्न नही, जमिन है लेकिन अपना नही, देश है लेकिन पहिचान नही, नाम है लेकिन सम्मान नही।
इस प्रकार की विभिन्न समस्या काे लेकर समग्र मधेश अान्दाेलित है समस्या की निराकरण खाेज रहे मधेशीयाे मे वाैखलाहट उतपन्न हाेरहा है अाैर उम्मिद मे जिए जा रहे है की एक दिन हमारी समस्या जरुर समाधान हाेगी अाैर हम चयन से जी सकेगे लेकिन यह काेई पहली चाहत नही है |
(३) चिन्ता
पिडित हर काेई है, हर मधेशी, हर थारु, हर जनजाति, सभी इस राज्य सत्ता से अत्यन्त दु:खि है परन्तु चिन्तित हर काेई है यह कहना जरा मुस्किल है क्याे कि कुछ लाेग नेपाली राज्य सत्ता तथा शासन से जितने खुश है उनसे कही ज्यादा लाेग दुःखी ही नही वल्कि वेहद शर्मनाक जिन्दगी विताने पर विवश हैँ अाैर एक अात्मगलानि मे अपनी जीवन विताने पर मजवुर है हर शाम एक ही व्यथा से परिताडित वह अाँखाे मे सपने भी आनेसे ईन्कार कर देते है | मधेशी सामाज अाज गुलामी की चरम अवस्था काे झेलने पर मजवुर है उन्हे आज कल की चिन्ता ने पागल वना दिया है
१-वह चिन्तित है अपने पुर्व याेगदान से ।
२-वह चिन्तित है अाज की हालात से ।
३-वह चिन्नतित है कल की तवाहि से ।
३- वह चिन्तित है अपने अधिकार के लिए ।
४-वह चिन्तित है अपने स्वाभिमान के लिए ।
५- वह चिन्तित है अपने सम्मान के लिए ।
६- वह चिन्तित है अपने अस्तित्व के लिए ।
७- वह चिन्तित है अपने सन्तानाे के भविष्य के लिए ।
८- वह चिन्तित है मधेश के लिए
९- वह चिन्तित है मधेशी की जन्ता के लिए ।
इस प्रकार की चिन्ता जाे उन्हे हर लम्हे से गुजर जाने पर मजवुर कर रही है हर अन्दाेलन काे सर पर उठा लेने मे अपना भलाई समझ रहे मधेशी जन्ता काे काेई भी अाज असानी से अपना हथियार वनाने से नही  चुक रहा है |

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