प्रचण्ड का दो तिहाई बहुमत एक सपना मात्र

NEPAL-POLITICS-MAOIST कुमार सच्चिदानन्द सिहं, एकीकृत नेकपा माओवादी के अध्यक्ष श्री पुष्पकमल दाहाल अपनी चुनावी सभाओं में संविधान–निर्माण के लिए दो तिहाई बहुमत की माँग करते है । देश की सबसे बड़ी पार्टी और तथाकथित सर्वाधिक ताकतवर नेता होने के कारण वे इससे कम माँग भी क्या सकते हैं, मगर ये बात उन्हें और ऐसा सपना देख रहे नेताओं को भली भाँति समझनी चाहिए कि विगत की लोकतांत्रिक यात्रा में जिस अपरिपक्वता का परिचय हमारे देश के राजनैतिक दलों और इसके नेताओं ने दिया है उसमें किसी भी दल को दो तिहाई का बहुमत ‘बन्दर के हाथ में अदरक’ की कहावत चरितार्थ करेगी । यह भी महत्वपूर्ण है कि आगामी चुनाव राजनैतिक दलों और नेताओं की दृष्टि से चाहे जो हो और उनकी महत्वाकांक्षाएँ चाहे जितनी हो मगर जनता की दृष्टि से यह विकल्पहीनता का चुनाव है । विगत के कार्यकाल में कोई भी दल आम मतदाता के समक्ष आदर्श प्रस्तुत नहीं कर सका है । लेकिन उनके पास विकल्प नहीं है इसलिए उनका मत कहीं न कहीं दान तो होगा ही । लेकिन यह मनोविज्ञान किसी भी दल को दो तिहाई की बात तो दूर सामान्य बहुमत भी दिलाने की स्थिति में नहीं है । यह सच है कि संविधानसभा का गणित बदलेगा मगर किसी भी दल के पक्ष में इतना झुकने की संभावना नहीं है जिससे वह संविधानसभा के भीतर मस्ती का राग आलाप सकें । यद्यपि यह उनकी अच्छी रणनीति है कि वे संविधान निर्माण के लिए दो तिहाई बहुमत की माँग आम लोगों से कर रहे हैं क्योंकि अगर संविधान नहीं बना तो वे इस असफलता का ठीकरा उन्हीं मतदाताओं पर फोड़ सकते हैं, जो उनसे संविधान न बन सकने के कारण जानना चाहेंगे । मानना चाहिए कि उनकी सोच दूरदर्शी है । कुमार सच्चिदानन्द सिहं

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