बढते गर्भपतन के लिए कौन जिम्मेदार –

कैलास दास:गर्भपतन कराना कानूनी अपराध है। सरकार द्वारा इस पर कडÞा प्रतिबन्ध लगाने के बाद भी जनकपुर में एक साथ आठ महिला ने एक निजी अस्पताल में गर्भपतन करवाया है। आठ शिशुओं के भ्रूण को एक जगह देखने के बाद जनकपुर के लिए यह बडÞे शर्म की बात लगती है।

abortion in janakpur

बढते गर्भपतन के लिए कौन जिम्मेदार

मैने कुछ दिन पहले भी लिखा था ‘पवित्र नगरी की अपवित्र कथा’, जिस में जनकपुर में हो रहे देहव्यापार का पर्दाफास किया गया था। सिर्फनेपाल से ही नहीं भारत के कुछ जिलो से भी लाँज मालिक महिलाओं को मगवातें हैं और पुलिस प्रशासन को पैसा खिलाकर खुलेआम देहव्यापार करवाते हैं। इस पर कुछ लोगों ने टिप्पणी की तो जरूर थी लेकिन इसे कैसे न्यूनीकरण  किया जाए किसी ने इस बारे में नहीं सोचा। जहाँ तक प्रशासन की बात हैं, पैसे के आगे उन्हें अपनी बदनामी और कानून किसी की चिन्ता नहीं सताती। अभी भी जनकपुर के लाँज में खुलेआम वेश्यावृत्ति होती है, और प्रशासन मौन रहता है।
ऐसे में गर्भपतन जैसी घटना जनकपुर के लिए कोई नई बात नहीं है। जनकपुर के चर्चित जानकी हेल्थकेयर सेन्टर के बगल में आठ शिशुओं की लाश मिली। वहाँ पर लोगों की बडÞी जमघट हर्ुइ थी। पत्रकार, डाक्टर, बुद्धिजीवी, प्रशासन आदि सब आर्श्चर्य व्यक्त कर रहे थे। परन्तु इससे पहले भी डा. नीलम चौधरी के नर्सिङ्ग होम में गर्भपतन की घटना को लेकर बहुत ही बबाल हुआ था। र्फक सिर्फइतना था कि जिस महिला ने गर्भपतन करवाया था, उसकी चार लडकियाँ थीं। इस बार भी जब अल्ट्रासाउण्ड हुआ तो डा. चौधरी ने लडÞकी होने का दावा किया। लेकिन जब गर्भपतन कराया गया तो वह लडÞका निकला। इस पर दोनों पक्ष बीच  बबाल हुआ। यहाँ तक कि प्रशासन को भी ज्ञापनपत्र दिया गया। कुछ लोगों का कहना है कि प्रशासन ने भी घटना में मोटी रकम लेकर घटना को रफादफा कर दिया।
चार लडकियो की माँ महोत्तरी जिला के बनौली निवासी चन्दा झा को डा. चौधरी ने एक लाख रुपैया क्षतिपर्ूर्ति देकर घटना को दवाना चाहा। इतना ही नहीं अपने ऊपर लगे दोष को धोने के लिए उन्होने पत्रकारों के बीच में साक्षात्कार कार्यक्रम किया। जिससे और प्रष्ट हो गया कि यह घटना पर्ूण्ा रुप से पैसे के लालच वा अदक्ष चिकित्सक के कारण घटी है।
भू्रण हत्या के बाद चन्दा के पति अनिल झा ने कुछ पत्रकारों और मानव अधिकारवादियोंं को फोन कर बुलाया था। एक सञ्चारकर्मी ने दावा किया है कि हमारे पास दो प्रकार के फोटो हैं। एक जो पर्ूण्ा लडÞका के स्वरूप में है और दूसरी में उसका लिङ्ग कटा हुआ है।
उसके बाद जब अधिकारकर्मिओं का एक समूह जिला प्रशासन कार्यालय धनुषा में अदक्ष चिकित्सक के लाइसेन्स रद्द करने और भ्रूण हत्यारे पर कारवाही की बात लेकर उजुरी दर्ता कराने गया तो धनुषा के प्रहरी उपरीक्षक नरेन्द्र उप्रेती ने उजुरी लेने से साफ इन्कार कर दिया। अधिकारकर्मी रेखा झा के अनुसार, उप्रेती ने कहा है कि यह आपसी मामला है आप लोग दूसरों को बदनाम करना चाहते है, र्सतक हो जाएं। अर्थात् जिसे भ्रूण हत्या नियन्त्रण के लिए कारवाही आगे बढÞानी चाहिए थी, वे भी इस घटना को छुपाने में लगे हैं। प्रहरी उपरीक्षक उप्रेती से सञ्चारकर्मी ने पूछा तो उन्होने कहाँ कि अभी तक पीडित पक्ष की ओर से लिखित रुप में कोई निवेदन नहीं आया है, मौखिक हल्ला के आधार पर हम अनुसन्धान में लगे हैं।
जिला प्रशासन से न्याय की आशा रखनेवाली जनता को ऐसा जवाफ मिलने पर जनता का निराश होना स्वाभाविक है। जिस पर आम जनता न्यायिक विश्वास करते हैं, वह स्वयं भ्रष्ट रास्ते पर चलने लगे तो र्सवसाधारण का क्या होगा – जहाँ पर अधिकारकर्मी को धम्की दी जाती है और पीडित को पैसे से खरीदने का प्रयास होता है वहाँ पर अपराध को बढावा देने कानून का ही हाथ माना जाएगा।
