Tue. Sep 18th, 2018

“प्रेम से वंचित हो रहे है प्रेम के फूल ” : पूजा गुप्ता “नेपाल “

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पूजा गुप्ता “नेपाल “, दुहबी १८ पूस | दुनिया के हर बच्चे का जन्म माँ की गर्भ से होता है औऱ पिता की आत्मा उसमे समाहित होता है शायद इसलिए बच्चे कॊ आत्मज कहा जाता है । भगवान ने भी जाने कौन सी दुनिया की हर माँ कॊ शोहरते अता कर दी है कि अगर चोट अगर बच्चे कॊ लगे तो दर्द माँ कॊ होता है भुख अगर बच्चे कॊ लगे तो जाने कैसे माँ कॊ पता चल जाता है । माँ खुद भुखे रह कर पहले अपने बच्चो कॊ भरपेट खिलती है औऱ बच्चे कॊ खाता देख भुखे पेट भी तृप्त हो जाती है औऱ पिता अपने बच्चों कॊ भर थाली भोजन हमेशा मिलती रहे इसलिए हमेशा दिन रात पसीना बहाता रहता है । एक पिता हमेशा इसी ज्तोजहत में रहता है कि कैसे वो अपने बच्चे कॊ दुनिया की हर सुख सुविधा मिले । माँ अपने बच्चो कॊ बड़े लाड़ प्यार से दुनिया कि हर अच्छाई बुराई में अंतर औऱ दुनियादारी कि बाते प्यार भरी थपकी दे कर हमेशा अपने बच्चो कॊ समझाती रहती है औऱ वो माँ का प्रेम भरा स्पर्श ही होता है जो हर बच्चे कॊ दुनिया कि हर बड़ी से बड़ी गलती करने से रोकता है औऱ पिता के डाँट में छिपा हुआ प्रेम कोई भी गलती करने से पहले बच्चे के मन डर गलती करने से पहले टोकता है !

“फूल कभी दोबारा नही खिलते जन्म कभी दोबारा नही मिलते मिल जाते है लोग हजारों मगर हजारों गलती माफ करने वाले माँ..बाप नही मिलते ।” एक छोटा सा बच्चा गीली मिट्टी के समान होता है । जिस पर किसी भी चीज़ पर आसानी से खरोंच औऱ छाप पर सकती है । बुरी आदतें औऱ गलत संगत की आड़ी..तिरछी की खरोच न पर जाए इसलिए अच्छी पारिवारिक परिवेश में बच्चो की लालना..पालना करनी चाहिए क्योंकि यही से बचपना उमगते यौवन की रोमांचक यात्रा करता है । लेकिन,किंतु ,परंतु आज़ की आधुनिक दौड़ती भागती व्यस्त भरी जीवनशैली से पारिवारिक समरसता औऱ संवेदना तो जैसे छू.मंतर हो चुंकि है । आज़ के आधुनिक माता पिता दुनिया की हर भौतिक सुख सुविधा कॊ अपने बच्चो कॊ देना चाहते है औऱ इसी ख्वाइशों ने दोनो कॊ ही व्यासायिक बना दिया है पर बचपन औऱ किशोरवस्था के जैसे नाजुक मोड़ पर हर बच्चे कॊ सबसे ज्यादा देख..रेख ,प्रेम वात्सल्य ,स्नेह औऱ आत्मियता जैसे अनमोल रत्नों कॊ मिलने की जगह अकेलापन ,हीनता डर जैसे कुबीचार के चीलर मिल जाते है । जिस कारण प्यार..पुचकार जैसे संजीवनी बूटी से अबुझ सुकोमल बचपन ही रह जाता है औऱ ये एक प्रकार का मानसिक कुपोषण है जो सारी जिंदगी बड़ी बड़ी मानसिक बीमारियों के रूप में दिमागी रुग्णता बन कर बाहर आता है ।

मनोवैज्ञानिक शोध सर्वेक्षण बताते है की आज का सबसे गम्भीर विषय आतंकवाद हो या हिंसा की प्रवीर्ती इन सबके पीछे संवेदनहीन पाषाण समान बन गई हिरदय के कारण ही होता है । मन से जब प्रेम औऱ दया सुख जाती है तो लकड़ी फाडने औऱ मनुष्य कॊ मारने में कोई अंतर नही लगता । कहने का मतलब यह है कि माता पिता औऱ परिजनो के प्रेम से वंचित बचपन तनावग्रसत , उद्दंडता ,क्षणिक में हिरदय परिवर्तन होना ,किसी समाजिक काम में मन ना लगना जैसे विलक्षण से ग्रसित हो जाता है औऱ मन नाना प्रकार के व्याधियों से ग्रसित हो जाता है । निश्छल बचपन औऱ जोश से भरा किशोरवस्था जीवन के सबसे अनमोल औऱ खूबसूरत पल होता है इस मोड़ पर तीव्र गति से बच्चो की शारीरिक औऱ मानसिक परिवर्तन होता है पर माता पिता अपने प्रेम औऱ बच्चो के भावनाओ कॊ समझे औऱ अपना भरपुर समय प्रेम औऱ संरक्षण दे तो दो जनरेशन की बीच की दुरिया ख़त्म हो सकती है । अक्सर हमें देखने कॊ मिलता है की हम बच्चो से कहते है ऐसा मत करना ,तब बच्चा उल्टा वही काम अदबदा कर ज़रूर से करता है या कहेगा मैं करूँगा आपसे मतलब ,मेरी मर्जी ,मेरी लाइफ है मैं चाहे जो करूँ ,अब मैं बच्चा नही रहा अपना भला बुरा खुद समझ सकता हुं । ऐसी बाते आपने बच्चो कॊ कहते सुना होगा । अक्सर बच्चो कॊ मना करने से वो बिगड़ जाते है । उन्हें डाँटने की जगह समझाए ! अगर बच्चो पर रौब ,औडर देने की जगह या फिलॉसिफी झाड़ने की जगह अगर उनसे फ्रेंडशिप की जाए तो बच्चे आपकी बात सुनेंगे औऱ आदर भी करेंगे ।जब तक मिटटी गीली होती है हम जैसा चाहे वैसा उसको रूप दे सकते है बच्चे भी वैसे ही होते है लेकिन मिट्टी पक जाती है तो हम उसके साथ जोर तो वो टुट भी सकते है ।किशोरवस्था की उम्र में बच्चो के साथ मित्र बन कर ही रहना चाहिए ।।अगर उनके साथ खेलगे ,खाएँगे ,घूमेंगे औऱ जितना ज्यादा समय व्यतीत करेंगे उतनी ज्यादा हम अपनी बच्चो की मानसिकता कॊ समझ पाएंगे ।जैसे की हम अपने दोस्तों से वो बात कभी नही बोलते जो उन्हें बुरा लगे ।अगर हमारा बच्चा उल्टा या गलत करे तो समझाते रहना चाहिए जैसे की हम अपने दोस्त कॊ समझाते है फ़िर भी अगर ना माने तो अंत में कहना चाहिए जैसी तेरी मर्जी ।फ़िर भी अगर ना समझे ना माने तो तो पास बिठा कर प्यार से सर सहला कर कहना चाहिए बेटा तुम्हे ऐसा नही लगता तुमसे ऐसा नही करना चाहिए तुमसे भूल हुई है ।ये सब करना आसान नही होगा पर नामुकीन भी नही क्योंकि प्यार औऱ मित्रता ऐसी ताकत जिससे हम जग जीत सकते है पर इसके लिए आपको पहले खुद कॊ तयार करना पड़ेगा ।

                              

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