पूरे होंगे अधूरे सपने –

हिमालिनी डेस्क
सामान्य व्यक्ति अगर उनकी बात सुने तो वे पागल की तरह लागेंगे। विकास निर्माण के लिए कुछ चिन्तन करनेवाले को अविश्वसनीय बात करके चकित करनेवाले व्यक्ति हैं। हँ, वही व्यक्ति अर्थात केशव स्थापित, जिनके लिए डा. बाबुराम भट्टर्राई नेतृत्ववाली वर्तमान सरकार ने एक जिम्मेवारी सौंपी है। दर्ुगन्धित शहर और अव्यवस्थित काठमांडू उपत्यका को व्यवस्थित करना अब उनकी जिम्मेवारी है। लेकिन स्थापित से नाराज व्यक्ति और सरकार की आलोचना करनेवाले लोग “पागल के हाथ में जिम्मेवारी सौपी गई है” कहते हुए उनकी हँसी उडÞाते हैं।  जो हो, सरकार द्वारा अभी हाल में गठन हुआ ‘काठमांडौं उपत्यका विकास प्राधिकरण’ के आयुक्त बने है, केशव स्थापित।
काठमाडौं उपत्यका के तीन जिला काठमाडौं, ललितपुर और भक्तपुर को विकसित देश के शहर की तरह हराभरा और आकर्ष बनाने की जिम्मेवारी है, स्थापित के कंधे पर। इस के लिए उनके मस्तिक में योजना और साहस भी है। इसीलिए वह अभी काठमांडू को यूरोपीय शहर के समकक्ष में लेजाना चाहते हैं। प्रमुख आयुक्त की पदबहाली हानेके बाद आयोजित पहला पत्रकार सम्मेलन में बोलते हुए स्थापित ने कहा- “बहुत व्यक्ति मुझे पागल कहते है। अब पाँच वर्षके अन्दर देखें, वैसी बात करनेवालों को मैं ऐसा करारा जफाव दूँगा कि वे लोग देखते रह जाएँगेे।” इस के लिए उन्होंने कुछ योजनाए।
काठमांडू की सडÞक को चौडÞा बनाकर ट्राफिकजाम कम तो करना ही है, साथ ही शहर की सडÞक में ८ हजार सौर्यबत्ती जडÞान करना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसी तरह युवा पीढÞी के लिए आवश्यक मनोरञ्जनपर्ूण्ा पार्क निर्माण करना भी उनका नारा है। स्थापित चाहते है कि काठमांडू मंे कुछ जगह ऐसी हों, जहाँ युवा-युवती आपस में प्रेम प्रकट कर सके। वह आगे कहते है- “प्रेम में पडÞे हुए युगल जोडÞी के लिए यहाँ कोई ऐसी जगह भी नहीं है, जहाँ जाकर वे अपना प्रेम प्रकट करें और राष्ट्र के लिए भी कुछ सोचें।” स्थापित कहते है कि अब वह काठमांडू के कुछ जगहों पर ऐसा ही गार्डर्ेेबनाएँगे, जहाँ, भीड-भाडयुक्त शहर से भागते हुए वहाँ जाकर कुछ क्षण के लिए भी मुक्ति का एहसास कर सकें। स्थापित की ऐसी बात सुनने पर लगता है कि या तो वे पागल है या  उन के दिल में अभी भी जवानी जज्बा जोडÞ मार रहा है
कुछ भी हो, उन के पास बडÞे-बडेÞ सपने दिखाकर बडÞी-बडÞी बातें कहने का हूनर है। साथ में ऐसी कुछ योजनाएँ भी है, जिन को वे कार्यरुप में परिणत करना चाहते हैं। लेकिन इस तरह की बडेÞ-बडेÞ योजनाओं का सपना दिखानेवाले स्थापित को कुछ लोग पागल की संज्ञा देते है। लोग उनके बारे में कुछ भी कहे, उसे स्थापित बुरा नहीं मानतें। वे कहते है- “मुझे काम करने का वातावरण चाहिए, आप लोग देखेगें, पाँच वर्षके अन्दर मै काठमांडू को कैसा बनादंूगाँ।” देश की समृद्धि के लिए एक राजनेता के पास जो सपना होना चाहिए, वह स्थापित के पास है। इसीलिए लिए तो वे बडÞे-बडेÞ बात करते हैं। खैर, अब उन के कंधों पर वह जिम्मेवारी आई गई है, जिसे वे चाहते थे।
