फिर भी क्यों पीछे है राजविराज ?

खुश्बु गुप्ता ‘जुही’
मेरी जन्मभूमि है राजविराज । यहाँ आ कर मेरा मन–मस्तिष्क खुश और बुलन्द हो जाता है । इस शहर राजविराज को ‘जयपुर’ शहर भी कहा जाता है । पहले इस नगर में राजाओं का बास था, इस लिए राजविराज नाम से जाना जाता है । साथ ही साथ नगर के पूर्वपट्टी राजविराज–९ स्थित मन्दिर में राजदेवी माता विराजमान हैं ।
नेपाल का सब से पुराने नगरपालिका में राजविराज नगरपालिका का भी नाम आता है । पूर्वी नेपाल के तत्कालीन कमाण्डर जनरल बब्बर शमशेर, उन के सहयोगी प्रकाश शमशेर ने राजविराज नगर बसाने की कोशिश की । राजविराज नगर करीब ६० बिघा जमीन लेकर इन्जीनियर डिल्लीजंग राणा ने बसाया । उन्होंने भारत के गुलाबी शहर जयपुर के नक्से के आधार पर टाउन प्लानिङ किया था और सन् १९९८ में इसे सदरमुकाम का दर्जा मिल गया । यह नगर सप्तरी जिला और सगरमाथा अञ्चल का सदरमुकाम है और खुद भी एक नगरपालिका है । प्रत्येक चार घर के बाद छोटी गली, फिर सहायक सड़क और मुख्य मार्ग बनाया गया । अलग–अलग स्थान में हटिया, किराना दुकान, तरकारी बजार, सहकारी कार्यालय भवन सब व्यवस्थित रूप से मिलाया गया है । नक्सा के आधार में ऐसा व्यवस्थित शहर देश में बहुत कम नजर आता है ।
राजविराज से करीब १० किलोमीटर पूर्व में स्थित हनुमाननगर शहर कभी व्यापारिक केन्द्र हुआ करता था । लेकिन कोशी नदी से सटे होने क कारण इस शहर को कोशी नदी की बाढ़ और कटान ने बार–बार तबाह किया । सन् १९८६ में तत्कालीन सरकार ने राजविराज नगर की परिकल्पना की थी । काठमांडू से चार सौ ५७ किलोमीटर और पूर्व–पश्चिम लोकमार्ग में रुपनी खण्ड से १० किलोमीटर दक्षिण में अवस्थित भारतीय शहर कुनौली ११ किलोमीटर उत्तर में ये नगरपालिका अवस्थित है । सन् २०१६ में सरकार ने राजविराज को नगरपालिका घोषित किया । नेपाल का ही सब से पुराना नगरपालिका होकर भी इसका यथोचित rajbirajविकास नहीं हो सका है । इस शहर में क्या नहीं है । इस शहर में पर्यटन की भी बहुत सम्भावना है । राजविराज नगरपालिका क्षेत्र में राजदेवी मन्दिर, भगवती मन्दिर, वैष्णवी काली मन्दिर, डिहवार थान, ब्राह्माकुमारी राजयोग सेवा केन्द्र है । नगर के १० किलोमीटर दक्षिण में हिन्दू धर्मावलम्बी शक्तिपीठ छिन्नमस्ता है और करीब १८ किलोमीटर पूर्व में कंकालिनी भगवती (भारदह) का मन्दिर है । राजविराज का लक्ष्मी नारायण राधाकृष्ण मन्दिर, पूर्वाञ्चल का ही सब से बड़ा एवं भव्य मन्दिर है । जहाँ लाखों भक्तजन पहुँचते हंै लेकिन इन धार्मिक स्थलों का प्रचार–प्रचार नहीं हो पाया है । इसी तरह सात नदियों का संगम सप्तकोशी पर बना बैरेज, जो नेपाल का ही सबसे बड़ा बैरेज है । उसी से सटी हुई कोसी टप्पु वन्यजन्तु आरक्षण है । नगर में सगरमाथा अञ्चल अस्पताल भी है । किन्तु अस्पताल में डाक्टर और नर्स ना के बराबर है । नगर में रंगशाला है, जिस में खेल कर खिलाड़ी सब राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर में नाम कमाए है । पर दुःख इस बात का है कि रंगशाला का यथोचित विकास नहीं हो सका है । नगर की धड़कन त्रिभुवन चौक, हाल गजेन्द्र चौक के नाम से जाना जाता है । उसे भी आकर्षक बनाना जरुरी है । नगर में महेन्द्र पार्क है, जो अभी शहीद शाकेत मित्र पार्क के नाम से जाना जाता है । उसे भी मनोरम एवं हरियाली पार्क का रूप देना चाहिए । नगर में पञ्चायती स्तम्भ नेता चौक का नाम लोकतान्त्रिक शहीद दसन यादव के नाम से दसन चौक के जाना जाता है ।
