बीमार को दवा के साथ–साथ काउन्सलिङ की जरुरत

डां. रंगीना शाह स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं । अलका अस्पताल प्रा. लि. में कार्यरत डा. शाह के.यू. से एम बी बी एस एवम् एम. डी. की हुई हैं । सिद्धि स्मृति प्रतिष्ठान में भी संलग्न मृदुभाषी डां. रंगीना से महिलाओं एवम् किशोरियों के स्वास्थ्य समस्या को लेकर विजेता चौधरी से हुई विशेष बातचीत का सार प्रस्तुत है –
० स्त्री रोग विशेषज्ञ के नाते नेपाली महिलाओं की साझा स्वास्थ्य समस्या क्या देखती हैं ?

Dr. Rangina

डां. रंगीना शाह स्त्री रोग विशेषज्ञ

– नेपाली महिलाओं की सब से बडी समस्या संक्रमण की है । जिस की वजह से वे बहुत सारे रोगों से ग्रसित होती हैं । मेरे पास भी इस से संबन्धित केस ही ज्यादा आते हैं । अधिकांशतः मासिकधर्म की गडबडी, निचले पेट का दुखना, सफेद पानी बहना, पाठेघर क्यान्सर आदि रोगों से ग्रसित हैं नेपाली महिलाएं ।
० महिलाओं मे उपरोक्त समस्या क्या सिर्फ संक्रमण की वजह से होता है ?
– नहीं महिलाओं मे ये सारी समस्या योनाङ्ग की उचित साफसफाई न करने की वजह से होने बाले संक्रमण, कम उम्र में बच्चे पैदा करना, कम उम्र में यौन सम्पर्क करना, ज्यादा व्यक्ति से यौन सम्पर्क रखना, अधिक बच्चे पैदा करना आदि समस्या की वजह से महिला प्रभावित है ।
० निदान का क्या सलाह देती हैं आप, कैसे बचा जा सकता है इन समस्याओं से ?
– प्रत्येक महिला को कम से कम एक बार नियमित स्वास्थय जाँच करवानी चाहिये । समस्या है या नही ये जानने के लिए भी जाँच आवश्यक है । यौन सम्पर्क में आ चुकी २१ से ६० साल उम्र तक की महिलाओं को वर्ष में एक बार विशेषज्ञ से जाँच करवाएं एवम् पाठेघर के मुँह की भी जाँच अवश्य करवाएं ये मेरी सलाह है ।
० आप के पास रोज बीमार आते हैं, नेपाली महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति कितना संवेदनशील पाती हैं आप ?
– सच पूछिये तो नियमित जाँच की बात तो महिला को पता ही नही हैं । समझाते हैं तो उल्टा शिकायत आता है । शिक्षित महिलाओं मे भी स्वास्थय जाँच की सोच नहीं है । मेरे पास आर्इं पेसेन्ट का शिकायत ही यही होती है कि आप मेरा पाठेघर का मुँह क्यों चेक करती हैं । जाँचेंगे नहीं तो समस्या कैसे पता चलेगा । तो अवस्था यह है । पाठेघर मुँह के क्यान्सर से नेपाल में मात्र पिछला साल २०० महिलाओं का निधन हो गया । जब की पाठेघर क्यान्सर का रोकथाम उपलब्ध है पर चेतना के अभाव में महिलाएं मृत्यु के मुँह मे पहुँच रही हैं ।
० तो चेतना कैसे जगाया जाए ? आप एक कांउसलर भी हैं, किस तरह के सलाह के लिए आपके पास बीमार आते है ?
– सब से बडी बात सम्पूर्ण चिकित्सकों को बीमार को दवा के साथ साथ कांसलिंग भी करना अनिवार्य है । डा. निःसन्देह व्यस्त रहते हैं पर अपने पेसेन्ट को पूछने का उचित समय व मौका अवश्य दें । दूसरी बात मैं स्कुल जाने वाली किशोरी को स्कूल में पहुँच कर ही फ्री कांउसलिंग देती हुँ । अभिभावक को भी बढते बच्चों का स्वास्थ्य समस्या लेकर कांउसलर के पास जाना चाहिए । स्कूल में ही क्याम्पेनींग करते वक्त बहुत सारे अभिभावक को लिख कर भेजना पडता हैं उनकी समस्याओं के बारे में । स्वयम् से कांसलिंग के लिए आना बहुत कम ही होता है ।
० कितनी बार तक गर्भपतन को सुरक्षित माना जा सकता है ?
– गर्भपतन कितना सुरक्षित है नहीं है ऐसा नही होता है । स्थायी साधन अपनाना चाहिये । १२ हपm्ता तक के गर्भपात को सुरक्षित माना गया है । इस से ज्यादा समय का गर्भपात के लिए कारण होना चाहिये । जैसे माँ को जान का खतरा, बच्चे मे अपांगता, बलात्कार से बैठा बच्चा रह गया हो तो ऐसे मे अवस्था एवम् कारण देख कर गर्भपतन करवाया जाता है । वैसे एक बार से ज्यादा गर्भपात करवाना असुरक्षित हो सकता है ।
० नेपाल के दुर्गम जिलों मे स्वास्थ्य क्याम्पेनींग की है ? उधर की महिलाएं क्यों स्वास्थ्य समस्या से अधिक प्रभावित रहती हैं ? क्या है अवस्था ?
– दुर्गम में कभी पोस्टिंग नही हुई । ना तो कभी क्याम्पेनींग करने का अवसर ही मिला परन्तु दुर्गम में भी समस्या वही हंै, आन्तरिक साफ सफाइ का चेतना का अभाव । यौनांग साफ रखने की बात ही पता नही होती है । मासिकधर्म के समय मे भी प्याड प्रयोग नही करती, कपडे को भी साफ से प्रयोग करना नही जानती, कम उम्र मे विवाह, खानपान, ज्यादा बच्चे पैदा करना आदि कारण है दुर्गम की महिलाओं मे अधिक स्वास्थ्य समस्या दिखाई पडना ।
० समय देने के लिए धन्यवाद, अन्त में आप कुछ विचार रखना चाहें तो स्वागत है ।
– हिमालिनी को भी धन्यवाद, बस इतना ही कि कोई समस्या हो तो शुरुआत में ही चिकित्सक के पास जाए । चेतना जगाने का काम स्वास्थ्य विभाग व चिकित्सक भी करे साथ ही बीमार महिला को भी स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की सलाह देती हूँ ।

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