बिजली गुल है; नेताओं की, टंकी फुल है : गंगेश मिश्र

” कुछ भी तो अब, सही नहीं है “………
“““““““●<>●“““““““`
क्या नहीं था ?
क्या नहीं है ?
कुछ भी तो अब,
सही नहीं है।
भूख है, बेकारी है,
प्यास है, लाचारी है,
चोरों की फुलवारी में,
काँटों का व्यापारी है।
कुछ भी तो अब,
सही नहीं है।
क़फ़न चोर,
सरकार के बन्दे,
करते हैं,
हर काम ये गन्दे।
अगुवा रोगी,
पछुवा लोभी;
कुछ भी तो अब,
सही नहीं है।
बर्बादी की नीव,
तो रखी,
माओ के रिश्तेदारों ने;
झूठ- फ़रेब के,
मकड़जाल में,
उलझाया गद्दारों ने।
उसी वंश के,
ओली भैया।
नाच दिगाए,
ताताथैया।
कुछ भी तो अब,
सही नहीं है।
हवा महल है,
बिजली गुल है;
नेताओं की,
टंकी फुल है।
गैस है मिलता,
हाफ़ सिलिंडर;
कुछ भी तो अब,
सही नहीं है।

Loading...
%d bloggers like this: