प्रिभेन्सन इज बेटर दि केयर

बारा जिला सदरमुकाम कलैया निवासी होते हुए भी डाक्टर केशव अग्रवाल की स्कुली शिक्षा दर्जालिङ के खस्र्याङ में हुई है । उन्होंने दिल्ली से ११ और १२ की पढ़ाई पूरी की है । उन्होंने एमबीबीएस पोखरा के मणिपाल कॉलेज किया है और नेशनल एकेडेमी आफ मेडिकल साइन्स (नेम्स) से बालविशेषज्ञता हासिल की । अभी गर्मी का मौसम शुरु हो रहा है, बालबच्चे ज्याद बीमार पड़ रहे हैं । हर माँ सोचती है कि बच्चे को कैसे सुरक्षित रखा जाए ? इसी सन्दर्भ को लेकर पिछले १३ वर्षों से अग्रवाल नेपाल आर्मी में कार्यरत डा. अग्रवाल से कविता दास से की गई बातचीत का सम्पादित अंश–
० गर्मी के मौसम में अक्सर बच्चे बीमार पड़ते हैं, इसका क्या कारण है ?
– गर्मी के मौसम में सामान्यतया बढ़ते तापमान स्वास्थ्य और सफाई के बारे में कम जानकारी तथा मच्छड़ों से होनेवाली बीमारी देखी जाती है । खासकर टाइफाइड, डिसेन्ट्री, फुटप्वाइजन, चरम रोग, डाइरिया, डेंगु, जापनीज इन्सेफाइटिज इत्यादि बीमारी के कारण बच्चे बीमार पड़ते है । इसका कारण इस प्रकार है–

बच्चे गर्मी के मौसम में ज्यादातर बाहरी वातावरण में खुले रूप से आते हैं ।

 हाथ की सफाई के प्रति जागरुक नहीं होते हैं ।

प्रदूषित जल का सेवन करते हैं ।

देर तक खुला रखा भोजन का प्रयोग (गर्मी के मौसम मे तापमान बढ़ने से व्याक्टेरिया बढ जाता है) ।

पसीना ज्यादा आने से अनेक चर्म रोग की सम्भावना होती है ।

तरल पदार्थ का कम सेवन करते हैं ।

 अनेक रोग के सम्वाहक मच्छड़, मख्खियाँ, ककरोज इत्यादि का आयात बढ़ जाता है ।
 इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए ?

इससे बचने के लिए स्वस्थ भोजन एवं जल का सेवन करना चाहिए ।

खाना खाने से पहले और शौचालय के बाद अच्छी तरह से साबुन पानी से हाथ धोने की आवश्यकता है ।

पर्याप्त मात्रा में जल पदार्थ का सेवन करना चाहिए ।

 खाद्यन्न वस्तु को सफाइ से और सुरक्षित से रेफ्रिजेरिटर में रखना चाहिए ।

हाथ धोना, नहाना, समय–समय पर बच्चों के नाखुन को काटना चाहिए ।
० अन्य सामान्य अवस्था में बच्चों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकते है ?
– खुले में रखे खाद्यान्न पदार्थ का सेवन बच्चे के लिए हानिकारक है । बीमारी फैलाने वाले कीडेÞ मकौड़े, ककरोज, मख्खी, मच्छड़ मारने के लिए कीटनाशक औषधि का प्रयोग करना चाहिए ।
० जब नवजात शिशु का जन्म होता है, उसके बाद से ही विभिन्न प्रकार का इन्जेक्सन लगाया जाता है, यह क्रम साल÷डेढ साल तक चलता रहता है । उसके बाद भी विभिन्न नये–नये इन्जेक्सन की बात होती रहती है, यह सब किस लिए ?
– टीकाकरण से बीमारियों को रोका जा सकता है पर यह खुद में बीमारी का उपचार नहीं है । टीकाकरण के बाद इम्युनिसिस्टम सक्रिय हो जाता है और एन्टिबडी का उत्पादन होता है । इसीलिए जब कोई बच्चा कोई खास बीमारी से पीडि़त होता है तो पहले से बनाया एन्टिबडिज को शरीर में इन्जेक्ट किया जाता है । जो शरीर पर भाइरस और व्याक्टेरिया पर आक्रमण करता है और उनकी संख्या नहीं बढ पाती है और इन्फेक्सन भी नहीं होता है ।
इसीतरह खास भ्याक्सिनेसन, खास बीमारी के लिए दिया जाता है । मेडिकल साइन्स में नवीनतम अनुसन्धान होते रहते हंै और नयी–नयी बिमारी के लिए नयी भ्याक्सिन का इजात होता रहता है । टीकारण से बच्चे के शरीर में रोगप्रतिरोध शक्ति बढ़ जाती है । जिसके चलते वह अनेक बीमारी से बच सकते हैं । यह पहले की ही कहावत है– प्रिभेन्सन इज बेटर दि केयर ।

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