प्रचण्ड को फूलमाला से स्वागत और माधव नेपाल के ऊपर पत्थरबाजी, क्यों ?

प्रचण्ड मधेशी जनता के साथ बैठ कर चाय पी रहे थे तो माधव नेपाल अपनी जान बचाने के लिए पुलिस से सहयोग मांग रहे थे । इस के पीछे क्या कारण है ?


आरएन यादव
काठमांडू, १६ भाद्र । प्रदेश नं. २ में चुनावी माहौल बढ़ता जा रहा है । हर राजनीतिक पार्टी दूसरे पार्टी से नेता÷कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी में प्रवेश करा रहे हैं । कोई टिकट के लिए काठमांडू में हैं तो कोई चुनावी रणनीति और प्रचार–प्रसार के लिए फिल्ड में गए हैं । मधेश आंदोलन, संविधान संशोधन, मधेशवादी राजनीतिक शक्ति आदि विषयों को लेकर २ नं. प्रदेश चर्चा में है । जिसके चलते इस चुनाव में नेकपा एमाले और विशषतः मधेश केन्द्रित राजनीतिक पार्टियों की चर्चा ज्यादा है । वैसे तो नेपाली कांग्रेस, संघीय समाजवादी फोरम तथा फोरम लोकतान्त्रिक के बारे में भी चर्चा–परिचर्चा हो रही है, लेकिन राजपा और एमाले के तुलना में कुछ कम ही है । ऐसे ही माहौल में पिछली बार माओवादी केन्द्र का चर्चा–परिचर्चा भी २ नं. में बढ़ने लगी है । चुनाव लक्षित कार्यक्रम को लेकर फिल्ड में जाने वालों में से नेकपा एमाले और माओवादी केन्द्र आगे दिखाई दिया है । लेकिन एमाले के नकारात्मक चरित्र के कारण वह आगे नहीं बढ़ पा रहा है ।


माओवादी केन्द्र २ नं. प्रदेश में आक्रमक हो रहा है । माओवादी ने चुनावी प्रचार–प्रसार तो आक्रमक बनाया ही है, उसके साथ–उसने विभिन्न अन्य पार्टियों से प्रभावशाली नेताओं को भी अपनी पार्टी में प्रवेश करवाया है । जिसके चलते माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष प्रचण्ड आसानी से तराई–मधेश में चुनावी कार्यक्रम कर रहे हैं । लेकिन वहीं नेकपा एमाले के लिए चुनावी कार्यक्रम करना मुश्कील हो रहा है । गत मंगलबार–बुधबार की बात करते हैं तो उस दिन धनुषा में प्रचण्ड को स्वागत हो रहा था और एमाले नेता माधवकुमार नेपाल के ऊपर पत्थरबाजी हो रही थी । प्रचण्ड मधेशी जनता के साथ बैठ कर चाय पी रहे थे तो माधव नेपाल अपनी जान बचाने के लिए पुलिस से सहयोग मांग रहे थे । इस के पीछे क्या कारण है ?

इसके पीछे एक ही कारण है, मधेश के प्रति एमाले के रवैया । वीरगंज महानगरपालिका के उम्मेदवार के साथ चुनावी प्रचार में रहे एमाले नेता नेपाल को अपनी जान बचाने के लिए पुलिस का सहारा लेनी पड़ी थी । ऐसी ही हालात जनकपुर में भी हुआ है । संविधान संशोधन के लिए तैयार न होना, मधेश के विरुद्ध अनेक प्रचारबाजी करना, शहिदों को आंम की संख्या देना, मधेशी जनता को बिहारी देखना, एमाले का चरित्र बन गया है । जिसके चलते आज मधेश के जन–जन में एमाले–विरुद्ध की भावना जागृत हो रही है । इसीलिए एमाले चुनावी कार्यक्रम को लेकर वहां नहीं जा पा रहा है ।
अब देखना यह है कि राजपा किस तरह चुनावी प्रचार में जाएगा ! अभी तक तो राजपा उम्मीदवार तय नहीं किया है । उम्मीदवार तय होने के बाद राजपा भी चुनावी प्रचार में निकल आएगी । उसके बाद प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी नेकपा एमाले और राजपा आमने–सामने होगी । उसके बाद वातावरण कैसे होगा, यह तो कुछ दिन के बाद ही पता चलेगा ।

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