Sat. Sep 22nd, 2018

बरसात का मौसम और गुपचुप टरटराना

निर्मल गुप्त

आसमान में बादल तैनात हैं। आर्द्रता लगभग शत-प्रतिशत है। हवा लगभग थमी हुई है। तापक्रम 35 डिग्री के आसपास है। लेकिन लग रहा है कि दर्जा हरारत 44-45 के आसपास है। प्रजा की देह पसीने से तरबतर है। राजा रजवाड़े 18 डिग्री वाली ठंडी शुष्क हवा में बरसात को खुशामदीद कहते हुए प्रिवलेज्ड महसूस कर रहे हैं। उनके लिए हरीतिमा की शान में कसीदे काढ़ने की तमाम वजहें हैं। उन्हें हर ओर हरा-भरा ही दिख रहा है। वे दूरदर्शिता के चलते मुल्क के उज्ज्वल मुस्तकबिल को साफ-साफ देख पा रहे हैं।

फिलवक्त वातावरण में तमाम संभावनाएं मौजूद हैं। विकासोन्मुख आकड़े हैं। सघन देश-प्रेम के चलते जनता की गर्दन में निर्भीकता की अकड़ है। शृंगार रस के कवियों के लिए स्ट्रीट लाइट पर भनभनाते शलभों की जिंदादिली के रूपक दृश्यमान हैं। ओज का कवित्व रचने वाले युद्ध की आसन्न आहट को सुन पा रहे हैं। नगर निगम की गाडि़यां फॉगिंग करती हुई कीट-पतंगों के खिलाफ सरोकारी लड़ाई में संलिप्त हैं। आकड़े बता रहे हैं कि इस बार जमकर बारिश होगी। हो नहीं रही, यह अलग बात है। छाते से लेकर रबड़ की बोट तक अपनी-अपनी भूमिका के सम्यक निर्वाह के लिए तत्पर हैं। आपदा प्रबंधन वालों को ‘क्राइसिस’ के प्रकट होने का शिद्दत से इंतजार है, जैसे घरवालियां कामवाली के वापस काम पर लौट आने की बाट जोहती हैं।

मौसम विभाग बारिश को लेकर गहरे आशावाद से भरा है। उसे पता है कि मानसून आ गया है। उनके पास ‘वेदर फोरकास्ट’ को लेकर अत्याधुनिक उपकरण हैं। फिर भी यदि पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होती है, तो इसे विधि का विधान मानना होगा। उसका मानसून सत्र हमेशा इसी तरह चलता और संपन्न होता है।

कोई कह रहा था कि बारिश का मौसम ऑफिशियली तो आ लिया, लेकिन टर्राते मेंढ़क नहीं दिखे। कहने वाला बड़ा मासूम है, उसे नहीं पता कि खुलेआम टर्राने में बड़े खतरे हैं। टर्राने वाले सोशल मीडिया पर ‘ट्रॉल’ करने वाले नटखट टोले से बचने के लिए अब गुपचुप टर्राते हैं।

 

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