बाढ़ का कहर से लाश जलाने लिए एक इञ्च जमीन भी नहीं थी : सीताराम पण्डित

सीताराम पण्डित ,तराई कुम्हार समाज नेपाल के अध्यक्ष हैं

काठमांडू । कुम्हार समाज के उत्थान व विकास हेतु साल २०६२ में तराई कुम्हार समाज नेपाल की स्थापना हुई है। संस्था की स्थापना काल से ही हम जातीय उत्थान व विकास के साथ -साथ मानवीय सेवाओं से जुड़े बहुत सारे कार्यक्रम आयोजित करते आ रहे हैं। खासकर बाढ़ पीदितों की सहायता करने के उद्देश्य से रक्तदान कार्यक्रम आयोजित किए हैं ।
कुछ दिन पूर्व आई बाढ़ व भूस्खलन से करीब दो सौ से अधिक लोगों का निधन हुआ । बडी तादाद में लोग लापता भी हुए । बाढ़ का ऐसा कहर था जो लाश जलाने व गाडने के लिए एक इञ्च जमीन भी नहीं थी । लोग वेघर हो गए ।सडक व ऊंची जगह पर आश्रय लेने के लिए बाध्य हुए । फिलहाल ऐसी अवस्था नहीं है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्यायें अवश्य दीखी गई हैं । खासकर बाढ़ पीडितों की सहायता करने के लिए ही हमने रक्तदान शिविर का संचालन किया । शिविर में संकलित रक्त काठमांडू – बालकुमारी में स्थित रेडक्रस को हस्तान्तरित किया जाएगा। और हमारी संस्था की सिफारिश पर बाढ़ पीडित ,गरीब व अन्य असहायों को उपलब्ध कराया जाएगा ।
इसी सन्दर्भ में मैं कहना चाहूँगा कि रक्तदान द्वारा न केवल पीडित मानवता की सेवा करने का मौका मिलता है ,बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और पहचान भी मिलती है ।रक्तदान से किसी के जीवन बचाने पर जो अधिक खुशी और सन्तुष्टि प्राप्त होती है ,उसका कोई मोल नहीं होता ।

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