फिल्मीकथा मानवीय जीवन पर आधारित होना चाहिए : अमोल पालेकर ।

काठमांडू, १२ फागुन, लीलानाथ गौतम । भारतीय फिल्म निर्देशक अमोल पालेकर ने कहा है कि पर्दा पर दिखाने के लिए बनने वाले कोई भी फिल्म, मानवीय जीवन परअधारित होना चाहिए । नेपाल स्थित भारतीय दूतावास की सक्रियता में बीपी कोइराला भारत–नेपाल फाउन्डेशन द्वारा ग्राप्mटाई नेपाल और माउन्टेन रिभर फिल्म्स के सहकार्य में गत शुक्रबार को नेपाल के काभ्रे स्थित बनेपा में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हों ने यह बात कही । साथ में उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निमार्ता और निर्देशकों को दर्शक की भावना को समझना चाहिए, तब ही फिल्म व्यावसायिक रुप में सफल हो सकता है ।
विशेषतः महिला पर आधारित कथावस्तु को प्राथमिकता देने वाले तथा कला के क्षेत्र मे विश्व प्रशिद्धि प्राप्त भारत के चर्चित फिल्म निर्देशक अमोल पालेकर, नेपाल के फिल्म निर्देशक, लेखकों और कालाकारों के बीच हो रहे एक दिवसीय वर्कशप में सहभागिता जताने के लिए नेपाल आए थे । पालेकर के साथ उनकी धर्मपत्नी तथा स्क्रिप्ट राइटर सन्ध्या गोखले भी आयी थी। इस कार्यक्रम में नेपाल से दर्जनों फिल्म निर्देशक, लेखक और कालाकारों ने सहभागिता जताई । विशेषतः ग्राफ्टटाई नेपाल में आवद्ध तथा भारत में रहकर फिल्म निर्देशन अध्ययन करनेवाले नेपाली फिल्मी जगत की हस्तियाँ की बढी सहभागिता रही ।
फिल्म निर्माण और निर्देशन के अपने अनुभव सेयर करते हुए निर्देशक पालेकर ने दावा किया कि कुछ फिल्मों के अलावा भारत में निर्मित ९५ प्रतिशत फिल्म असफल हो रहे हैं । उन का यह भी कहना था– जितने भी फिल्म बने हैं, ९० प्रतिशत तो वास्तविक जीवन से बाहर की कथा में आधारित हैं । ऐसा फिल्म सफल ही होगा, कहना मुश्किल है ।

नेपाल और भारत के बीच का संस्कृतिक सम्बन्ध और मजबुत होगा :  अभय कुमार

कार्यक्रमको सम्बोधन करते हुए नेपाल स्थित भारतीय राजदूतावास के डीसीएम जयदीप मजुमदार ने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से नेपाली फिल्म निर्माता और निर्देशक द्वारा नेपाली फिल्म के क्षेत्र में कुछ सुधार होने की अपेक्षा कर सकते है । भारतीय राजदूतावास की सूचना केन्द्र (पीआईसी) प्रमुख अभय कुमार ने हिमालिनी को बताया कि नेपाली फिल्म निर्देशक, स्क्रिप्ट राइटर और कालाकारों की ‘स्कल डेभलप’ करने की उद्देश्य को लेकर यह कार्यक्रम का आयोजन किया गया है । उनका यह भी कहना है कि कार्यक्रम के माध्यम से नेपाल और भारत के बीच जो संस्कृतिक सम्बन्ध है, फिल्म निर्माण और कालाकारों की माध्यम से इसको और भी मजबुत कर सकते है।
इसी तरह ग्राफ्टाई नेपाल के अध्यक्ष बैकुण्ठ मास्के का भी कहना है– भारत से आए हुए वरिष्ठ निर्देशक अमोद पालेकर और नेपाली फिल्मिकर्मियों के बीच हुए इस तरह का वर्कसप ने नेपाली फिल्मकर्मियों कों उत्साह प्रदान किया है । कुछ भारतीय टेलिसिरियल में स्क्रिप्ट राइटर के रुप मे रहचुकी और भारत से ही फिल्म निर्देशन में डिप्लोमा करके नेपाल आई हुई सम्पदा मल्ल का भी कहना है कि इस तरह का कार्यक्रम से हम लोग बहुत कुछ सिख सकते है । यही बात बताते है कलाकार सुशील पोखरेल और श्रीराम पुडासैनी भी । कालकार पोखरेल अपनी असन्तुष्टि व्यक्त करते हुये कहा कि कार्यक्रम की अवधि बहुत कम है । एकदीवसीय वर्कशप में निर्देशन, लेखन और अभिनय तीनों विधा में छलफल होना और ज्यादा उपलब्धी हासिल करने की उम्मीद रखना मुश्किल हैं । इसका समय और बढाना चहिये ।

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