प्रचण्ड द्वारा मन्त्रीमंडल विस्तार रणनीति है या नियत मे खोट ? अमरदीप मोक्तान

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अमरदीप मोक्तान , डाडा खर्क ,दोलखा, ८ माघ | प्रचण्ड सरकार द्वारा  पेश किया गया  संबिधान संसोधन पारित कराने की  रणनीति तहत प्रचन्ड ने  एक सिट  वाली  पार्टी के मन्त्री बनाए है | लेकिन   एक सीट  वाली पार्टी समाजवादी  जनता पार्टी और  अखण्ड नेपाल पार्टी के अध्यक्ष  प्रेम बहादुर सिंह और  कुमार खडका को मन्त्री बनाकर  प्रचण्ड ने समावेशी  समानुपातिक वर्गीय जातीय. लिंगीय, क्षेत्रिय ,विशेष कर  महिला ,आदिवाशी के प्रति घोर विरोधी होना  जगजाहेर है |
नेपाली जनता के सामने प्रचण्ड   के जातीय क्षेत्रिय लिंगीय वर्गीय अभिव्यक्ति  आदिवाशी जनजाती दलित मधेशी मुसलमान को  मुर्ख बनाना और ठगने के अलावा कुछ नही है यस स्पष्ट  हो चुका  है  | प्रचण्ड मन्त्रीमंडल  विस्तार के साथ एक बात प्रमाणित हो गई है कि  नेपाल की राजनीति मे तहल्का मचाने वाले शक्तिशाली राजनैतिग्य का  नाम लिया  जाए तो एक है अमरेश कुमार  सिंह जिन्होने अब तक न तो मन्त्रीपद प्राप्त किया है न तो काँग्रेस के प्रभावशाली पद मे है लेकिन राजनैतिक प्रभाव के मामले मे अमरेश सिंह की तुति बोलती है | भले हि एक सीट ही क्यो न हो  किसी पार्टी की सरकार  बने लेकिन बारम्बार मन्त्री पद पर समाजवादी जनता दल के  अध्यक्ष प्रेम बहादुर सिंह  सोभायमान होने वाले भाग्य्वान है एक सीट होते हुए भी प्रेम बहादुर सिंह को आग्रह पुर्वक  बुला कर मन्त्रीपद पारोसा जा रहा है जो नेपाल की जनता स्वयम् देख रही है इसका अर्थ यह है कि   समाजवादी जनता दल के  अध्यक्ष प्रेम बहादुर सिंह भी नेपाल के  शक्तिशाली नेता के श्रेणी मे आते है  |
प्रचण्ड द्वारा किए गए   मन्त्रीमंडल विस्तार और मन्त्री चयन  से एक बात प्रमाणित हो चुकी है कि   नेपाल कि  राजनीति मे  सिद्धान्त की बाते केवल  जनता को मुर्ख बनाने , द्वन्द मचाने  और अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए मात्र है इसके अलावा कुछ नही | समाजवादी जनता दल के  दल दर्ता खारेज  सम्बन्धि  मुद्दा विचाराधीन अवस्था होते हुए और  निर्वाचन आयोग द्वारा  दर्ता खारेज किए गए  दल के  नेता को  मन्त्रीमंडल विस्तार कराते समय स्थान देना उचित है या नही इतनी छोटी बातो की  बुद्धिमता न होने वाले  व्यक्ति से  राष्ट्र को समृद्धि मार्ग मे ले जाएंगे यदि कोई ऐसा सोचता है तो यह सबसे बडी मुर्खता एवं भ्रम ही होगा |  आज नेपाल जिस प्रकार के कठिन और  विषम परिस्थिति में खडा है इसके प्रमुख पात्रो मे प्रचण्ड भी एक है | अद्भुत बात  यह है  एक सिट वाली  पार्टी समाजवादी जनता दल के अध्यक्ष  तथा नेता प्रेम बहादुर सिंह नेपाल के  करिश्मायी नेता की उपाधि से विभूषित होने वाले नेता के श्रेणी मे आते है जो भी पार्टी सत्ता मे आए  प्रेम बहादुर सिंह बारम्बार मन्त्री होना यह प्रमाणित करता  है कि  नेपाल के सर्वाधिक शक्तिशाली नेताओ मे एक नाम प्रेम बहादुर सिंह भी  है | सिंह की  अपार  शक्ति और  पहुच ही कहना पडेगा कि एक सिट होते हुए भी  माधव नेपाल मन्त्रीमंडल मे  कानुन तथा न्याय मन्त्री बने और खड्ग ओली ने तो  प्रेम बहादुर  सिंह को मन्त्री बनाने के लिए  सहरी विकाश मन्त्रालय का  बिभाजन कर  खानेपानी तथा सरसफाई नाम का  नया मन्त्रालय बनाकर मन्त्री बनाया ,वर्तमान प्रचण्ड की बात करे तो   संबिधान संसोधन  पारित करने की  संख्या म कुछ  तात्विक फरक नही पडेगा ऐसा जानते हुए भी   प्रधानमन्त्री प्रचण्ड ने जातीय वर्गीय क्षेत्रिय लिंगीय समानुपातिक समावेशी नारा को रद्दी की टोकरी मे फेक कर   पुनः प्रेम बहादुर सिंह को  खानेपानी तथा सरसफाई मन्त्री बनाना प्रेम बहादुर के शक्तिशाली होने का प्रमाण है |  
मन्त्रीमंडल विस्तार के सम्बन्ध मे  सरकार के  प्रवक्ता सुरेन्द्र कार्की ने  मुद्दा मिल्ने के कारण छोटे दल से मन्त्री बनाया गया है कहकर स्पष्टिकरण देना मुर्ख बनाना है |क्या  वास्तव मे  समाजवादी जनता दल और  अखण्ड नेपाल पार्टी से  माओवादी कांग्रेस गठबन्धन के  मुद्दा तथा विचार मिलते है  ? किसको मन्त्री बनाना  या न बनाना  प्रधानमन्त्री के  क्षेत्राधिकार की बात है लेकिन  नेमकिपा होते हुए  एमाले बन्नेवाले  , राजा ज्ञानेन्द्र के  सत्तापलट पश्चात  राजा के पक्ष मे वकालत करने वाले, गणतन्त्र पश्चात पुनः एमाले मे वापस का प्रयाश  करने  पर   जब  एमाले ने स्थान देना इन्कार कर दिया तो स्वयम् का दल दर्ता कर  ३० दलीय विपक्षि गठबन्धन के  प्रवक्ता  पद हथियाने मे सफल  सिंह को  मन्त्री  बनाने के लिए क्यो आतुरता दिखायी प्रचण्ड ने सोचनीय विषय है | रंग परिवर्तन करने वाले छिपकली प्रबृति के  माहिर राजनतिक  खेलाडी प्रेम बहादुर सिंह  प्रचण्ड  प्रिय कैसे बन गए ?  गणतन्त्र विरोधी को रुप मे ख्यातिप्राप्त नेता जिन्होने  खस क्षेत्री एकता समाज मार्फत जनजाती आदिवाशी बिरोधि अभियान की  अगुवाई करने वाले  अखण्ड नेपाल पार्टी के  कुमार खड्का को  महिला तथा बालबालिका मन्त्री बनाकर  प्रचण्ड नेपाली जनता  को क्या संदेश देना चाह्ते है ?
