बाँलिवूड प्रवेश सहज नहीं है

Sanjaya-chaturbedi-2

सञ्जय चर्तुवेदी

नेपाल, कपिलवस्तु निवासी सञ्जय चर्तुवेदी हिन्दी सिने जगत के एक जानेेेमाने साउन्ड डिजाईन्ार हैं। जिन्होंने अभी तक कई छोटे बडÞे फिल्मों में काम किया है। उनकी पहली फिल्म थी- हनीमुन ट्रभेल्स प्रा.लि.। पीछले साल आयी उनकी फिल्म ँसंर्घाई’ मंे उन के बेहतरीन कामके लिए उनको पुरस्कृत भी किया गया है। उनसे हिमालिनी प्रतिनिधि सीमा श्रीवास्तव की हर्ुइ बातचीत का सारांशः-

० आप को इस क्षेत्र में जाने की प्रेरणा कैसे मिली –
– मैं बचपन से हीं पढने-लिखने के लिए उतना जद्दोजहद् करनेवालों में से नहीं था। मुझे बचपन से ही फिल्मे देखने में बहुत अभिरुचि थी। मैने गे्रजुएसन किया गोरखपुर युनिभर्सिटी से। फिल्मों में जाने के लिए प्रोपर ट्रेनिगं लेना जरूरी है, तब मुझे ऐसा लगा। और इधर मैं टियू से एमएससी कर रहा था। तभी भारतीय दूतावास से मुझे स्कलरसिप मिला। और मैं विदेश्ाी कोटा से सत्यजीत फिल्म एन्ड टेलिभिजन इन्स्िटच्युट में तालीम के लिए वहां गया। साउण्ड डिजाइन का तीन साल का कोर्स था। उसके बाद मुर्म्बई जाना हुआ।
० साउंड डिजाइनिगं क्या है और फिल्मों में इस का कैसा रोल होता है –
– फिल्म में साउण्ड का बहुत ही महत्वपर्ूण्ा रोल है। इसीलिए साउण्ड डिजाइनर की भूमिका अह्म होती है। साउण्ड इफेक्ट्स और फाइनल मिक्सिंग जैसी अनेक जिम्मेदारियां होती हैं। कथानक के आधार पर साउण्ड देना पडÞता है। उसी तरह कहानी की मांग के आधार पर साउण्ड को बदलना पडÞता है।
० इस क्षेत्र में आने के लिए आप को क्या क्या संर्घष्ा करना पडा –
– मैने पहले ही कहा कि मैं सत्यजीत फिल्म और टेलिभिजन से साउडं डिजाइनिगं का कोर्स कर रहा था तो उसी समय गेस्ट लेक्चरर के रूप में मिस्टर नकुल कामदेब आए हुए थे। उन को हमारा काम पसन्द आया और हम लोगों को मुर्म्बई ले गए। वहाँ हम लोगों की एक बहुत अच्छी टीम बनी। उस टीम ने मिलकर पहले फिल्म ‘हनिमुन टे्रभल्स प्रालि’ बनाई। उस के बाद नकुल के साथ हमने और भी फिल्में बनाईं, जो बहुत चर्चित रहीं। जैसे- ‘ओम श्ाान्ति ओम’, ‘तारे जमीं पर’, ‘कर्ुबान’, ‘दिल्ली ६’, ‘अन्जाना अन्जानी’। उस के बाद तो काम आसानी से मिलने लगा।
० आपको पारिवारिक सपोर्ट कैसा मिला –
– मैं पाच भाई और तीन बहनों में सबसे छोटा हँू। सायद सबसे छोटा होना ही मेरे लिए अच्छा सपोर्ट हुआ। मुझे फिल्म लाइन में जाने में किसी ने नहीं रोका। पर्ूण्ा पारिवारिक र्समर्थन मुझे मिला।
आप नेपाल के हैं, और बलिवुड को युवा-युवतियों का ँडि्रमलैण्ड’ माना जाता है, तो आप यहाँ के नौजवानों को क्या कहेंगे, जो वहां जाना चाहते है –
– आप अपने सपने को सच करना चाहते है तो उसी लाइन में कठोर परिश्रम कीजिए। अपनी योग्यता बर्ढाईए। आवश्यक तालीम लीजिए। अपने को क्वालिफाइड बनाकर आप बाँलिबुड जाएंगे तो आप का सपना साकार हो सकता है।
अपने बचपन के बारे में कुछ बताएं –
– मैं बचपन से ही शर्मिले स्वाभाव का हूँ। और शुरु से ही मैं फिल्मों की ओर आकषिर्त था। और फिल्म देखने के लिए स्कुल से गायव रहता था। फिर भी मैं आदर्शवादी हूँ। पारिवारिक मूल्य मान्यताओं को मानता हूँ। और थोडÞी सी भी फर्ुसत मिलने पर नेपाल आता हूँ। कपिलवस्तु की मिट्टी मुझे खीचकर यहाँ लाती है। यहाँ आकर मै अपने को फिर से ताजा महसूस करता हूँ।
० नेपाल के युवा कलाकारों को जो इस क्षेत्र से जुडे हुए है, आप क्या कहना चाहेंगे –
– मैं उन को कहना चाहता हूँ कि फिल्मी जगत के किसी भी क्षेत्र में आप जाना चाहते हैं तो अपने को वेलट्रेन्ड होकर और पर्ूण्ा ज्ञान के साथ अपने हुनर को वहां परोसें। क्योंकि वहां आप का अध्ययन और परिश्रम की बहुत जरुरत होती है। जिससे आप को कामयावी मिल सकती है।
० कलिवुड की फिल्मों में आप किस चीज की कमी पाते हैं –
– यहाँ नेपाल में अभी तक फिल्म बनानेवाली अच्छी संस्था नहीं है। और फिल्मों के बारे में पढर्Þाई करानेवाली कोई संस्था नहीं है। यहाँ के लोगों में क्षमता है, योग्यता भी है, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिल रहा है। यहाँ अक्सर युवा मुझ से पूछते है कि हम क्या करें – जिससे हमें फिल्मों में काम मिले। लेकिन मुझे तो सच बात कहनी है। यहां पर अध्ययन का अवसर नहीं होने पर बाहर जाकर आप को अध्ययन करना पडÞेगा, टेक्नोलाँजी सीखना होगा और कलिवुड के सम्बन्ध में अपडेट भी रहना होगा। नेपाल सरकार की ओर से अगर कलिवुडÞ को प्रभावकारी ढंग से स्थापित करना हो तो गम्भीर रूप में पहल करना जरूरी है।
० आप की निजी जिन्दगी के बारे में एक सवाल –
– जी मैं शादीशुदा हूँ। मैंने आपको पहले ही बताया है कि मैं पारिवारिक मूल्य-मान्यताओं को बहुत मानता हूँ। मेरा एरेन्ज मैरिज हुआ है। शादी के तीन साल भी गुजर चुके हैं।
अन्त में आप कुछ ऐसा बताना चाहेंगे – जो हम पूछना भूल गए हो –
– सबसे पहले तो मैं हिमालिनी की पूरी टिम को धन्यवाद देता हूँ, जिसने मुझे नेपाल के चाहनेवालें लोगों से बात करने का मौका दिया। वे मेरे काम को सरहाते है। उन तक मेरी बात पहुँचाने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। मुझे आप सबका साथ और आशर्ीवाद चाहिए।

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