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प्रदेश-२ : सरकार नें लाया दलितों के विकास के लिए ‘दलित सशक्तिकरण विधेयक २०७५’


हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, १ अगस्त ।
जनकपुरधाम : प्रदेश २ के सरकारद्वारा लाने बाले ‘दलित सशक्तिकरण विधेयक २०७५’ मे दलित विकास समिति के अध्यक्ष और स्थानीय जातीय विभेद तथा छुवाछुत अनुगमन समिति के अध्यक्ष मे गैर दलित भी होने कि व्यवस्था पर विरोध जताया हैं ।
दलित विकास समिति के अध्यक्ष सामाजिक विकास मन्त्रीको होने की व्यवस्था किया गया हैं तो वहि अनुगमन समिति के स्थानीय मेयर अथवा गाउँपालिका अध्यक्ष होने कि व्यवस्था किया गया है । उस प्रावधान के विरोध करते हुए दलित अगुवा सब समिति के अध्यक्ष दलित अधिकारकर्मी हि होना चाहिए, एैसा सुझाव दिया हैं । मंगलबार सप्तरी के दलित अगुवा सब से विधेयक के उपर राय सुझाव संकलन कार्य शुरु हुवा हैं ।
दलित सरोकार मञ्च नेपाल सप्तरी के आयोजना मे राजविराज मे सुझाब संकलन कार्यक्रम मे दलित सशक्तिकरण (विधेयक) ऐन मे दलित के हि सहभागिता नहीं हैं । ऐन मे नगरपालिका और गाउँपालिका स्तर मे गठन होने बाली स्थानीय जातीय विभेद तथा छुवाछुत अनुगमन समिति के अध्यक्ष मे मेयर और अध्यक्ष को प्रमुख बनाए जाने पर दलितों ने आपति जनाया हैं ।
राय सुझाव समिति गठन
प्रदेश २ के सरकार ने श्रावण १३ गते जनकपुर मे दलित अधिकारकर्मीयों को एकक्ठा कर के लाने लगे प्रदेश सरकार ने ‘प्रदेश नं.२ दलित सशक्तिकरण ऐन २०७५’ मे राय सुझाव देने के लिए आग्रह किया था ।

राय सुझाव संकलन के लिए भोला पासमान के संयोजकत्व मे ७ सदस्यीय समिति गठन किया हैं । समिति मे विनोद महरा, राज किशोर रजक, अम्बिका विश्वकर्मा, हरिनन्दन कुमार रजक, चन्देश्वर सादा, शान्ति पासमान शामिल हैं । समिति के सदस्य लिखित रुप मे राय सुझाव प्रस्तुत करेंगें ।

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