प्रचण्ड नेतृत्व   माओवादी काँग्रेस गठबन्धन के मन्त्री मण्डल गठन होते समय  किसी भी कोण से  समावेशी नही था दुसरी बार  मन्त्रीमंडल  विस्तार मे आदिवाशी दलित मधेशी को  राज्यमन्त्री अर्थात् पिछे की बेञ्च मे बैठने वाले  छात्र बनाकर मुह बन्द करने की कोशिश की गई और तिसरी बार के मन्त्रीमंडल विस्तार मे छोटे दल के नाम पर  दो छेत्री अर्थात् क्षत्रिय को मन्त्री बनाकर बाहर जिस भाव मे प्रस्तूत हो लेकिन हृदय से  प्रचण्ड  घोर साम्प्रदायिक असामावेशी आदिवाशी दलित मधेशी विरोधी होने कि पुष्टि होती है | प्रचण्ड के हाल तक के राजनैतिक यात्रा के सम्बन्ध को यदि देखा जाय तो प्रचण्ड  एक वाकपटु, नीतिविहीन, छ्द्म्वेशी ,बहुरुपिया ,झुट्टा और  तराई के एक  चर्चित शब्द थेथर (लोक ,लाज विहिन )  है यह क्रमसः  उजागर हो रहा है | सेरेमोनियल राजा बनायेगे कहकर राजा को बेवकुफ बनाया , गिरिजाप्रसाद कोइराला, माधव नेपाल को  राष्ट्रपति बनायेंगे कहकर धोका दिया  । आदिवासी, मधेसी, सुशील कोइराला को  प्रधानमन्त्री बनायेंगे कह्कर मुर्ख बनाया हालाकि बाद मे शुशिल कोइराला पार्टी के बल बुते पर प्रधानमन्त्री बने  ।  बाबुराम भट्टराई के  बाहिर्गमन के लिए   स्वतन्त्र व्यक्ति के नाम पर  प्रथम संबिधान सभा की हत्या का वातावरण निर्माण करने वाले  सर्वोच्च के  मुख्य न्यायधिश खिलराज रेग्मी का नाम प्रस्ताव करना और कांग्रेस, एमाले को नतमस्तक कराते हुए  अन्ततः खिलराज रेग्मी को प्रधानमन्त्री बनाकर ही छोडा वही  खिलराज रेग्मी ने (अदालत द्वारा अख्तियार प्रमुख आयुक्त का लिये अयोग्य साबित किए गए )  लोकमानसिंह  कार्की को अख्तियार प्रमुख बनाया  | प्रचण्ड के  कारण न्यायपालि पर कभी न मिटने वाला काला   धव्बा लगा था  । न्यायपालिका की  गरिमा तथा निष्ठा तथा साख को भी कलंकित किया है प्रचण्ड ने ।
प्रचण्ड की हठधर्मिता और  अदुरदर्शीता से नेपाल किस दिशा की ओर उन्मुख हो रहा है यह पता नही है लेकिन एक बात तो स्पष्ट है   प्रचण्ड के  कारण  नेपाल राष्ट्र  प्रचण्ड कष्ट   दुख और पीडा  पथ पर क्रमिक रुप मे आगे बढ रहा है  | कहावत है  गलत नियत तथा व्यक्तिवादी  चरित्र वाले  व्यक्ति का कोइ  जात ,धर्म, आदर्श ,नीति, सिद्धान्त नही होता है लगभग वैसे  ही चरित्र वाले  प्रचण्डके  हात मे  नेपाल का  बागडोर होना  और नेपाल मे दिन प्रतिदिन घट रहे    बिभिन्न घटनाक्रम से  नेपाल भयङ्कर द्वन्दके   चक्रव्यूह मे फंसने का पूर्वानुमान है  | राष्ट्रभक्त जनता की  सचेतना से मात्र राष्ट्र को अघटन से बचाय जा सकता है  तसर्थ राष्ट्रभक्त जनता द्वारा घट रहे  बिभिन्न घटनाक्रम प्रति  खबरदारी करते हुए  सतर्कता के साथ  संयम का  प्रदर्शन करना बुद्धिमता होगी |
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