फ़िर से धरती होगी लाल……… : गंगेश मिश्र

 फ़िर से धरती होगी लाल………  गंगेश मिश्र
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फ़िर उमड़ेगा,
जनसैलाब;
हक़ के ख़ातिर।
फ़िर धधकेगी,
क्रांति की ज्वाला;
हक़ के ख़ातिर।
बुझी नहीं है,
सुलग रही है,
अन्दर ही अन्दर;
जो आग।
मानवता को रौंद,
लगाया,
सत्ता ने दामन पर,
जो दाग़।
फ़िर से धरती,
होगी लाल;
हक़ के ख़ातिर।
माँ, बेटे,
पत्नी की आहें,
खोई-खोई,
ग़मगीन  निगाहें;
खोज रहे हैं,
तड़प रहे हैं।
ज़ख़्म हरे हैं,
भरे नहीं फ़िर;
फ़िर  उभरेंगे;
हक़ के ख़ातिर।

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कपिलबस्तु |

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