बजट की जानकारी जन जन तक पहुंचाए सरकार।

मुकेश झा, जनकपुर, २७ जून |
अगर कोई आप से पूछे कि क्या आपको पता है, आपके गाविस, नगरपालिका, उपमहानगरपालिक या जिविस में इस आर्थिक वर्ष के लिए कितना बजट दिया गया है, तो शायद ही आप इसका जवाब दे पाएंगे।आम इन्सान की तो बात ही क्या शायद अपने क्षेत्र के जाने माने बौद्धिक व्यक्ति को भी इस सवाल पर मौन ही रहना होगा। इतना ही नही अगर इस पर एक सवाल और रखा जाए कि आपके क्षेत्रके लिए इस आर्थिक वर्ष की विकाश योजनाएं क्या क्या है, तब तो शायद अच्छे अच्छे समाज सेवक की बोलती बन्द हो जाएगी। परंतु आश्चर्य इस बात की है कि आज तक इस विषय पर अर्थात बजट और विकाश कार्य योजना को जन जन तक पहुचाने की विषय पर कोई ठोस कदम क्यों नहीं बढे ?
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सरकार अपनी दाइत्व निर्वाह करने के लिए वर्ष के शुरुवात में वार्षिक बजट, कार्य विवरण सार्वजनिक करती है साथ ही हरेक वर्ष के अन्त्य में कार्य समाप्ति की वार्षिक प्रतिवेदन भी प्रस्तुत करती है परन्तु वह इस कदर चुपके चुपके किसी कोठरी में कुछ “खास” व्यक्तियों की उपस्थिति में होती है कि आम जनता को कुछ पता ही नहीं चलता। खास कर अगर मधेस की बात करें तो बजट और कार्य का तालमेल एक समस्या ही बना हुवा है। सरकार की तरफ से हर साल बजट और कार्य योजना प्रस्तुत होती है, बजट विनियोजन भी होती है, खर्च भी होती है, परंतु विकास की अवस्था आज से २० साल पहले जैसी थी आज उस से भी गई गुजरी हो गई। सरकार को इस विषय पर ध्यान देना चाहिये की बजट और कार्य योजना ज्यादा से ज्यादा लोगों को पता चले। अगर ऐसा हुवा तो देश का “कैंसर रूपी भ्रष्टाचार” खुद ब खुद न्यून हो जायेगी। जनता अपने आप जागरूक होगी और सरकार द्वारा दिए गए बजट का पूरा पूरा उपयोग होगा। सरकार अगर चाहे तो इस कार्यक्रम को सुचना तथा प्रद्यौगिकी के साथ जोड़ सकती है। सुचना प्रद्यौगिकी के माध्यम से सरकार बजट और कार्य योजना को जन जन तक पंहुचा सकती है। उदहारण के लिए सरकार एक ऐसा “App” बनाए जिस पर पुरे देश का सारा बजट और योजना डाल दिया जाय। पूरा का पूरा बजट, कार्य और योजना की विस्तृत जानकारी उस पर रहे। साथ ही साथ ऐसी व्यवस्था हो कि जो भी कार्य के लिए जितना बजट निकले और कार्य हो वह साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक विवरण के रूपमे उसपर डाल दिया जाता रहे।
इस से हम कहीं भी रहें, हमारे गांव में किस कार्य के लिए कितना बजट आया, उसमे से कितना कार्य हुवा, कितना कार्य बाँकी है, कितना बजट बाँकी है इत्यादि आसानी से देखा जा सकता है।सुचना प्रद्यौगिकी के प्रयोग से यह कार्य आसानी से किया जा सकता है। अगर सरकार निष्पक्ष रूप से और वास्तव में विकास चाहती है तो उसे सर्व प्रथम वह कार्य करना चाहिए जिस से जनता को बजट और कार्य के बारे सारी जानकारी पता हो। इसके बाद अगर कोई स्थानीय या “ऊपर” के अधिकारी योजना अनुसार कार्य करने में कोताही बरतती है तो जनता खुद ब खुद उनसे जवाब तलब कर लेगी।
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