प्यार बांटने का त्यौहार हैं इद, जानें ईद–उल–फितर के यें दिलचस्प बातें और महत्व


हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, २६ जून ।
रमजान माह की इबादतों और रोजे के बाद ईद–उल फितर का त्योहार जबरदस्त रौनक लेकर आता है । रमजान के महीने की आखिरी दिन जब चांद का दीदार होता है तो उसके बाद वाले दिन को ईद मनाई जाती है । इस बार यह त्योहार देश भर में आज मनाये जा रहे हैं । ईद का चांद रविवार को दिखा गया था इस लिए आज नेपाल लगायत भारत मे भी ईद मनाई जा रही हैं ।

ईद की अहमियत
माह–ए–रमजान में रोजेदारों ने रोजे रखने, पूरे महीने इबादत करने और गरीबों की मदद करने में कामयाबी पाई, ईद उसका भी जश्न है । ईद के रोज जो नमाज पढ़ी जाती है, वो बंदो की तरफ से अल्लाह को धन्यवाद होती है कि उसने उन्हें रोजे रखने की तौफीक दी ।

ईद अल्लाह से इनाम लेने का दिन है । इस मुबारक दिन मुस्लिम समुदाय को लोग लजीज पकवान बनाते हैं । वह नए कपड़े पहनकर मस्जिद नमाज पढ़ने जाते हैं । नमाज के बाद सभी लोग गिले–शिकवे भूल कर एक दूसरे के गले लगते हैं और ईद की बधाई देते हैं ।

ईद–उल–फितर नाम क्यों पड़ा
इस त्योहार का नाम ईद–उल–फितर इसलिए पड़ा क्योंकि ईद के दिन नमाज से पहले सभी मुस्लिम फितरा अदा करते हैं । जकात भी निकालते हैं । फितरे का अर्थ है– सुबह निर्धन एवं फकीरों को पैसे की शक्ल में फितरे की रकम देना । कहा जाता है कि दान या जकात किए बिना ईद की नमाज नहीं होती ।

मुस्लिमों के पाक महीने रमजान के ३०वें दिन आखिरी रोजा के बाद चांद देखकर ईद मनाने की परंपरा है । माना जाता है कि रमजान माह के दौरान ही कुरान का अवतार हुआ था । इसलिए इस माह कुरान अधिक पढ़ी जाती है ।

रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है । इस महीने के खत्म होते ही १०वां माह शव्वाल शुरू होता है । शव्वाल माह की पहली चांद रात ईद की चांद रात होती है । ईद का आना ही शव्वाल माह की शुरुआत होती है ।

रमजान में मुस्लिम समाज द्वारा रोजा, तरावीह और तिलावते कुरआन के माध्यम से विशेष इबादतें की जाती हैं । मुस्लिम विद्वानों के मुताबिक, रमजान का पवित्र महीना मुसलमानों की जीवन शैली में सुधार और संतुलन स्थापित करने का भी अच्छा माध्यम है ।

रोजा का महत्व
रोजा आपसी भाईचारे को बढ़ाता है । रमजान में सामूहिक रोजा इफ्तार के माध्यम से अपने पास–पड़ोस के लोगों के साथ बैठने का मौका मिलता है, जिससे पारस्परिक संबंधों में प्रगाढ़ता आती है । मुस्लिम विद्वानों के मुताबिक, रोजा एक ऐसी इबादत है जिससे रोजेदार के अंदर मानवता का भाव उत्पन्न होता है और उसका शरीर निरोग एवं स्वस्थ रहता है ।

 

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