Tue. Sep 18th, 2018

फेसबुक प्रयोग में बच्चे
राजनराज पन्त

समाजिक सञ्जाल के क्षेत्र में विगत सात वर्षों से फेसबुक का प्रयोग हो रहा है और प्रत्येक साल इसके प्रयोगकर्ता बढÞते जा रहे हैं। हम माने न माने यह एक सच्चाई है कि ऐसे लोकप्रिय सामाजिक सञ्चाल बनानेवाले एक काँलेज के छात्र थे और आज सिर्फअमेरिका में ४० प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या का फेसबुक एकाउन्ट है। फेसबुक का प्रयोग भाइरस के समान बिस्तारित हो रहा है। नेपाल में फेसबुक प्रयोगकर्ता करिब ९ लाख हो चुके है और जिस में १३ से १५ तक की उमरवाले प्रयोगकर्ता की संख्या ७ प्रतिशत है। १८ से २४ की उमरवाले ४५ प्रतिशत है। विश्व फेसबुक प्रयोगकर्ता तथ्यांक देखा जाए तो स्कुल, काँलेज के विद्यार्थी तथा नयी पीढÞी के लोगों की संख्या इस में द्रुत गति से बढÞ रही है। वैसे तो फेसबुक एकाउण्ट खोलते समय फेसबुक के नियमानुसार प्रयोगकर्ता की उमर न्यूनतम १३ साल होना जरुरी है। लेकिन किसकी उमर कितनी है, इसे ठीक-ठीक दाजने की प्रविधि न होने के कारण १३ साल से छोटे बच्चे भी इसका प्रयोग कर रहे है।
यदि बच्चे कम्प्युटर, इन्टरनेट, इमेल चलाना जानते है तो वे फेसबुक में अपना खाता भी खोल लेते है। वे खुद को १३ से ज्यादा की उमरवाले बताते है। फेसबुक अपने मित्रों के समक्ष विचार रखने के लिए फोटो शेयर करने के लिए, अपने पुराने मित्रों से मिलने के लिए अत्यन्त उपयोगी सामाजिक सञ्जाल है। मगर इसी में डूबे रहना लाभदायक नहीं होगा। फेसबुक चलाते समय सावधानी नहीं बर्ता जाए तो कम्प्युटर में भाइरस लगना, अनचाहे इमेल का आना, समयका र्व्यर्थ खर्च होना तथा निठल्ले के फेसबुककर्ता द्वारा अनावश्यक और अनर्गल बातें लिखना, एक दूसरे को बदनाम करना, ऐसे अवाँछित काम भी होते हैं। किशोर अवस्था में बच्चों का दिमाग इससे बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
बच्चे इन्टरनेट जब चलावें तो अभिभावक की निगरानी वहाँ जरुरी है। फेसबुक चलाते समय तो इसकी जरुरत और ज्यादे हैं। अपनी पढÞाइ छोडÞकर च्याट करते हुए समय बितानेवाले बच्चे अपनी पढÞाइ पर उचित ध्यान नहीं दे पाते हैं। इस तरह की परिस्थिति से कैसे बचाया जाए, इस पर ध्यान देना जरुरी होता है। इसके लिए मैं कुछ सुझाव देना चाहता हूँ।
सबसे पहले तो नाबालिग बच्चों को फेसबुक में एकाउन्ट खोलने न देना प्रभावकारी उपाय है। अगर उनके पास अपना एकाउण्ट ही नहीं होगा तो वे फेसबुक नहीं चलाएगे और स्वतः फेसबुक से होनेवाले नकारात्मक प्रभाव से बच सकते हैं। यदि वे अच्छे काम के लिए फेसबुक चलाना चाहते है तो दो उपाय है। पहला उपाय है- उन लोगों को अपना फेसबुक एकाउण्ट प्रयोग करना दिया जाए और दूसरा उपाय- उनके फेशबुक एकाउण्ट का पार्सवर्ड अभिभावक स्वयं रखें। जिसके चलते वे फेसबुक में क्या-क्या कर रहे है, यह पता लगाया जा सकता है और उन्हे नियन्त्रित किया जा सकता है। बच्चों की इस गतिविधि में वे किस को कैसी-कैसी बातें पोस्ट कर रहे हैं, सब मालूम हो जाता है और यह मालूम करना भी जरुरी है। उनके बनाए गए दोस्त वास्तव में उनके दोस्त हैं या नहीं, इस बारे में भी पता चल जाएगा।
बच्चों के साथ फेसबुक में क्या पोस्ट किया जाए, किसको पोस्ट किया जाए, आदि सूचना के जोखिमपर्ूण्ा विषय में सल्लाह करना दूसरा उचित उपाय है। यह बात सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, फेसबुक प्रयोगकर्ता सभी को जानना जरुरी है। फेसबुक के द्वारा फोन नं. और अन्य व्यक्तिगत सूचना प्राप्त हो सकता है। इसलिए फेसबुक की प्राइभेसी सेटिङ को आँफ करना न भूलें, यह भी एक प्रभावकारी उपाय है।
आप हमेसा बच्चो के सँग नहीं रह सकते और आप की अनुपस्थिति में बच्चे इन्टरनेट में क्या देख रहे हैं, क्या कर रहे हैं, इत्यादि बातों से अभिभावक अनभिज्ञ रहता है। यदि आप, अभिभावक नियन्त्रण करने के लिए सफ्टवेयर अपने कम्प्युटर में रखते हैं तो उससे बच्चों के कम्प्युटर तथा फेसबुक में क्या चल रहा है, इसका सत्य-तथ्य आप घर में नहीं होने पर भी पता लगा सकते हैं।
फेसबुक के अनेक नकारात्मक प्रभाव हैं। फिर भी दोस्तो और रिश्तेदारों के सर्म्पर्क में रहने के लिए यह उपयोगी है। सिर्फइसका प्रयोग करते हुए सावधानी बरतनी होगी। एक सीमा तक इसका प्रयोग ठीक है, लेकिन बच्चों को इसके विषय में सावधान करना भी अत्यन्त जरुरी है।

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