बागियों की बेहाली

हाल ही में सम्पन्न संविधानसभा के दूसरे निर्वाचन में बहुत सारे अनपेक्षित और उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त हुए हैं। जो इस प्रकार हैं- मतदान से पहले प्रमुख दल के प्रमुख नते ाआ ंे क े विरुद्ध म ंे बागी उम्मदे वारा ंे की खबू चर्चा रही। खासकर काठमांडू के क्षेत्र नं. १० म ंे एमाआवे ादी अध्यक्ष पच्र ण्ड क े विरुद्ध बागी उम्मदे वार ढरेÞ सार े थ।े उन सबा ंे म ंे पदम कवँु र विशष्े ा रूप स े चचिर्त रह।े क्यांेि क उन्हानंे े पहल े पच्र ण्ड का े भरी सभा म ंे आक्रमण किया था। फिर भी उनका े सिर्फ  ३८ मत ही मिल े ह।ंै हालां िक बागी उम्मदे वारा ंे क े चलत े पच्र ण्ड की हार नहीं हर्ुइ, बल्कि प्रतिपक्ष के सशक्त उम्मदे वारा ंे न े उन्ह े चाराखे ान े चित्त किया। उसी तरह संविधानसभा निर्वाचन परि णाम आने से पहले तक नेपाली कांग्रेस के तीन बागी उम्मेदवार विकास कोइराला, सुप्रभा घिमिरे और पर्ूण्ाबहादुर गुरुङ चर्चे में थे। मगर सबों की जमानत जफत हर्ुइ। जो चर्चा में नहीं थे, कपिलवस्तु-२ के कांग्रेस के बागी उम्मेदवार अतहर कलाम मुसलमान और महोत्तरी क्षेत्र नं. ४ के स्वतन्त्र उम्मेदवार चन्देश्वर झा ने विजय हासिल की। ये दोनों महोदय विजय के बाद चर्चा में हैं।

पहले के चर्चित विकास, सुप्रभा और पर्ूण्ाबहादुर इस समय गुमनामी के अंधेरे में खो गए हैं। पार्टर्ीीी ओर से टिकट नहीं मिलने पर सपु भ्र ा घिमिर े न े काठमाडं ू क्षत्रे न.ं ४ म ंे यवु ा नेता गगन थापा के विरुद्ध उम्मेदवारी दी थी। लेकिन परिणाम र्सार्वजनिक होने पर गगन थापा २२ हजार २ सौ २६ मत से विजयी हुए। सुप्रभा घिमिरे को सिर्फ९२ मत मिले। उसी तरह चितवन क्षत्रे न.ं ४ म ंे नपे ाली कागं से्र के सभापति सुशील कोईराला के विरुद्ध बागी उम्मदे वार कागं से्र क े ही पवर्ू  जिला सभापति विकास काइर्ेर् र ाला चचार्  म ंे थ।े स्वय ं कागं से्र ी जना ें का कहना था कि सभापति काइे राला क े लिए बागी उम्मेदवार खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन सुशील कोईराला को २० हजार ७ सौ ६० मत प्राप्त हुए और वे विजयी घोषित हुए। जब कि बागी को सिर्फ१ हजार ८३ मत पा्र प्त हएु । उसी पक्र ार कागं से्र क े दसू र े बागी उम्मदे वार पण्ू ार्ब हादरु गरुु ङ न े कागं से्र क े उपसभापति रामचन्द्र पौडेल को कडी चुनौती दी थी। गरुु गं क े कारण पाडै ले चनु ाव म ंे पर ाजित हा े सकत े ह,ंै एसे ा भी लागे ा ंे का कहना था।

मगर परिणाम म ंे पाडै ले १८ हजार १ सा ै ४९ मत के साथ शानदार रूप से विजयी हुए तो पर्ूण्ाबहादुर गुरुङ को सिर्फ२ हजार ७ सौ २७ मत म ंे सन्ताष्े ा करना पडाÞ । वसै े बागी उम्मदे वारी सिर्फ  कागं से्र म ंे नहीं थी। ऐसे उम्मेदवार एकीकृत नेकपा माआवे ादी आरै नके पा एमाल े म ंे भी थ।े उसी पक्र ार चचिर्त रह े उम्मदे वार य े ह-ंै धनष्ु ाा क्षत्रे नं. १ के उम्मेदवार जोगकुमार वरवरिया उर्फश्रवण यादव, ने एमाओवादी के उम्मेदवार र ामचन्द्र झा के विरुद्ध उम्मेदवारी दी थी। जिसके विरुद्ध बागी उम्मेदवार हुए थे, उससे ज्यादा मत पा्र प्त करन े म ंे श्रवण सफल ता े हुए मगर किस्मत का फेर देखिए- वे वहाँ से नहीं जित सके। किसी ने ठीक ही कहा है- किस् मत खराब हा े ता े ऊटँ म ंे बठै न े पर भी कत्तु ा काट लेता है। श्रवण यादव को ७ हजार ९ सौ ४७ मत मिला है, जबकि रामचन्द्र झा को ५ हजार ३ सा ै १० म ंे सन्ताष्े ा करना पडाÞ । उसी तरह सर्ुर्खेत क्षेत्र नं. २ में एमाले के यमलाल कँडेल के विरुद्ध में शिवप्रसाद उपाध्याय ने बागी उम्मेदवारी दी थी। कँडेल को ९ हजार १ सय १८ मत मिले तो बागी उम्मेदवार उपाध्याय को ४ हजार ५ सय ६५ मत प्राप्त हुआ। इन दोनों की आपसी लर्डाई से प्रत्यक्ष फायदे में रहे- कांग्रेस के उम्मेदवार हृदयराम थानी। जो १७ हजार ४ सय १९ मत प्राप्त कर विजयी हो गए।

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