प्रशासन ने जिस प्रकार से घटना को दवाना चाहा, था अधिकारकर्मियों ने उस घटना को लेकर आन्दोलन में उतरने की चेतावनी दी है। अधिकारकर्मी के साथ इस प्रकार से बातें करने से सिद्ध होता है कि कहीं न कहीं पैसे के खेल में गर्भपतन जैसी घटना को बढÞावा दिया जा रहा है।
इधर डा. नीलम चौधरी विभिन्न सञ्चारकर्मी के साथ अन्तरवार्ता देकर अपने बचाव मंे लगी हैं। उनको कहना है कि चन्दा झा को पेट मे दर्द होने के बाद हमारे क्लिनिक मे आई थी।  हमंे बदनाम करने के लिए यह एक साजिश रची गई है। हमारे क्लिनिक में ऐसी कोई भी अवैधानिक भ्रूणहत्या नहीं होती है -उन्होने दावा किया है।
यही कारण है कि जनकपुर के वरिष्ठ चिकित्सक भी गर्भपतन कार्य में संलग्न हंै। एक गर्भपतन के केस में डाक्टर को १० हजार रुपये मिल जाते है। गोप्य सूचना के आधार पर कहा जाए तो एक चिकित्सक एक दिन में १० से ज्यादा गर्भपतन कराते हैं। यह सब जानते है कि गर्भपतन रोकना बहुत कठिन है। लेकिन इसका मतलव यह नहीं कि कानून के रखवाले द्वारा ही कानूनी प्रक्रिया की धज्जी उडर्Þाई जाए।
जनकपुर में एक साथ आठ शिशु की लाश देखी गई। स्पष्ट होता है कि यह क्लिनिक वा अस्पताल में ही गर्भपतन कराया गया है और एक ही चिकित्सक ने यह काम किया होगा। लेकिन प्रशासन हमेशा अनुसन्धान ही करता रहता है। और अनुसन्धान का निष्कर्षकुछ नहीं निकलता। डा. नीलम चौधरी का प्रकरण पुराना हो रहा है, लेकिन अभी तक कोई कारवाही नहीं हर्ुइ। जहाँ प्रशासन भ्रष्ट हो अर्थात् रक्षक ही भक्षक बन चुका हो और आम लोग आँख और कान बन्द कर सोए हों वहा कानून को पैसे से आसानी से खरीदा जा सकता है।
कुछ दिन पहले यह बात भी बाहर आई कि जनकपुर के कुछ क्लिनिक बिना लाइसेन्स के ही सञ्चालन में हंै। आखिर क्या राज है जो जनकपुर में गर्भपतन एवं देह व्यापार न्यूनीकरण होने के बदले बढÞता जा रहा है। कुछ दिन पहले की बात है- जनकपुर के उत्कृष्ट ‘मोडेल क्याम्पस’ में अध्ययनरत छात्रा और एक लडÞका का धनुषा के ही एक लाँज में अश्लील भिडियो क्लिप बनाकर उसे युट्युब पर रख दिया गया था। दोनों की तस्वीर साफ दिखाई देती थी। इसकी भी बहुत चर्चा हर्ुइ। यहाँ तक कि इस में संलग्न छात्रा के बयान के आधार लडÞका को गिरफ्तार भी कर लिया गया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद पैसे लेकर उन्हे छोडÞ दिया गया। नतीजतन यह हुआ कि दूसरी बार फिर से युट्युब पर वही अश्लील भिडियो क्लिप रख दिया गया। ऐसे बहुत सारे क्याम्पस हैं, जहाँ के छात्र-छात्रा भी देहव्यापार में संलग्न पाए जाते हैं।
सब जानते हैं कि गर्भपतन करवाना और करना दोनों अपराध है। इस लिए दोनों के ऊपर कारवाही होनी चाहिए। लेकिन सवाल उठता है- नेपाल में जिस तरह से धडÞल्ले से गर्भपतन की घटना में वृद्धि हो रही है, इसका जिम्मेवार कौन है – महिला, प्रशासन, डाक्टर वा नेपाल सरकार – समान्यतया कहा जाता दोषी सरकार है। गर्भपतन की घटना के लिए जनकपुर तो एक नमूना मात्र है। लेकिन सम्पर्ूण्ा नेपाल की बात करें तो एक दिन में सयकडों महिला गर्भपतन करवाती हैं।र्
गर्भपतन के कारणों में अविवाहित लडÞके-लडकियों के बीच शरीरिक सम्बन्ध होना, विवाहित जीवन में अनपेक्षित गर्भधारण होना और रोजगारी के सिलसिले में विदेश जानेवालों के कुछ परिवार में सम्भावित अवैध सम्बन्ध होना आदि आते हैं। और यहाँ का प्रशासन भी दोषी है, जो कानूनी कारवाही के बदले पैसे मंे बिक जाता है। अगर इस समस्या को नियन्त्रण करना हो तो सरकार को भी अपनी इमानदारिता दिखानी होगी। त्र

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: