पूर्व सीएम मांझी ने बोला नीतीश पर हमला, कहा- कुचक्र कर मुझे सीएम से हटाया

पटना{मधुरेश प्रियदर्शी} – बिहार की राजनीति इन दिनों आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर रही है। पहले श्याम रजक और उदय नारायण चौधरी अब इसके बाद हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने भी दलित कार्ड खेलते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा हमला किया है। मांझी ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें कुचक्र रचकर कुर्सी से हटाया। बिहार में दलितों का नेता बनने की इन दिनों होड़ मची हुई है। यही कारण है कि रजक व चौधरी के बाद अब मांझी ने सीधा हमला बोल दिया है। मांझी ने कहा है कि दलितों की स्थिति आजादी के 70 साल बाद भी नहीं बदली है। वे जहां और जिस स्थिति में थे वैसा आज भी है और उनका शोषण उसी प्रकार हो रहा है। मांझी के इस बयान के बाद अभी तक जदयू की ओर से कोई बयान नहीं आया है। मांझी शुक्रवार को रोहतास के कोचस में आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। मांझी ने कहा दलितों की राजनीति में भागीदारी को रोटी के टुकड़े से तुलना की और कहा कि हमें इसे त्यागना होगा, तभी यह समाज आगे बढ़ सकता है। समाज एकजुट नहीं था इसलिए ही नीतीश कुमार ने उन्हें कुचक्र रचकर सीएम की कुर्सी से हटा दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री सरकार पर हमला करते हुए कहा कि बिहार में बेरोजगारी बढ़ रही है। इसलिए बेरोजगारों को भत्ता मिलनी चाहिए। उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल की चर्चा करते हुए कहा कि हमने सभी जातियों के गरीबों के लिए मुफ्त शिक्षा की बात कही थी और इसके लिए योजना भी तैयार की थी, जिसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। क्योंकि बिहार के सीएम नहीं चाहते कि यह योजना लागू हो और गरीब शिक्षित बेरोजगार हम के समर्थक बन जाएं। उन्होंने कहा कि उनकी लोकोपयोगी योजनाओं के चलते ही नीतीश कुमार डर गए और उन्हें कुर्सी से हटाने का षडयंत्र रचा। मांझी ने बताया कि उनकी योजना 46 हजार सफाई मित्रों को बहाल करने की थी, जिसे 20 से 25 हजार रूपये वेतन मिलता। लेकिन इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मांझी ने दलित एवं अनुसूचिति जाति के लिए अलग से जनगणना करने की मांग करते हुए कहा कि इसे पूरा कर जनसंख्या को सार्वजनिक किया जाय, ताकि पार्टियों को इस समाज के औकात का पता चल सके। पूर्व सीएम ने कहा कि हमने सभी जातियों के गरीबों के उत्थान की बात की थी और नारा दिया था कि बिहार के सभी गरीब एक हों, नहीं तो राजनीतिक दल उन्हें खत्म कर देंगे।
मांझी की इस गर्जना के बाद राजधानी पटना मेंं इसके कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि वे एक तीर से कई शिकार कर रहे हैं। उन्हें यह दिखाना है कि वे दलितों के सबसे बड़े हिमायती हैं। उन्हें डर है कि कहीं उनकी जगह श्याम रजक व उदय नारायण चौधरी नहीं ले लें। दूसरी ओर विश्लेषकों का कहना है कि मांझी चाहते हैं कि रजक व चौधरी उनके साथ आ जाएं ताकि अनुसूचित जाति का एक मजबूत संगठन खड़ा हो सके। मांझी को डर है कि अगर दलितों का उन्हें समर्थन नहीं मिला उन्हें अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा तवज्जो नहीं देगी। सूत्र बताते हैं कि मांझी लालू प्रसाद के संपर्क में भी हैं, हालांकि उनकी पार्टी के नेता इससे इंकार करते हैं। राजनीतिक गलियारे में जारी चर्चा के मुताबिक मांझी को पिछले चुनाव के दौरान लोजपा के मुकाबले काफी कम तवज्जो दी गई थी, जिससे वे नाराज बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर गठबंधन के सहयोगी भाजपा को भी वे यह दिखलाना चाहते हैं कि वे दलितों के नेता के रूप में ज्यादा पॉपुलर हैं।

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