बर्दिया डायरी

सन्दीपकुमार वैश्य:सय से अधिक तस्कर धरे गए
बर्दिया राष्ट्रिय निकुञ्ज प्रशास ने इधर ५ सालों मंे वन्यजन्तु सम्बन्धी तस्करी में १ सौ २१ लोगों को पकडÞा है। वन्यजन्तु के मूल्यवान अंगों को विदेशों में लेजाकर विक्री के कार्य में संलग्नता के आरोप में निकुञ्ज ने २०६६ साल में ३७, २०६७ में ७, २०६८ में २८ और २०६९ में ४४ तस्करों को पकडÞा था। इसतरह २०७० जेष्ठ महीने तक निकुञ्ज प्रशासन ने सौ से अधिक तस्करों को धर दबोचा है। बाघ, हाथी और गैडंे जैसे वन्यजन्तुओं को मारना, उनकी हड्डी, सिंग और खाँग की तस्करी करना, इत्यादि अपराधों में सम्लग्नत हुए व्यक्तियों को निकुञ्ज प्रशासन ने विभिन्न जगहों से पकडÞा है। निकुञ्ज स्रोत के अनुसार पकडÞे जाने वालों में से कुछ लोग गैडÞा और बाघ मारने के अभियोग में, कुछ लोग हड्डी और सिंग की विक्री करते हुए पकडे गए है। बाघ की हड्डी, उसकी खाल, गैडे के सिंग, हाथी के दाँत के साथ तस्कर पकडे गए हैं। इस समय मध्यवर्ती क्षेत्र के करीब दो हजार युवा चोरी शिकारी नियन्त्रण करने के अभियान में लगे हुए हैं। गाँव में परिचालित ये युवा शंकास्पद क्रियाकलाप करनेवाले व्यक्तियों के बारे में निकुञ्ज को सूचना देते हैं। निकुञ्ज प्रशासन और सेना की संयुक्त टोली तस्करों को फन्दे में फंसाती है, ऐसा सम्बन्धित सहायक संरक्षण अधिकृत रमेशकुमार थापा ने बताया है।
देश में शान्ति स्थापना के बाद तस्करों की संख्या और ज्यादे बढÞ गई है। निकुञ्ज की सुरक्षा के लिए खडÞे किए गए सेना के पोष्ट निकुञ्ज के अन्दरवाले रास्तों में पडÞते है और उस जगह सवारी साधन की जाँच होती है। और अधिक तस्कर पकडेÞ जाते है। गत तीन सालों में निकुञ्ज ने मध्यवर्ती क्षेत्र में चोरी शिकारी नियन्त्रण के अभियान में संगठित प्रयास करने से तस्करों को पकडÞने में बहुत सहायता मिली है, -ऐसा सहायक संरक्षक अधिकृत थापा ने बताया है।
सडक की दर्ुदशा
बर्दिया। आजकल बषर्ात के कारण जिला सदरमुकाम गुलरिया से भुरी गाउँ तक ३२ किलोमिटर हुलाकी राजमार्ग बहुत ही दुरावस्था में हैं। इसके चलते जिला के अन्य भागों से सदरमुकाम गुलरिया आने-जाने वाली पब्लिक को बहुत परेशानी हो रही है। सरकारी कामकाज को लेकर सदरमुकाम जानेवाले लोग बीच रास्ते से ही वापस लौटने के लिए मजबूर होते हैं। ठाकुरद्वारा, शिवपुर, न्यौलापुर, बगनाहा, ढÞोढÞरी इत्यादि गाविस की जनता को सदरमुकाम गुलरिया आने-जाने में बहुत ही दिक्कत है।
हुलाकी सडक की स्तरोन्नति के लिए भारत सरकार की ओर से जगह-जगह में निर्माण होनेवाले कर्ल्भर्ट का काम समय में पूरा न होने से परेशानी और बढÞ गई है। आजकल प्रायः हर रोज सवारियां सडक में फंस जाती हैं। ३२ किलोमिटर सडक यात्रा पूरा करने में ४ घण्टा से ज्यादा समय लग रहा है, -ऐसा ढोढरी के रहनेवाले वंशीराम थारु ने बताया। सम्बन्धित निकाय और सरकारी लापरवाही के कारण इस क्षेत्र की जनता को खास कर वषर्ात में बहुत ही कठिनाई का सामना करना पडÞ रहा है।
किसान मेन्था खेती की ओर
बर्दिया में राष्ट्रिय निकुञ्ज के मध्यवर्ती क्षेत्र मंे अधिकांश किसान मेन्था खेती की तरफ आकषिर्त हो रहे है। निकुञ्ज के बन्यजन्तुओं से भी नुक्सान न हो और थोडÞे समय में ही अच्छी आमदनी होने से किसान मेन्था खेती की तरफ आकषिर्त हुए हैं।
बर्दिया मंे मेन्था खेती करने में किसानो की संख्या हरेक वर्षबढÞ रही है। निकुञ्ज के मध्यवर्ती क्षेत्र लगायत जिला के गुलरिया नगरपालिका, महम्मदपुर, जमुनी लगायत के क्षेत्रों मंे ऐसे किसानों की संख्या बढÞी है। मेन्था जडिबूटीजन्य पदार्थ है। पौष-माघ से बैशाख तक मेन्था की खेती होती है। उसी तरह एक बार खेती करने बाद बैशाख से भाद्र महीने तक ३ बार इसका उत्पादन होता है। बर्दिया में करीब दो हजार हेक्टर क्षेत्रफल मंे यह खेती हो रही है। मगर जिला कृषि विकास कार्यालय बर्दिया ने इस मेन्था खेती को कृषि क्षेत्र के अर्न्तर्गत न होने के कारण आर्थिक एंव प्राविधिक सहयोग करने में असुविधा है, ऐसा कृषि विकास अधिकृत हिकमत श्रेष्ठ ने बताया है। बर्दिया राष्ट्रिय निकुञ्ज के मध्यवर्ती क्षेत्रों के किसानों को मेन्था खेती के लिए निकुञ्ज प्राविधिक सहयोग करता आ रहा है।

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