बब्लू दूबे हत्याकांड का हुआ खुलासा, हत्याकांड की फिल्मी स्टाइल कहानी हिमालिनी डॉटकॉम पर…..

*बब्लू दूबे हत्याकांड का हुआ खुलासा, रिमांड होम से फरार युवकों ने दिया घटना को अंजाम*

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*मधुरेश.मोतिहारी/बेतिया.*- उत्तर बिहार समेत पड़ोसी देश नेपाल में आतंक का पर्याय बने बहुचर्चित अपराधी व गैंगेस्टर बब्लू दूबे हत्याकांड का बेतिया पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने तीन लड़कों को गिरफ्तार कर लिया है। इन लड़कों की गिरफ्तारीे एवं पूछताछ के बाद बेतिया एसपी विनय कुमार को पूरा विश्वास हो गया कि पकड़े गए लड़कों ने ही बब्लू दूबे का सफाया किया है। अपने कार्यालय में पत्रकार वार्ता आयोजित कर एसपी श्री कुमार ने कहा कि अपराधी कितना भी शातिर हो, लेकिन कोई न कोई सुराग वह अवश्य छोड़ जाता है। इसी सुराग के सहारे पुलिस ने बब्लू दूबे की हत्या करनेवाले लड़कों को पकड़ा। उन्होंने कहा कि बब्लू दूबे की हत्या एक ऐसे शख्स ने की जिसके बारे में शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा। हत्या के बाद शुरुआत में पुलिस के हाथ मामूली सबूत हाथ लगे थे। घटनास्थल से मिले मोबाइल और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस आगे बढ़ रही थी। लेकिन पुलिस पूरी तरह से सब कुछ तसल्ली कर लेना चाहती थी ताकि अपराधियों को पकड़ने में कहीं कोई चूक न हो जाए। एसपी ने बताया कि जब सारी कड़ियों को एक दूसरे से मिलाया गया तो चौंकाने वाले कुछ तथ्य सामने आए। दरअसल दूबे की हत्या में मोतिहारी किशोर सुधार गृह में रह रहे एक लड़के सूरज मेहता का नाम सामने आया है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया गया कि हत्या के बाद सूरज वापस सुधार गृह पहुंचा। पुलिस की दबिश भी सुधार गृह की ओर बढ़ती जा रही थी।  सूरज को कोई खास फर्क नहीं पड़ा। लेकिन सुधार गृह में रह रहे कुछ अन्य लड़कों को बब्ले दूबे की मौत से गहरा सदमा लगा था और वे रोने भी लगे थे। सूरज इस बात से चिंतित था कि कहीं उसका पोल ना खुल जाय। इस डर से वह रिमांड होम से निकलकर घर जाकर छुप गया, जहां से पुलिस ने उसे दबोच लिया। एसपी ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने बेतिया मुफस्सिल के पर्वतिया टोला के विजय यादव को गिरफ्तार किया है। विजय यादव पर पहले से ही कई थानों में जाली नोट, मारपीट, आर्म्स एक्ट, डकैती समेत कई मामले दर्ज हैं। विजय के परिवार की आपराधिक पृष्ठभूमि रही है। विजय यादव ने बब्लू दूबे की हत्या में शामिल शूटरों के रहने की व्यवस्था की थी, उसने अपने लॉज में सभी को शरण दिया था। इसके अलावा संदिग्ध लोगों का लॉज में आना-जाना रहता है। जमीन पर अवैध कब्जा  से लेकर अन्य कई आपराधिक कार्य विजय करता है। बब्लू दूबे की हत्या में शामिल शूटर शाम में पहुंचे और रात भी इसी लॉज में बिताई थी।

एसपी ने बताया कि बब्लू दूबे की हत्या अपराधी 6 मई को करना चाहते थे। इसलिए सभी शूटर 5 मई की शाम बेतिया लॉज पहुंच गए थे। जब इन्हें पता लगा कि उस दिन पेशी नहीं होगी तो वे वापस चले गए थे।
एसपी श्री कुमार ने बताया कि इस हत्या में जेल से राहुल सिंह, विकास सिंह और छोटाई सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोतिहारी के सुधार गृह से दो लोग एक सूरज मेहता दूसरा सुमन सौरभ इस हत्या में शामिल थे। बकौल एसपी जेल से और भी कुछ लोग इस योजना में शामिल थे। उन्होंने बताया कि इस घटना में मोतिहारी जेल से फरार कुणाल सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस घटना में मनीष सिंह, संजय सिंह, सिगरेट और रिपुसूदन समेत कई अन्य लोगों बारे में पता चला है। यह वही कुणाल सिंह है जिसने फोन करके इस घटना की जिम्मेदारी ली थी। एसपी ने बताया कि  हत्याकांड में चार बाइक का प्रयोग किया गया था, जिसमें एक अपाची, एक ग्लैमर व दो अन्य बाइक शामिल थी।

बबलू दूबे की हत्या 6 को नहीं कर पाने के बाद गिरोह के सदस्य 11 मई को जमा हुए। कुणाल ने शूटरों को ट्रेनिंग देकर यह बताया कि कहां से कौन गोली चलाएगा और कैसे निकल जाना है। भागने के लिए भी अपराधियों ने फूलप्रूफ योजना बना ली थी।  11 तारीख को इस ट्रेनिंग के बाद सभी लोग पुनः विजय यादव के लॉज पर पहुंचे। इस काम में  तीन नए लोग जुड़े, जिसमें रिपुसूदन, सूरज मेहता और सुमन सौरभ के नाम शामिल हैं।  पुलिस इस लॉज के संचालक से लेकर अन्य अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए अपना जाल बिछा चुकी है। घटना को लेकर जिस प्रकार कोर्ट का जायजा लिया गया, इसमें कुछ सफेदपोश लोगों के हाथ होने की भी बात कही जा रही है। क्योंकि हत्या  में शामिल लड़कों को हर पल की जानकारी मिल रही थी कि बबलू कहां और किस कोर्ट में जाएगा, पहुंचा और बाहर निकला। पुलिस ऐसे सभी लोगों को दबोच सकती है। बब्लू के कोर्ट जाने के बाद अपराधी लॉज से चले और घटना को अंजाम दिया। जब पेशी के बाद बब्लू दूबे कोर्ट से वापस आ रहा था, तब अपराधियों ने उस पर पिस्टल से फायर कर दिया। पहली गोली सुमन सौरभ ने चलाई और अंत की दो गोलियां सूरज मेहता ने मारी। इसके बाद अपराधी भीड़ का हिस्सा बनते हुए वहां से निकल गए। एसपी की मानें तो अपराधियों ने इस घटना में खुद की जिंदगी दांव पर लगाकर मामले को अंजाम दिया था। क्योंकि अगर वहां भीड़ नहीं होती तो पुलिस गोली चलाती और तीनों ढेर हो जाते।

इस हत्या का कारण कुणाल सिंह व बब्लू दूबे के बीच पैसे के बंटवारे को लेकर उपजा विवाद था। सुरेश केडिया अपहरण कांड के लिए मिली फिरौती की रकम बबलू के जान की दुश्मन बनी।

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