प्रधानमंत्री जी आखिर कितने सपने दिखाएँगे ?

प्रधानमंत्री जी Pm-Kp-Sharma-oli.png-1 आखिर कितने सपने दिखाएँगे ? काठमान्डौ
प्रकाश प्रसाद उपाध्याय

नेपाली जनता पिछले कई वर्षों से सपनों के दौर से गुजर रही है । उस पर जब सपने सुहाने हों तो क्या कहने । वह रात की गहरी नींद में दिखाई पड़े या दिन के वक्त हमारे बडेÞ बूढ़ों या नेताओं के द्वारा ही दिखाए गए क्यों न हो ।
नेताओं के द्वारा दिखाए गए सपनों की तो बात ही निराली होती है । उनके द्वारा निर्मित तानेबाने में जो आकर्षण होता है उससे तो दिल ही मचलने लगता है और उसे देखने वाले दीवाने हो उठते है । पर यथार्थ में वह सपने वे अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए ही बुना करते हैं और उसे यथार्थ में लाने के लिए जनता का सहारा (समर्थन लेते हैं चाहे चुुनाव का अवसर हो या आंदोलन का । जैसे कि माओवादियों के द्वारा जनयुद्ध काल में देश के विभिन्न जात–जातियों को दस वर्ष तक दिखाए गए सपनों से उन वर्गों का भविष्य कितना सुधरा या उन्हें क्या–क्या मिला वह तो वही लोग जानें जिन्हें सपने दिखाए गए थे । पर सपना दिखाने वालों का भविष्य जरुर सुधरा । वह जंगल से निकल कर राजधानी के महलों के निवासी बनने में सफल हुए, सभासद और मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक की कुर्सी उन्हें नसीब हुई, बड़ी–बड़ी गाड़ियों में यात्रा करने में सफल हुए और हवाई यात्रा तो उनके पॉकेट की बातें होने लगीं । पर उनके द्वारा दिखाए गए सपनों पर यकीन करते हुए उन्हें आँखे बंद कर समर्थन करने वाली जनता पुरानी शैली में ही नंगे पैर सिर या कंधों पर बोझा उठाते हुए, रिक्सा खिंचते हुए या सड़कों पर पत्थर फोड़ते हुए श्रमजीवी जीवन बिताने को वाध्य होती रही । समान रूप से मधेस आंदोलन के समय पर दिखाए गए सपनों ने भी कितनों का भला किया यह तो हम जान नही पाए पर इस अवधि में देहाड़ी से वंचित होने वाले, स्कूल–कॉलेज न जा पाने वाले बच्चे और युवक–युवतियाँ या दाल और सब्जी के बिना की रोटी खाने वालों को क्या मिला वही जानें पर नेतागण को अपनी तनाव मिटाने के लिए फाइव स्टार होटल के स्वादिष्ट भोजन का सहारा अवश्य मिला । अब हमारे प्रधान मंत्री जी भी सपना बाँटने में लग रहे हैं । अब देखना है कि उनके द्वारा दिखाए जाने वाले सपने कब पूरे होते हैं और नेपाली जनता के दुःख दर्द को मिटाने और उनके जीवन को सुखमय बनाने एवं भविष्य को सँवारने में कितने सहायक होते हैं ।
बातें प्रधान मंत्री के द्वारा दिखाए गए सपनों की है, जो मनमोहक और चिताकर्षक है और यत्र तत्र सर्वत्र चर्चा का विषय बना है । अतः जब तक यह यथार्थ रुप नही ले लेता तब तक इसका काल्पनिक आनंद उठाने में क्या हर्ज है । यदि कुछ हासिल नही होता तो घाटे की अनुभूति नही होगी और हाथ पैर भी सलामत रहेंगे । फिर इस दौर में कुछ समय कल्पना लोक में विचरण करते हुए हम सुहाने सपनों का सुख तो प्राप्त कर ही चुके होंगे । है न ?

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