नगर को औद्योगिक रूप से भी आगे बढाया जा सकता है । सन १९८८ में राजविराज में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की गई । शहर के करीब चार किलोमीटर उत्तर मलेट गाँव में २२ बिघा जमीन लेकर राजविराज औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया । लेकिन बिना कोई उद्योग सञ्चालन किए यह क्षेत्र जीर्ण बन गया । इसका मुख्य कारण है अफवाह । कुछ नेताओं के द्वारा नियोजित ढंग से अफवाह फैलाई गई है कि उद्योग धन्दा, कल–कारखाना के लिए राजविराज का वातावरण ठीक नहीं है । इसी अफवाह के कारण उद्योगी, व्यापारी यहाँ आना नहीं चाहते हैं । और जब तक उद्योग की स्थापना नहीं होगी, तब तक शहर गति नहीं ले पाएगा । वास्तव में देखा जाए तो इस शहर में हिम्मत है, बौद्धिक क्षमता है और पूर्वाधार भी पर्याप्त है । पर्यटन की भी प्रशस्त सम्भावनाएँ है यहाँ, लेकिन सरकार ने इस तरफ कभी ध्यान नहीं दिया । वर्षों पहले बना विमानस्थल अभी तक कच्चा ही है, यह गाय और भैंस चरने का और घर की गन्दगी फेंकने का अखाड़ा बन गया है । जहाँ बारिश शुरु होते ही जहाज की उड़ान और अवतरण बन्द हो जाती है । पहले नगर में अच्छे स्कुल और कॉलेज थे । कानुन की पढ़ाई तो पूर्व में सिर्फ महेन्द्र बिन्देश्वरी क्याम्पस में हुआ करती थी । लेकिन अभी राजविराज का शिक्षा–क्षेत्र ध्वस्त बनता जा रहा है । राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण कॉलेज और स्कुल में पढ़ाई से ज्यादा गुण्डागर्दी होने लगी है । नगर में साई कृष्ण मेडिकल कॉलेज और युनिक मेडिकल कॉलेज है । यदि इस सभी को व्यवस्थित रूप से चलाया जाय तो राजविराज बन जाएगा किंग डम अफ नेपाल ।
इस शहर में क्या नहीं है, फिर भी क्यों इतना पीछे है ? विकास क्यों नहीं हो पाया रहा है ? एक सहर के लिए आवश्यक सड़क, ढल निकास, पीने का पानी, सौन्दर्य और पर्यटन विकास का सभी कुछ है इस नगर के पास लेकिन पता नहीं किसकी नजर लगी कि यह शहर आगे के बदले पीछे ही जा रहा है । राजविराज ने बहुत से नेताओं को जन्म दिया लेकिन नेताओं ने कभी भी इस शहर के विकास के बारे में सोचा ही नहीं । कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य कार्यालय जैसे आवश्यक सभी पूर्वाधार होते हुए भी नेताओं ने राजविराज के विकास का कभी एजेण्डा बनाया ही नहीं । अपने नगर का विकास हो यही सोचकर जनता वोट देती है । नेता पर विश्वास कर जनता अपना जनप्रतिनिधि बनाकर संसद में भेजती है । लेकिन दुर्भाग्य ही कहना चाहिए राजविराज से जनप्रतिनिधि चुने गए विभिन्न दल के नेताओं ने शायद ही संसद में यहाँ के विकास के बारे में सवाल उठाया हो । चुनाव जीत कर जाने के बाद फिर वो अगली चुनाव में ही दर्शन देते हैं । नेता सब को सामूहिक हक के बारे में सोचना चाहिए, ना की अपने लिए । नेता सब अपने भागबण्डा और एक दूसरे के खींचा तानी में लगे रहते हैं, ऐसे में कैसे सप्तरी का विकास होगा ? देश का अधिकांश बजट संविधान सभा सदस्य के तलब, भत्ता और मन्त्रियों के विदेश भमण में खर्च होता है ।
पिछले कुछ वर्षो में इस नगर में सुधार के कुछ प्रयास तो हुए हंै, फिर भी राज्य द्वारा नगर में कोई भी विकास नहीं हुआ है । हालांकि देश ने हम लोगों के प्रति सौतेला व्यवहार किया है फिर भी इस देश के प्रति हम लोग निष्ठावान है । राजनीति सोच में ही इस मुद्दे पर गम्भीरता से सोचे और हम लोगों की सहनशीलता को हमारी कमजोरी न समझें और मेरा मानना है कि मधेशी का दुश्मन मधेशी खुद है । हाँ, जरुरी है मानसिकता में परिवर्तन लाना । विकास के लिए उठी आवाज को अधिक से अधिक सुनना और समझना चाहिए । यह बहुत ही गम्भीर बात है । समाज की सोच में परिवर्तन लाना ओैर इसके लिए बहुत स्तर पर अभियान आवश्यक है । अभियान की शुरुआत शिक्षा से ही करनी होगी । ऐसा वातावरण निर्माण करना होगा कि हर महिला शिक्षित हो, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो सके धीरे–धीरे समस्या खुद ब खुद खत्म हो जाएगी ।
राजविराज के जनता इमानदार नेता की तलाश में हैं जो जनता की भावना समझ सके, राजविराज का चिन्तन कर सके, शान्ति सुरक्षा की अनुभूति दिला सके । और मैं यह भी कहना चाहूँगी कि जब तक नगरवासी चेतनशील नहीं होंगे तब तक विकास सम्भव नहीं हो सकता । उन्हें समझना होगा कि यह जगह हमारी है, इसे सुन्दर और विकास के मार्ग पर लाना हमारी ही जिम्मेदारी है ।

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