पोखरा विमानस्थल पर चीन की दृष्टि

पोखरा क्षेत्रीय अन्तर्राष्ट्रीय विमानस्थल निर्माण ठेक्का प्रक्रिया के विषय में एक भारतीय अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित लेख प्रति चीन ने नेपाल समक्ष गम्भीर जिज्ञासा व्यक्त किया है । ‘द टाइम्स ऑफ इन्डिया’ में प्रकाशित लेख में चिनियाँ कम्पनी एवं एमाओवादी शीर्ष नेताओं के बीच आर्थिक अनियमितता की ओर संकेत किया है । दैनिक में भारतीय गुप्तचर का हवाला देते हुए कहा है कि अध्यक्ष पुष्पमकमल दाहाल, अर्थमन्त्री वर्षमान पुन का नाम उल्लेख करते हुए माओवादी और चीन बीच का सम्बन्ध इस नगदी आर्थिक कारोबार से और भी मजबूत हुआ है । चिनिया कम्पनी प्रलोभन दिखाकर नेपाल की प्रमुख परियोजनाएँ प्राप्त करने की नीति को उक्त घटना पुष्टि करती है । ऐसी दावा समेत दैनिक अंग्रेजी करती है । ऐसी दावा सहायक सम्वाद भारती जैन द्वारा लिखित लेख ८ अक्टूबर में प्रकाशित हुआ था ।
चीन गम्भीर आपत्ति प्रकट करते हुए कहा है कि ऐसे अनर्गल प्रचार से दोनों देशों के बीच स्थित सुमधुर सम्बन्ध पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पडेÞगा । यथाशीघ्र पोखरा अन्तर्राष्ट्रीय विमानस्थल का निर्माण शुरु हो, ऐसी चीन की ईच्छा है । कारण ज्यों ज्यो समय लम्बा खीचेगा, त्यों त्यो लू पोल खुलता जाएगा । नेपाल के विषय में चिनिया पुराना विश्लेषक बाङहोङ वेई ने इस समाचार को निराधार बताया है । इस समाचार का खण्डन वेवपत्रिका खिना डटकम में भी किया है ।
भारतीय दैनिक ने लिखा है कि पोखरा निर्माण सन्दर्भ में आर्थिक अनियमितता के कारण ही १८ करोड़ अमेरिकी डॉलर के बदले ३० करोड़ ५० लाख पहुँचाया गया है, इसी कारण निर्माण कार्य रोका गया । पर माओवादी ने इसके विरुद्ध जनता को उकसाकर सरकार पर दबाव डालने की कोशिश किया । इस सन्दर्भ में माओवादी की ओर से कोई टिप्पणी सार्वजनिक नहीं किया गया है । इस समाचार में उक्त नेता त्रय के साथ भारत के प्रति नरम दिखाई देनेवाले कार्यकारी प्रमुख प्रधानमन्त्री भट्टराई को समावेश लेख में नहीं किया है ।
चीन अध्ययन केन्द्र का उपाध्यक्ष विश्वेश्वरमान श्रेष्ठ ने भारतीय ठकेदारवाली कम्पनियों में भी अनियमितता होने की बात बताया । उसने कहा कि ठेक्का किसको दिया जाए, यह बात तीसरे देशों से सम्बन्धित नहीं है । चीन अध्ययन केन्द्र का सदस्य तथा पूर्व राजदूत हरिण्यलाल श्रेष्ठ ने विमानस्थल परियोजना नेपाल की आवश्यकता बताते हुए इस सन्दर्भ में तीसरे पक्ष द्वारा दुष्प्रकट कर भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए ।

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