प्रजातंत्र में प्रेस स्वतन्त्रता (सन्दर्भ – प्रजातन्त्र दिवस) : विजय यादव

prjatantra divas

विजय यादव, काठमांडू, १८ फरवरी । प्रजातन्त्र में स्वतंत्र प्रेस का जिक्र हमेसा से होते आ रहा हैं । प्रजातंत्र के तात्पर्य जनता के लिए, जनता द्वारा निर्मित, जनता की सरकार है । प्रजातंत्र में जनता को अपनी सरकार चुनने का अधिकार होता है । चुनाव द्वारा जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है । चुनाव, प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर निर्भर करता है ।

प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था में स्वतंत्र प्रेस को एक पावन उत्तरदायित्व निभाना होता है । आज के दिन में समाचारपत्रों को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है । युद्ध हो चाहे शांति उनका प्रसार सदैव होता रहता है । आधुनिक युग में समाचारपत्र लोगों के लिए अधारभुत आवश्यता के समान जैसी जरुरत की वस्तु बन गया है ।

विश्व भर के लोग हर सुबह उत्सुकता से इसका इंतजार करते हैं । कुछ लोगों को तो समाचारपत्रों के बिना चाय बेस्वाद लगती है । कुछ व्यक्तियों को तो समाचारपत्रों में इतनी अधिक रूचि है कि वे अपने दिन का अधिकांश समय जीवन के अन्य अमूल्य पक्षों को भुलाकर इन्हें पढ़ने में बिता देते हैं ।

इसका मुख्य कारण यह है कि उनमें सूचनाएं और विचार इतने आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किए जाते हैं कि एक बार पढ़ना शुरू कर देने के बाद उसे बिना पूरा पढ़े छोड़ना असंभव हो जाता है । मुद्रण के आविष्कार से पत्रकारिता का उद्भव हुआ ।

प्रेस से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होते हैं । प्रेस जनमत तैयार करने का एक सशक्त साधन है । यह प्रचार करने का अमूल्य माध्यम है । समाचारपत्रों में जनमत तैयार करने की अद्भुत क्षमता होती है । इनमें जनता के विचारों को बदलने की क्षमता होती है । प्रचार शक्ति से जनता उत्तेजित हो जाती है और जनमत के सम्मुख व्यक्तिगत निर्णय की शक्ति विफल हो जाती है । यहाँ तक कि कुछ पढ़े–लिखे समझदार लोग भी भावनाओं के प्रवाह में बह जाते है ।

कुछ लोगों का कथन था कि यदि झूठ को भी दस या बीस बार बोला जाए तो वह सच बन जाता है । समाचारपत्रों के संबंध में यह कथन सही उतरता है । समाचारपत्रों के माध्यम से प्रचारित असत्य खबरें एवं सूचनाएं जनता को गुमराह और प्रभावित करने में समर्थ होती हैं । लोग बड़ी आसानी से उन्हें सच मान लेते हैं । यही कारण है कि आज समाचारपत्र राजनीतिज्ञों और अन्य सत्ताधारियों का सशक्त उपकरण बन गया है । वे अपने निजी स्वार्थो की पूर्ति के लिए उनका मनमाना प्रयोग करते है ।
स्वतंत्र प्रेस की अनुपस्थिति से शासन में विरोधी दल की भूमिका कुछ भी शेष नहीं रहेगी, इससे तानाशाही को बढ़ावा मिलेगा । स्वतंत्र प्रेस भ्रष्टाचार और सत्ताधारियों द्वारा सत्ता के गलत प्रयोग पर नियंत्रण रखती है । स्वतंत्र प्रेस का मुख्य दायित्व जनता के अधिकारों की रक्षा है ।
जनता के अधिकारों तथा स्वतंत्रता के हनन के किसी भी प्रयत्न के विरुद्ध अपनी शक्तिशाली आवाज बुलन्द करके समाचारपत्र जनसाधारण को प्रेरित करते है और सजग बनाते हैं । प्रेस सरकार, विरोधी दल और भ्रष्ट अधिकारियों के जनहित विरोधी कार्यो का भंडाफोड़ करती है । इस प्रकार यह देश में स्वच्छ नैतिक वातावरण तैयार करने की ओर सदैव प्रयत्नशील रहती है ।

देश में सही दृष्टिकोण उत्पन्न करने और राष्ट्रीय एकता के संबंध में स्वतंत्र प्रेस का योगदान बहुत अधिक होता है । इससे बंधुत्व और औद्योगिक शांति को नई राहें मिलती हैं । लेकिन सस्ती और भावनाओं पर आधारित पत्रकारिता राष्ट्रहित को हानी पहुँचाती है ।

इससे देश में वर्ग–संघर्ष और साम्प्रदायिक झगड़े हो सकते हैं । ऐसे ही कुछ समाचारपत्र मधेश जनविद्रोह मे भी पहाडी और मधेशी के बीच साम्प्रदायिक झगडा भडका के सैकडों जनता की बलिदानी का कारण बना था । वे समाचार पत्र हीं देश मे मधेशी और पहाडी बीच विभाजन लाकर रक्तपात करवाने के लिए उत्तरदायी हैं । वे समाचारपत्र ही जनता की भावनाओं से खेलते हुए कुछ रुपयों के लिए देश में राज्य से शोषित जनता अपने अधिकारों के लिए उठाइ गइ अवाजों को देशद्रोही के संज्ञा देकर मधेशी और पहाडी वीच के झगड़ों को भड़काया था ।

इसलिए प्रेस पर कुछ नियंत्रण की आवश्यकता महसूस की गई है ताकि यह देश और मानव कल्याण में बाधक न बने । पडोसी मुल्क भारत के महान व्यक्ति महात्मा गाँधी के विचार में प्रेस पर थोड़ा बहुत नियंत्रण आवश्यक है । उनके शब्दों में कहा जाय तो ‘प्रेस का प्रभाव क्षमता अद्भुत होती है, इसलिए यह अनियंत्रित नहीं होना चाहिए । जैसे नदी में आने वाला अनियंत्रित पानी आस–पास के क्षेत्र और फसल को नष्ट कर देता है उसी प्रकार अनियंत्रित कलम भी विनाश उत्पन्न कर सकती है ।’

सुव्यवस्थित रूप से लगाया गया नियंत्रण प्रभावकारी और शुभ परिणामदायक सिद्ध हो सकता है । प्रेस को स्वच्छ विचारों के प्रचार तक ही सीमित रहना चाहिए । प्रजातंत्र में प्रेस सदैव सद्भावनाओं सद्विचारों द्वारा संचालित होना चाहिए । पिछले कुछ वर्षो से प्रेस समसामयिक और ज्वलंत विषयों पर जो दृष्टिकोण अपना रखी है, वह प्रशंसनीय है । नेपाल प्रेस काउन्सिल लगायत क्षेत्र इस दिशा में सराहनीय प्रयास कर रही है ।

स्वतंत्र प्रेस का एक अन्य दायित्व प्रकाशित खबर या सूचना के पीछे की सच्चाई से अवगत कराना और विश्व की घटनाओं के संबंध में निष्पक्ष और तटस्थ विचार अभिव्यक्त करना है । प्रजातंत्र में जनमत को तैयार करने के लिए इस बात की बहुत आवश्यकता होती है । इस प्रकार प्रजातंत्र में स्वतंत्र प्रेस की सशक्त भूमिका होती है ।

loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz