पी.एम.ओली के झोली में क्या है ? बिम्मी शर्मा

देश जुगलबंदी और पत्नी व प्रेमिका के बुने हुए गलबंदी पहन कर नहीं चलाया जा सकता ?

 बिम्मी शर्मा, काठमांडू ,१ दिसम्बर |

राष्ट्रवाद के हथियार से हमारे पी.एम.ओली सभी का गला रेत रहे है । वह पी.एम तो बन गए पर जवाबदेह न बन सके । पी.एम.ओली को लगता है कि राष्ट्रवाद और देशप्रेम का राग कोई कामधेनु गाय है जिसे दुह कर वह अपनी सारी समस्याओं से निजात पा लेंगे । पर यह राष्ट्रवाद तो फांस बन कर जनता के गले मे अटक गई है । न उगलते बन रहा है, न निगलते बन रहा है । राष्ट्रवाद का दिखावा तो अच्छा जरुर है पर इस से किसी के घर का चूल्हा नहीं जलता न ही पेट ही भरता है ।

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हमारे पी.एम ओली के जादुई झोली में उखानों का पिटारा है । जिसे सुना कर वह जनता और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का मन भरमाते हैं । कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकार भी अपना फोकट में मनोरंजन कर लेते हैं । जैसे तैसे तिकड़म कर के प्रधानमंत्री हो बन जाना और उस के लिए पात्रता रखना दो अलग, अलग बातें हैं । अनेक तिकड़मबाजी कर के ओली पी.एम.तो बन गए पर सत्ता चलाने की खूबी उनमें रत्ती भर भी नहीं हैं । इसी लिए तो राजधानी की एलिट क्लास जनता को श्वेतपत्र जारी कर के अपना कालिख भरा चेहरा छुपा रहे हैं और मधेश की जनता को गोली बांट रहे हैं ।

पी.एम ओली से किसी को समस्या समाधान की कोई उम्मीद नहीं है । जब विगत में मारने काटने और लड़ाई करने वाले ही देश के भाग्यविधाता बन बैठे हंै । तब देश में बन्दुक की गोली चलेगी और खून की होली ही बहेगी । २०२८ साल में झापा कांड के मुखिया इस देश के पी.एम.और माओवादी जनयुद्ध में १७ हजार नेपाल की जनता को मारने वाले ही जब सिहंदरवार पर काबिज हो देश हांक रहे हैं तो ? जनता बेचारी “अब तेरा क्या होगा कालिया” के तर्ज पर सहमी बैठी हुई है ।

राष्ट्रवाद कोई परफ्यूम वा बेहोश करने वाली कोई दवा नहीं है । जिसे यहां के नागरिकों के शरीर में छिड़क कर उन्हे कुछ समय के लिए बेहोश किया जा सके । यह तो देश के लिए मन में उठने वाली वह बलवती भावना है जिस में देश के प्रति कुछ कर दिखाने का जज्बा हो । पर हमारे आदरणीय पी.एम ने यहां पर नागरिकों की इसी कमजोर नस को छू कर अपना उल्लु सीधा कर रहे हैं । देश और धर्म ही किसी देश की कमजोरी भी है और ताकत भी । इसी को अपने स्वार्थ अनुकूल छोड़ कर नेता अपना भविष्य बनाते हैं और देश और जनता का वर्तमान बिगाड़ देते हैं ।

पी.एम. ओली की झोली में जनता पर फेंकने के लिए एक से एक दांव है । कभी वह देश से एक साल में लोडसेडिग हटा कर उजियाला लाने की बात करते है । और मुर्ख जनता की बांछे खिल जाती है यह सब सुन कर और पढ़ कर । पर पी.एम.ओली स्वयं को पता है कि वह एक साल भी सत्ता में नहीं टिकेगें । इसी लिए आश्वासनों का पिटारा बांटनें में किसी का क्या जाता है । देश के मौजुद समस्याओं का हल तो नहीं है उन के पास मगर भविष्य में अंधकार मिटाने का दावा खूब जोश–खरोश से कर रहे हैं । पहले वर्तमान का अंधेरा तो मिटाइए पी.एम.जी ?

