Wed. Sep 26th, 2018

बन्द करो उस विश्वविद्यालय को जो देशद्रोही पैदा करें : ऋषि राज

 ऋषि राज, भारदह | शिक्षा व्यक्ति को सदैव स्वतन्त्रपूर्वक जीने की कला सिखाती है। अपने जिवन को उन्नतशील बनाने के लिये मार्गदर्शन करती है। शिक्षा वो हथियार है जिसके बल पर लोग पशु से महामानव बन जाता है। एक डकैत शिक्षा पा कर वाल्मीकि बन कर रामायण लिखते है। इसलिए किसी भी व्यक्ति, समाज और देश का भविष्य वहां के शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है। सायद शिक्षा का महत्त्व जानकर ही लर्ड मेकालय ने भारत में अंग्रेजी शिक्षा की शुरूआत करवाया। बेलायत के संसद में मेकालय ने कहा था कि अगर भारत पर राज करना चाहते हो तो वहां की शिक्षा व्यवस्था परिवर्तन करना होगा। और भारत में अंग्रेजी शिक्षा के प्रणेता लर्ड मेकालय ने शिक्षा व्यवस्था मार्फत भारतीय परंपरा, संस्कृति, मौलिकता, इतिहास बहुत हद तक समाप्त कर डाला। शिक्षा वो अचुक हथियार है जिससे व्यक्ति की मनस्थिति तैयार होता है। और मनस्थिति ही परिस्थिति का सिर्जना करवाता है।
नेपालीयों ने मधेश की परंपरा, संस्कृति, संस्कार, इतिहास सब कुछ अपने शिक्षा प्रणाली में से फेंक डाला ताकि नेपालीयत हम पर लाद सके। वही लर्ड मेकालय का सिद्धांत अपनाया। मगर जिस भूमि पर राजा जनक और भगवान बुद्ध जैसे महान आत्माओं का जन्म हुआ हो तो कुछ न कुछ गुण उसके पिढींयो में अवश्य रहता है। फलस्वरूप, आज हम अपना धर्म, संस्कृति, परम्परा, इतिहास, वैदिक ज्ञान बचाने के लिए स्वतंत्रता-संग्राम में लगे हैं। हम हर तरह के गुलामीयों से मुक्ति के अभियान मे लगें हैं। हम अपना गौरवशाली पिढीयों का इतिहास बचाकर अपना पहिचान रखना चाहते है। हम स्वतंत्रता​ और आन्नदपूर्ण जिवन चाहते है। हम अपना पहिचान सहित का अस्तित्व चाहते है। हम सुंदरता और सत्यं चाहते है। हमने जिंदगी में फूल खिलने की सपना देखा है। इसलिए हम आजादी चाहते है। स्वतन्त्र होना चाहते है। हमारी जिवन कुरूप बनाने बाले हर तत्वों से लडना चाहते है। हम हर क्षेत्र में क्रांति चाहते है। तुम्हे पता है फिरंगी, इस आजादी अभियान मे हजारों हजार शिक्षित युवा लगें है। और तूम लोगों ने एक सय से ज्यादा यूवा पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया है। पता है कौन है वो युवा ? तेरा ही विश्वविद्यालय से शिक्षित होकर निकले युवा है, जो आजादी आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। तूम लोगों को, उस युवक सब पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने के बजाय अपना विश्वविद्यालय पर धिक्कार आना चाहिए। बन्द कर देना चाहिए विश्वविद्यालय को जो देशद्रोही पैदा करें और बकरा फार्म खोलना चाहिए उसमें ! अब भी वक्त है- बन्द करों यूनिवर्सिटी, खोलो बकरा का खोर।
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