अगर स्थापित हिम्मत करें तो कुछ कर भी सकते है। इसका उदाहरण उन्होंने पहले भी दिया है। काठमांडू महानगरपालिका के पर्ूवमेयर रह चुके स्थापित पिछली बार हुए स्थानीय निर्वाचन में अत्यधिक मत से निर्वाचित हुए थें। उस समय में भी उन्होंने काठमांडू का सडक बिस्तार सम्बन्धी कुछ काम किया था, जो प्रशंसनीय था। स्थापित राजनीतिक विचारधारा से एमाले निकट है। लेकिन पिछले कुछ सालों से एमाले में उनकी कुछ भूमिका नहीं है। प्राधिकरण के आयुक्त होने के बाद उन्हांेंने कहा है “मैं एमाले का कार्यकर्ता हूँ, लेकिन अब पाँच वर्षतक मैं कोई भी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता होकर नहीं चलूगाँ।”
वैसे तो उनके राजनीतिक यात्रा हर समय एक ही तरह नहीं दिखती। एमाले से माले होकर ‘प्रजापरिषद्’ नामक पार्टर्ीीे वे प्रमुख तक बने हैं। एक ही पार्टर्ीीें न रहना उनकी कमजोरी मानी जाती है। जब वह प्रजापरिषद् में थे, उनको राजावादी होने का आरोप भी लगा है। उसके बाद प्रजापरिषद् छोडकर वह फिर एमाले में ही लौट आए। फिर भी बहुत सारे लोग स्थापित को एक अच्छे आदमी मानते है,  देश के लिए कुछ करने का दूरदर्शी दृष्टिकोण और दार्शनिक चिन्तन उन में है, ऐसी विश्वास करनेवाले बहुत हैं। इसीलिए कोई आदमी तो स्थापित को भावी मुख्यमन्त्री के रुप में भी देखते हैं।
स्थापित भावी मुख्यमन्त्री बनें न बने, जिस समय स्थापित काठमांडू महानगरपालिका के मेयर थे, उस समय वे रातभर सडÞक में काम करते थे। शहर की सडÞकों को चौडी बनाने के लिए उन्होंने जो कुछ किया, उसके बहुत सारे प्रशंसक है। लेकिन कुछ विरोधी भी थे। खैर, शहर के लिए उनके पास दूरदृष्टिकोण है। उपत्यका मंे सडÞक बिस्तार कार्य जारी है, इसके चलते कुछ स्थानीय लोग विरोध में उतर आए है। ऐसी अवस्था में स्थापित को पुनः उसी कार्य को लक्षित करके जिम्मेवारी सौपना अर्थपर्ूण्ा रूप में लिया गया है। क्योंकि माओवादी सरकार ने एमाले के कार्यकर्ता को बहुत बडÞी जिम्मेवारी दी है। काठमांडू के विकास के लिए स्थापित की योजना सुननेवाले कुछ नेता लोग ही उन को पागल कहते थे। लेकिन उन लोगों को अभी आकर पता चल रहा है कि स्थापित की बातों में कुछ दम था।
पछिलीबार पार्टर्ीी राजनीति से लगभग सन्यास ले चुके स्थापित घर में चुपचाप नहीं बैठे थे। दैनिक ध्यान, नृत्य, आर्ट जैसे अन्तरनिहित कला और अभियान में सक्रिय रहे स्थापित ‘शून्य सूत्र अभियान’ नाम देकर विभिन्न गतिविधि सक्रिय थे। ऐसी ही अवस्था में प्रधानमन्त्री डा. भट्टर्राई ने स्थापित को विकास प्राधिकरण का प्रमुख बना दिया है। काठमांडू को रातों-रात हरियाली करना, बागमती और विष्णुमति में स्वीमिङ के योग्य पानी बहाना, काठमांडू का सडकजाम पर्ूण्ा रुप से हटाना जैसे सपने देखानेवाले स्थापित अभी उसी जिम्मेवारी पूरा करने के लिए सक्रिय हे। देखना है, वे कितना कर पाते है – और लोग कितना करने देते है – ±±±

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