पी.एमओली के पिटारे में विद्युतीय सवारी साधन का आयात करने और उपयोग में लाने की भी योजना है । गैस के अभाव में लकड़ी जला कर खाना बनाना भी ओली के इस भानुमती के पिटारे का एक नायाब नमूना है । जिस नमूने को देख और भोग कर जनता सर पिटते और खांसते हुए बेदम होती जा रही है । पर यह ओली ब्रांड का लकड़ी का मूढ़ा कितने दिन और जलेगा और चलेगा ? यह देखने के लिए तब तक राष्ट्रवाद का माला जपते रहीए । इस से कुछ हासिल हो न हो, किसी का आता, जाता कुछ भी नहीं है ।

जब पी.एम.ओली एक महीने में लाख रुपए का पत्रिका पढ़ कर हजम कर जाते है । लाखों रुपए का नाश्ता डकार जाते हैं । तब जनता की निंदा को डकारना कोई बड़ी बात नहीं है । कम्यूनिष्ट पैदा होते ही निंदा करने और सुनने के लिए है । भाड़ मे जाए देश और जनता ? पी.एम.ओली के झोली में भारत और अपने विरोधी पार्टी को कोसने के लिए एक से एक गाली और तोहमत भरे पडे है । जैसे उखान और तुकबंदी कर के वह सत्ता को हथिया कर बैठे हैं, वैसे ही मधेश, मधेशी और मधेशी मोर्चा को भी उसी जुमले की जुगलबंदी कर के भरमा रहे हैं ।

देश जुगलबंदी और पत्नी व प्रेमिका के बुने हुए गलबंदी पहन कर नहीं चलाया जा सकता । भविष्य की सुनहरीं योजनाओं का भ्रमजाल नहीं वर्तमान के ठोस निर्णय की आवश्यक्ता है । पर कभी चीन से अनुदान में तेल मांग कर और अपने कर्मचारियों को चीन और बागंलादेश घूम कर आने से कुछ नहीं होता । आंख में आंसू भर कर और देश के नाम संदेश और श्वेतपत्र जारी कर के देश प्रेम का नाटक बहुत हो गया । जनता के पेट में भूख से एेंठन पड़ गयी है । इस श्वेतपत्र से तो आप का कालाचरित्र ही दिख रहा है और कुछ नहीं । कालाबजारी करनें मे अपने कार्यकर्ता और व्यापारियों को छूट दे कर के तो आप श्यामपत्र को जारी कर रहे है पीएम जी ? इससे अच्छा तो आप श्वेत पत्र को सीधा और सरल भाषा में श्याम पत्र ही बोलते तो आप के व्यक्तित्व और जुबान को शोभा देता ?

तो पी.एम.ओली जी आपकी झोली में अब कुछ नहीं है जनता को देने और दिखाने के लिए ? आप का पी.एम.बनना ही इस देश के लिए महादशा है । जितने दिन आप पद में रहेंगे जनता आवश्यक वस्तुओं की अभाव के कारण जोर–जोर रोती रहेगी । शायद आपको मालूम न हो देश में कम्यूनिष्ट का शासन होने के कारण ही कोई दूसरा देश और वैदेशिक संस्था आप और आप के मंत्री मंडल को गंभीरता से नहीं ले रहा है । संसार के तीन चौथाई से ज्यादा लोग कम्यूनिष्ट और कम्यूनिज्म से घृणा करते हैं । आप और आपका दल और सत्ता के अन्य सहयात्री दल क्या भारत और मोदी से घृणा करेंगे ? पहले अपनी गिरेबान में झांक कर देखिए आप अपने देश और जनता के लिए क्या कर रहे हैं ?

ओली की झोली में क्या है,

ओली की झोली मे ?

ओली की झोली में हैं

मुहवरों की पोटली और उनकी तीखी बोली ।

ओली की झोली में है आश्वासन

और मधेशी जनता के लिए हैं,

मुफ्त की बन्दुक की की गोली ।

(व्यग्ंय )

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