बालविवाहः समाज पर शिकन्जा

विनय दीक्षित
पुराने समय से मधेशी समुदाय में एक गलत परम्परा रही है । वह है बालबालिकाओं का छोटी उम्र में विवाह करना । यह परम्परा सामाजिक मान्यताchild-marriage-indian-couple-india-41675250 के रूप में स्थापित है । विवाह होना स्वभाविक है, लेकिन कानून के हिसाब से उसकी कुछ मापदण्ड और नियम हैं जिसे समाज मानने से इन्कार करता आया है ।
जिले में पिछले एक दशक से अधिकारवादी संघ संस्था द्वारा तथा सरकारी स्तर पर भी प्रयास जारी रही है कि बालविवाह को सामाजिक अपराध के रूप में घोषित किया जाय । कानून का अभाव भी नहीं है । अदालत स्वयं इसे गलत मानता है और इसके खिलाफ अच्छा कानून भी है जिस कारण समाज बालविवाह का अन्त होना चाहिए ।
सामाजिक अभियान, जनचेतना, प्रचार और विज्ञापन से जब मामला नियन्त्रण में नहीं आया तो पुलिस ने बालविवाह के खिलाफ कदम उठाया । जिला मटेहिया गाबिस में हो रहे एक बालविवाह पर कारवाही करते हुये पुलिस ने वर और वधु दोनों पक्षों को हिरासत में लिया । यह पहली घटना थी जब पुलिस ने इतनी सख्ती के साथ कारवाही की थी ।
इस कारवाही की कहीं उदाहरण के रूप में व्याख्या की गई तो कहीं समाज और परम्परा पर आक्रमण बताया गया । लेकिन कानून के हिसाब से जो गलत है उसे सही कोई नहीं कह सकता । १८ वर्ष उम्र पूरा किए बिना ही विवाह की उम्मीद लिए बैठे सैकड़ौं परिवार की सोच पर पानी फिर गया । जिन्होंने कार्ड वितरण किया था, आवश्यक तैयारियाँ भी की थी उन्होंने आननफानन में किसी प्रकार से बिना औपचारिकता के विवाह सम्पन्न किया ।
इलाका पुलिस कार्यालय भगवानपुर के पुलिस निरीक्षक किरण पोखरेल ने कहा, बाल विवाह सामाजिक अपराध ही बाल अपराध भी है । पढ़ने और लिखने के उम्र में शादी करना गलत परम्परा है इसे समाज को बदलना ही पडेÞगा ।
पुलिस, मीडिया और सामाजिक अभियन्ता तीनों ने समाज पर बालविवाह के खिलाफ मिसन बनाया । जिला पुलिस कार्यालय बाँके के तथ्याँक के अनुसार पिछले १५ दिन में जिले में ९ बालविवाह स्थगित किये गये । सिविन हेल्पलाइन, महिला बालबालिका कार्यालय, बीग्रुप जैसे संघ संस्थाओं ने बालविवाह के खिलाफ खुलकर मोर्चा सम्हाला है ।
धमकी और दबाव सिर्फ अधिकारवादियों को ही नहीं मीडिया और पुलिस को भी मिलीं । कहीं धर्म के नाम पर तो कहीं सम्प्रदाय के नाम पर बाल विवाह को अभी भी समाज में जायज ठहराने की बात सुलग रही है ।
जन्मदर्ता बढ़ाने की कोशिश
फत्तेपुर गाबिस की एक १४ वर्षीया बालिका का ९ कक्षा में पढ़ते समय ही शादी हो गई । विद्यालय में पेश किए गए जन्मदर्ता के आधार पर उसकी उम्र १४ वर्ष थी, लेकिन सिर्फ शादी के लिए ही बालिका का उम्र जन्मदर्ता फेरबदल कर १८ वर्ष बनाया गया ।
यह किशोरी इस प्रकार होने वाले घटनाओं की एकलौती गवाह है । शारीरिक हिसाब से भी वह १८ वर्ष की नहीं दिखती और विद्यालय उसे १४ वर्ष का प्रमाणित कर चुका है ।
मटेहिया स्थित एक १३ वर्षीया बालिका के साथ भी कुछ ऐसा ही होने वाला था । लेकिन समय रहते ही गैरसरकारी तथा सरकारी प्रयास के चलते किसी प्रकार से शादी स्थगित हुई । अभी तक जन्मदर्ता बढ़ाने के लिए दबाव और प्रयास होता आया है । गाबिस मुखिया मुन्सी प्रसाद यादव ने बताया कि लागत के नाम पर लोग घूस देना भी गलत नहीं समझते ।
बारबार के प्रयास के बाद जब लड़की के अभिभावक को बताया गया जन्मदर्ता फेरबदल करना और भी गैरकानूनी है तो लोग धीरे धीरे गाबिस आने जाने का सिलसिला कम कर दिए । सरकारी और गैरसरकारी स्तर से प्रयास होने के बावजूद भी अपेक्षाकृत रूप में प्रतिफल प्राप्त नहीं होता हिमालिनी से बातचीत में सिविन हेल्पलाइन बाँके के प्रमुख सिद्धराज पनेरु ने कहा, अब सख्ती के साथ कारवाही होना चाहिए ।
कहीं धर्म के नाम पर कहीं जाति के नाम पर बालविवाह होता है, सम्झाने का समय अब नहीं रहा, पनेरु ने कहा अब सिर्फ कानून के हिसाब से कारवाही आगे बढ़ाना चहिए । बाल विवाह के ३ सूचना दैनिक रूप में आते हैं उन्होंने कहा, कारवाही के अभाव में बालविवाह सम्झाने से नहीं रुकेगा ।
बालविवाह रोकने के सिविन बालहेल्पलाइन ने १०९८ में फोन करने की आम रूप में अपील की है । जिला पुलिस के प्रवक्ता डीएसपी भिम किरण बोगटी ने कहा कि दबाव और प्रभाव के कारण मिसन को रोका नहीं जाएगा । बालविवाह सामाजिक अपराध है इस पर कानून के हिसाब से कारवाही की मुहिम चलाई गई है । उन्होंने कहा जनता से आग्रह है कि वे समय पर पुलिस को सूचना दें । जनता अगर जागरुक हो जाय तो इस कुरीति को दूर करना आसान हो जाएगा ।

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