फिजियोथेरापी से सफल उपचार

डा. अमरेन्द्र झा:र्सर्वप्रथम मैं फिजियोथेरापी के इतिहास की ओर जाना चाहता हूँ । नेपाल में करीब पच्चीस से तीस वर्षपहले वीर अस्पताल, काठमांडू से इस थेरापी का श्रीगणेश हुआ था । उस समय एक डाँक्टर, जो नेपाल के वीर अस्पताल में कार्यरत थे, उन्होंने अमेरिकामा में देखा था कि फिजियोथेरापी के बिना हड्डी सम्बन्धी कोई उपचार सफल रूप में सम्भव नहीं होता । इसलिए उन्होंने वहीं की दो परिचारिकाओं र्-नर्स) को इस सम्बन्ध में साधारणी सी विधि की तालीम दी और उन्हंे कार्यरत किया ।
लेकिन आज इस क्षेत्र में भी विकास हो चुका है । आज फिजियोथेरापी विषय में नेपाल में कम से कम पाँच सौ से अधिक दक्ष जनशक्ति प्राप्त है । और फिजियोथेरापिष्ट स्नातकोत्तर तह तक पढÞेलिखे चिकित्सक हैं । जिन्हे नेपाली में ‘भौतिक चिकित्सक’ कहा जा सकता है । आज इस विषय की इतनी आवश्यकता महसूस की जा रही है कि हर अस्पताल, मेडिकल कलेज, पोलिक्लिनिक में फिजियोथेरापी की पुनर्स्थापना हो रही है । बदलती, बढÞती आवादी के साथ बहुत तरह के फिटनेस सेन्टर, खेलकूद, हेल्थ गाईड, स्कूल-काँलेज तथा वृद्ध आश्रमों में भी शरीर को तन्दुरुस्त रखने के लिए फिजियोथेरापिष्ट की उपस्थिति बढÞती जा रही है । नेपाल जैसे अविकसित राष्ट्र के लिए यह उपयुक्त भी है ।
लेकिन आज के दौर में भी सरकारी ढिÞलासुस्ती और कमजोर नियमावली के कारण सरकारी अस्पतालों में विज्ञ फिजियोथेरापिष्ट नहीं हैं । और जो हैं, उनकी संख्या भी आवश्यकता से बहूत कम है । आज फिजियोथेरापी ने हड्डी, नशा, काडिएक थोरेसिस, नाइनोकोलोजी, पेडिएटि्रक जैसे विभागो में अपना प्रभाव जमा चुका है । साधारण भाषा में बोलें तो हड्डी और उसकी जोड घिस जाना, नश दब जाना, शरीर के किसी भी जोड का दर्द, मांसपेशी में खींचाव, शरीरिक विकलांगता, अपरेशन और प्लाष्टर के बाद भी शरीर अपनी सही जगह पर नहीं आना, ठीक से शरीर का काम नहीं करना, शरीर के किसी भी अंग में लकवा -परालाइसिस) हो जाना, शरीर जल जाने से अपांगता होना, जैसी बिमारियों का फिजियोथेरापी के द्वारा सफलता के साथ उपचार सम्भव हो चुका है ।
तर्सथ मैं इस लेख के माध्यम से पाठकों को जागरूक भी करना चाहता हूँ कि सही और विज्ञ फिजियोथेरापिष्ट से ही अपना उपचार करावें और ‘स्वस्थ जीवन ही मूल धन है’ इस विचार को आत्मसात् करें । साथ ही अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें । व्

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