बाढ़ के चपेट में बिहार : स्थिति हुई भयावह, सीएम का हवाई सर्वेक्षण, विस्तृत रिपोर्ट

पटना.बिहार {मधुरेश प्रियदर्शी} ~नेपाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार बारिश से उत्तर बिहार व सीमांचल में सोमवार को बाढ़ की स्थिति भयावह हो गयी । किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, सीतामढ़ी में हालात सबसे गंभीर हैं। कई स्थानों पर रेलवे ट्रैक डूबने की वजह से करीब डेढ़ दर्जन ट्रेनें या तो रद्द कर दी गयी हैं या उन्हें उन्हें परिवर्तित मार्गों से चलाया गया है। कई राष्ट्रीय राजमार्गों और स्टेट हाईवे पर यातायात बंद हो गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सेना और एनडीआरएफ के जवान राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र से व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य के लिए मदद मांगी है। नीतीश कुमार आज बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया।

राज्य सरकार की तरफ से किए जा रहे राहत और बचाव कार्य की जानकारी देते हुए आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने सोमवार को बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में कुल 33 टीमें काम कर रही हैं जिनमे 300 जवानों के साथ सेना की चार टुकड़ियां और लगभग 700 जवानों की नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ ) की 16 टीमें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेना की और टुकड़ियों को राहत और बचाव कार्य में लगाया जाएगा। अमृत प्रत्यय ने बताया कि दो हेलीकॉप्टरों और 144 नावों के साथ बाढ़ में फंसे लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से दूरभाष पर बातचीत कर उन्हें उत्तर बिहार के सीमांचल क्षेत्रों में आई बाढ़ की स्थिति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान स्थिति से निपटने के लिए सेना की मदद भी मांगी थी जिसके बाद राज्य सरकार को सेना के जवान उपलब्ध कराए गए।

किशनगंज, अररिया, पूर्णिया ,कटिहार, मधुबनी ,दरभंगा , पश्चिम चंपारण जिलों में लगातार हो रही भारी बारिश तथा बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण बाढ़ की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। कोसी, कमला बलान ,गंडक समेत उत्तर बिहार की अधिकांश नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। पानी के लगातार बढ़ रहे दबाव के कारण कई स्थानों पर तटबंधों में दरार आ गई है जिससे निचले इलाकों में बसे कई गांव जलमग्न हो गए हैं।

जिलों से मिल रही आधिकारिक रिपोर्ट में बताया गया है कि कई प्रभावित गांवों का जिला मुख्यालयों से सड़क तथा रेल यातायात से संपर्क टूट गया है। किशनगंज के शहरी इलाकों में भी दो से तीन फुट पानी बह रहा है। जिले के कोचाधामन ठाकुरगंज और दिघलबैंक बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। किशनगंज का रेलवे स्टेशन पूरी तरह जलमग्न है इसके अलावा अररिया के फारबिसगंज रेलवे स्टेशन में भी रेलवे ट्रैक पर बाढ़ का पानी बह रहा है।

बाढ़ की वजह से दिल्ली, गुवाहाटी और कोलकाता से इस क्षेत्र का संपर्क कट गया है तथा कई महत्वपूर्ण रेलगाड़ियों का परिचालन प्रभावित हुआ है।

उत्तर बिहार में नदी के जल ग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही तेज बारिश और विभिन्न बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कमला बलान नदी का पश्चिमी तटबंध दरभंगा के घनश्यामपुर में बुढैब-इनायतपुर पंचायत के निकट टूट गया ।

सर्किल ऑफिसर रंभू कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बांध की क्षमता 57 फीट पानी वहन करने की है । उन्होंने बताया कि 57.15 फीट बहने लगा जिसके कारण तटबंध टूट गया। इस बीच अधिकारिक सूत्रों ने माना कि संसाधनों के अभाव के कारण समय से कमजोर तटबंध की मरम्मत नहीं की जा सकी। सूत्रों ने बताया कि तटबंध के टूटने से गोराबौराम एवं अलीनगर विधानसभा के 33 पंचायत के लगभग दो लाख की आबादी बाढ़ के चपेट में आ गई।

घनश्यामपुर प्रखंड के सभी 12 पंचायत, किरतपुर के पांच पंचायत गोराबौराम के 10 पंचायत एवं बिरौल कुशेश्वरस्थान प्रखंड की पांच पंचायत बुरी तरह बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा नये इलाकों में भी बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। तटबंध के आसपास बसे रसयारी,घनश्यामपुर,आधारपुर,बौराम गांवों के हजारों लोग घर खाली कर ऊंचे स्थान पर शरण ले रहे हैं।

इस बीच कटिहार जिले के कदवा प्रखंड में महानंदा के तटबंध में शिवगंज और गूठली के पास दो स्थानों पर दरार आ गई है जिससे निचले इलाकों के गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है । कदवा प्रखंड में महानंदा तटबंध शिवगंज और गुठली के पास टूट गया। बांध पर बसे कई घर पानी में बह गए। हालाकि समय रहते लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था।

 

पूर्णिया में आधिकारियों ने सोमवार को यहां बताया कि उड़ीसा के भुवनेश्वर से एनडीआरएफ की टीम को लेकर सेना का एक विशेष विमान पूर्णिया के चूनापुर सैन्य हवाई अड्डे पर रविवार की देर शाम उतरा। सूत्रों ने बताया कि एनडीआरएफ की इस टीम में 160 जवान शामिल हैं जिन्हें बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य में लगाया जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि किसी भी विशेष परिस्थिति से निपटने के लिए सेना की टीम पूर्णिया में रहकर किशनगंज में उत्पन्न होने वाली विशेष परिस्थिति से निपटेगी।

पूर्णिया के जिलाधिकारी प्रदीप कुमार झा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में सोमवार से सूखा राशन राहत पैकेट का वितरण शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि राहत सामग्री वितरण के लिए लिए राज्य सरकार की ओर से हेलीकॉप्टर पूर्णिया भेजा गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि 50 हजार सूखे राशन के पैकेट तैयार किये गए हैं जिसे प्रभावित लोगों के बीच हेलीकॉप्टर से वितरित किया जा रहा है ।

उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत कैम्प खोले गए हैं, जहां पीड़ितों के लिए भोजन एवं चिकित्सा की समुचित व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाके में फंसे लोगों को निकालने के लिए स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स( एसडीआरएफ) की टीम को लगाया गया है। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीम रविवार की रात से ही प्रभावित इलाकों में काम कर रही है।

इस बीच राज्य सरकार के उद्योग विभाग के सचिव एस सिद्धार्थ ने पूर्णिया में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलाये जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों की जिलाधिकारी के साथ समीक्षा की ।

रविवार की देर रात 3500 पैकेट सूखा राशन वितरण के लिए जिले के बायसी भेजे गए तथा 6000 पैकेट एयर ड्रॉपिंग के लिए भेज जा रहे हैं।

 

इस बीच कटिहार से नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ( एनसीपी ) के सांसद तारिक अनवर ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने की मांग करते हुए कहा कि कटिहार की स्थिति अत्यंत गंभीर है जहां कई लोग बाढ़ के पानी में फंसे पड़े हैं।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी कहा कि उत्तर बिहार के सीमांचल क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति काफी गंभीर है।

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